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ज्ञान जी का प्रस्ताव और धन!

मेरे कल के आलेख प्राचीन भारत में आर्थिक विषमता नहीं थी! पर टिपियाते समय ज्ञानदत्त जी ने एक आश्चर्यजनक बात कह दी जो इस प्रकार है: मनुष्य समान बन नहीं सकता। पूंजी को आप समान बांट भी दें तो वह कालान्तर में पुन: वही असमान बंट जायेगी।  [ज्ञानदत्त पाण
 
Shastri JC Philip
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बाजार और पूंजीवाद का बढ़ता वर्चस्व : एक विश्लेषण

आज बाजार का दखल कहां नहीं है, यह प्रश्न बेमानी लगते हुए भी जरूरी-सा लगता है। बाजार हमारी हर जरूरी-गैरजरूरी चीजों व जरूरतों में शामिल है। अब हम नहीं बाजार हमारी जरूरतों की चीजें को निर्धारित करता है। उन्हें बनाता है। हमें क्या खाना, क्या पहनना, क्या स
 
अंशुमाली रस्तोगी
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भेड़-बकरियां ही हैं हम

भेड़ बकरियों से ज्यादा कुछ नहीं हैं हम. फिर शशि थरूर के बयान पर बवाल कैसा? कौन लोग हैं जो शशि थरूर के बयान पर बबाल मचा रहे हैं? इन लोगों में तथाकथित धर्मनिरपेक्ष मीडिया शामिल है, जो कांग्रेस को महान साबित करने में तन, मन और धन(गैर-वाजिब) जुटी हुई है. देश
 
Satyajeetprakash
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क्या हिंदी पट्टी के पत्रकारों के वजह से देश में हिंदी प्रदेशों की गलत छवि बन रही है ?

मेरा मानना है कि हिंदी पट्टी के मीडिया कर्मी ज्यादा संख्या में होने से एक प्रकार की मुसीबत सी हो रही है। एक इमेज सी बनती जा रही है यू पी बिहार के बारे में कि ये लोग ऐसे होते हैं..वैसे होते हैं। रहने का ढंग नहीं जानते है आदि...आदि...।    &nb
 
सतीश पंचम
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बाबू बडा या पीएचडी थीसिस्!!

पिछले कई दिनों से मैं भारतीय शिक्षा व्यवस्था की शोचनीय हालात के बारे में बता रहा था. शिक्षा की इस दयनीय हालत के लिये कई प्रकार के लोग जिम्मेदार हैं और इन में से एक है शैक्षणिक संस्थानों से संबंधित वे  बाबू लोग और कर्मचारी जो बात बात पर अडंगा डाल
 
Shastri JC Philip
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घोडों को खच्चर बनाया जा रहा है!!

भारत की चिंतन परंपरा न केवल अतिप्राचीन है बल्कि अति व्यापक भी है. फलस्वरूप भारतीय मनीषी लोगों ने अपनी तर्कशीलता के आधार पर जो ज्ञान प्रात किया और जिसे लिखित रूप में भावी पीढियों को दिया उसके तुल्य कोई कार्य दुनियां के किसी देश में नही हुआ है. राजाश्र
 
Shastri JC Philip
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मौलिक चिंतन जाये भाड में!!

कल के मेरे आलेख पर ab inconvinienti  ने टिपियाया: हर मौलिक चीज़ भारत में गटर में फेंकने लायक समझी जाती है. विदेशियों की नक़ल उतार कर उनकी बुराइयाँ ज़रूर अपना लेते हैं पर उनकी अच्छी बातें पूरी तरह नज़रंदाज़ कर दी जाती हैं. इसका एक अच्छा उदाहरण है
 
Shastri JC Philip
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भारतीय उच्च शिक्षा

यह लेख कई दिन से मन में चक्कर काट रहा था, लेकिन दो कारणों से इसे आज ही लिखने का इरादा बन गया. पहला कारण है इस हफ्ते के नाबेल प्राईज. दूसरा कारण है अनुनाद जी की एक सूचना कि दुनियां के 100 सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में एक भी भारतीय विश्वविद्यालय नहीं
 
Shastri JC Philip
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रट्टा मारो, पोजिशन लाओ!!

बीएससी प्रथम वर्ष, गणित का विद्यार्थी. बडे उत्साह के साथ मैं महाविद्यालय में पहुंचा था. मेरा लक्ष्य एकदम स्पष्ट था — मैं एक वैज्ञानिक बनना चाहता था. गणित की पहली कक्षा में ही हमारे योग्य अध्यापक ने 40 विद्यार्थीयों की कक्षा को समझाया “बेटा, केल
 
Shastri JC Philip
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विद्यालय दिमांग को कुंद कर रहे हैं!!

मेरे कल के आलेख भारतीय उच्च शिक्षा में मैं ने याद दिलाया था कि आज दुनियां के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में भारतीय विश्वविद्यालयों का नामोनिशान नहीं है. इसका कारण चालू होता है विद्यालय से. आज पढेलिखे एवं थोडे बहुत पैसे वाले लोगों के अधिकतर बच्चे अंग
 
Shastri JC Philip
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जब तबलची भौतिकी पढाये!!

मेरे कल के आलेख विद्यालय दिमांग को कुंद कर रहे हैं!! पर अंतर सोहिल ने टिपियाया: छोटे शहरों के छोटे-छोटे स्कूलों में तो 10वीं 12वीं तक पढी हुई लडकियों को 1200-1500/- में टीचर की नौकरी दी जाती है, जिन्हें बिल्कुल भी अनुभव नही होता है। और इन स्कूलों की
 
Shastri JC Philip
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नोबेल प्राईज क्यों नहीं !!

इस साल (शांति को छोड) 12 नाबेल प्राईज दिये गये हैं जिन में 11 अमरीका के निवासियों को मिला  है. क्या कारण है कि हिन्दुस्तानी लोग सहस्त्र-करोड रुपया वैज्ञानिक संस्थाओं पर खर्च करने के बावावजूद एक भी इनाम नहीं ले पाते. जैसा मैं ने पिछले चार आलेखों
 
Shastri JC Philip
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हिंद स्वराज के सौ साल

महात्मा गांधी के जन्म को 140 साल हो गए। सौराष्ट्र के एक उच्चवर्गीय परिवार में उनका जन्म हुआ था और परिवार की महत्वाकांक्षाएं भी वही थीं जो तत्कालीन गुजरात के संपन्न परिवारों में होती थीं। वकालत की शिक्षा के लिए इंगलैंड गए और जब लौटकर आए तो अच्छे पैसे
 
Shesh Narain Singh
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भ्रष्ट अफ़सरों की बेनामी संपत्ति जब्त हो

केंद्र सरकार भ्रष्टाचार पर निर्णायक हमला करने की तैयारी में है। केंद्रीय कानून मंत्री वीरप्पा मोइली का कहना है कि भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए बनाए गए कानून में संशोधन करके और धारदार बनाने की योजना पर काम चल रहा है। अगर मोइली अपने मिशन में सफल होत
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कैसे बदला तीन ही महीने में मतदाताओं का मूड !

मात्र तीन महीने में ही बिहार की राजनीति में क्या कुछ घट गया कि मतदाताओं का मूड ही बदल गया ? क्यों बिहार विधानसभा के इस सितंबर के उप चुनाव में 18 सीटों में से 13 सीटों पर राजग हार गया ? क्या यह बदला हुआ मूड एक बार फिर बदलेगा या यह मूड अगले साल तक कायम
 
Surendra Kishore
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‘आजादी लाओ’ से ‘आजादी बचाओ’ तक का सफर

स्वतंत्रता सेनानियों ने दशकों पहले अपना ‘आज’ न्योछावर करके हमारे ‘कल’ के लिए आजादी की बेजोड़ जंग छेड़ी थी। तभीे हम 62 साल पहले आजाद हुए। पर, इतने साल में हमारे सत्ताधारी व प्रतिपक्षी नेताओं ने इस देश के साथ क्या-क्या किया? कैसा सलूक किया? देश के लिए कितना
 
Surendra Kishore
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जस की तस धर दीनी चदरिया

‘जस की तस धर दीनी चदरिया।’डी.एन.गौतम जब आज रिटायर हो रहे हैं तो कबीर की उपर्युक्त उक्ति सहसा याद आ रही है।काश इस लोकतंत्र में अफसर के बदले नेता के लिए इस उक्ति का ं अक्सर इस्तेमाल करने का मुझे अवसर मिलता !ऐसा होता तो मुझे और भी अच्छा लगता। बिहार के एक
 
Surendra Kishore
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काठ की हांडी फिर चढ़ा रहे हैं लालू

कभी के राजनीतिक महाबली लालू प्रसाद को इस बार लोक सभा की पिछली बंेच पर जगह दी गई है। बिहार की राजनीति में तो वे पहले ही पिछली कतार में पहुंच चुके हैं।क्या वे फिर कभी पहले की तरह राजनीति की अगली कतार में पहुंच पायेंगे ? खुद लालू प्रसाद ने पिछले महीने ही
 
Surendra Kishore
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यह छिपाने की नही बताने की बात है

सरिता की शादी को तीन माह भी नही हुए थे , वह अपने मायके आयी । उसकी सहेलियाँ मिलने आयीं तो उसके हाथों पर नीले निशान देख हैरान थीं । पूछने पर सरिता ने कहा -"कुछ नही, गिर गयी थी " और सहेलियाँ हिदायतें दे कर अपनी हँसी-ठिठोली मे लग गयीं।उधर माँ ने पूछा- "ब
 
सुजाता