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बेकाबू माओवादी-घबराई सरकार:फिर कैसे हो समाधान

माओवादी अथवा नक्सली हिंसा के विरुद्ध केन्द्र सरकार का कुछ राज्य सरकारों के सहयोग से चलाया जाने वाला आप्रेशन ग्रीन हंट जारी है। इस आप्रेशनContinue Reading »
 
tanveerjafri1
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भारत के मुसलमान क्या बहरे हो गये हैँ?

तेरह वर्ष की राधा का दिसंबर 2009 में अपहरण कर लिया गया था और अभी तक उसके ठिकाने के बारे में कोई खबर नहीं मिली है. राधा के पिता, मेहंगा राम ने कहा कि उन्होने हर चौखट पर अपनी गुहार लगाई, राष्ट्रपति से लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव तक को इस बात से
 
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विवाह प्रथा की ऐसी की तैसी !

न्यायालय की उक्त टिप्पणी एक ऐसे समय पर आई है जब हमारा युवा समाज तमाम सामाजिक मान्यताओं को ध्वस्त करते हुये कुछ भी करने को बेताब दिखाई दे रहा है। ऐसे में इस प्रकार की टिप्पणी आग में घी डालने जैसी ही साबित होगी।
 
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विवाह प्रथा की ऐसी की तैसी !

न्यायालय की उक्त टिप्पणी एक ऐसे समय पर आई है जब हमारा युवा समाज तमाम सामाजिक मान्यताओं को ध्वस्त करते हुये कुछ भी करने को बेताब दिखाई दे रहा है। ऐसे में इस प्रकार की टिप्पणी आग में घी डालने जैसी ही साबित होगी।
 
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रोशडेल पायनियर्स

सहकारिता आंदोलन के उन्नायक : अठाइस महान बुनकर इटली की एक कहावत है—जो धीरे चलते हैं, वे दूर तक जाते हैं. इस कहावत को सच कर दिखाया था, रोशडेल पायनियर्स ने. पूंजीवाद से उत्पीड़ित गरीब बुनकरों ने, जो संख्या में केवल अठाइस थे. उनका सपना था, मुक्ति का. उनका
 
adhyatan
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दलित विमर्श

बीसवीं सदी के अंत तक दलित वर्ग तथाकथित सभ्‍य समाज में सर उठाकर खुद को दलितवर्गीय कह सकने की हिम्‍मत नहीं करता था, कहीं उसे अपमानित न होना पड़े-लेकिन आज का दलित अपनी पहचान के लिए, अपने स्‍वाभिमान के लिए, सर उठाकर, सीना तानकर संघर्ष कर रहा है, तथापि उसके
 
adhyatan
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क्रिकेट-करकट

भारत में जितनी चर्चा क्रिकेट की लोकप्रियता की होती है, उसका सहस्रांश भी उसके कारणों की समीक्षा पर खर्च नहीं होता. जैसे मान लिया गया है कि क्रिकेट हमारे खून में है. एक नामी-गिरामी संपादक जो सती प्रथा और क्रिकेट का एकसमान गुणगान करते थे, हाल ही में ‘क्
 
kashyap omprakash
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धर्म बनाम दर्शन

भारतीय परंपरा में नास्तिक का अभिप्राय वेद को प्रामाण्य मानने से है. तदनुसार वेदों को आप्तवचन—ऊपर से उतरा हुआ, अपौरुषेय माना जाता है. परंतु व्यवहार में आस्तिक या नास्तिक का अर्थ क्रमशः ईश्वर को मानना या न मानना रह गया है. भारतीय दर्शन परंपरा में ऐसे भी
 
adhyatan
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गांधी याद हैं, लालबहादुर याद रहा तो याद कर लेंगे

आज दो अक्टूबर है। गांधी जयंती। गांधी के बहाने गांधी को याद करने का 'एक दिन'। आज दो अक्टूबर है। लालबहादुर जयंती। लालबहादुर के बहाने लालबहादुर को न याद करने का 'हर दिन'। हमें हर बार और हर कहीं सिर्फ गांधी ही याद रहते हैं। गांधी की बातें। गांधी का चरखा।
 
अनुजा
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लोकतंत्र की दुहाई के बहाने

सीधी-सी बात है। दुहाई देने में न पैसे खर्च होते हैं न दिमाग। आप अपनी सुविधानुसार कहीं भी, किसी भी बात या संदर्भ में कुछ भी दुहाई दे सकते हैं। दुहाई सबके लिए मुफीद है। दुहाई देने से बात का वजन बढ़ता है। बुद्धिजीवियों के बीच आपकी अलग-सी छवि बनती है। वि
 
अंशुमाली रस्तोगी