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सात खून माफ़ ?

नोट: इस पाठ्यांश के सारे पात्र सत्य हैं. आशाओं के विपरीत, कल्पना से इनका दूर-दूर तक कोई सम्बन्ध नहीं है. संधू (मदारी): अबे! तू इतना घबराया क्यूँ है… करीम (बन्दर): कुछ नहीं सरकार! बस गर्मी है संधू: नहीं लगती तो बात कुछ और है…छिपाता क्यूँ है
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सात खून माफ़ ?

नोट: इस पाठ्यांश के सारे पात्र सत्य हैं. आशाओं के विपरीत, कल्पना से इनका दूर-दूर तक कोई सम्बन्ध नहीं है. संधू (मदारी): अबे! तू इतना घबराया क्यूँ है… करीम (बन्दर): कुछ नहीं सरकार! बस गर्मी है संधू: नहीं लगती तो बात कुछ और है…छिपाता क्यूँ है
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वार्षिक संगीतमाला 2009 :पॉयदान संख्या 17 - भँवरा भँवरा आया रे, कान में इतर का फाहा रे

वार्षिक संगीतमाला 2009 का एक महिने का सफ़र तय करते हुए आज हम आ पहुँचे हैं 17 वीं पॉयदान पर। पिछली पॉयदान पर आपने देखा की किस तरह पीयूष मिश्रा ने अपने गीत को तत्कालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मसलों को जनता के सामने पेश करने का माध्यम बनाया था। आज का ये
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इश्किया के गाने

कुछ शब्‍द इधर-उधर हुए हैं। गुलजार के प्रशंसकों पहले ही माफी मांग रहा है चवन्‍नी।इब्‍न-ए-बतूता इब्‍न-ए-बतूता ता ता ता ता ता ता ता ता ता इब्‍न-ए-बतूता ता ता बगल में जूता ता ता इब्‍न-ए-बतूता ता ता बगल में जूता ता ता पहने तो करता है चुर्र उड़ उड़ आवे आ आ,
 
chavanni chap