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गिनती गिन लो प्यारे भाई!

यह कविता भी प्रतिमा की यादों से. आप भी अपनी यादों के झरोखे से एकाध कवितायें लाइये, ताकि आज के बच्चे उनका स्वाद ले सकें. भेजें- gonujha.jha@gmail.com परइस कविता के लिए प्रतिमा कहती हैं- "इस कविता से मेरी नानी की यादें जुड़ी हैं . इस कविता को हमने कहीं पढ़ा
 
Vibha Rani
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एयर होस्टेस कितना बतियाती हैं?

छम्मकछल्लो देश की तरक्की से बहुत खुश है. उस दिन उसने अखबार में पढा कि भारत की तरक्की देखकर ओबामा के पसीने छूटे. छम्मकछल्लो के भी पसीने छूट जाते हैं, अपने देश की तरक्की देख कर. अमेरिका कह्ता है कि भारत दूसरी विश्व शक्ति बनने जा रहा है. अमेरिका जो कहता है,
 
Vibha Rani
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सरकारी अधिकारी के ताब? बाप रे बाप!

सरकारी नौकरी के बडे नखरे हैं भाई! छम्मक्छल्लो भी कभी सरकारी नौकरी में थी. मगर तब वह छोटी थी, उसे समझ में नही आते थे ये नखरे या उसे करना नहीं आता था. यह अनभिज्ञता अभी तक बरकरार है. ख़ुदा करम करें कि यह बनी रहे.छम्मक्छल्लो अभी भोपाल गई थी. वहां उसकी पहचान
 
Vibha Rani
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"लाडली मीडिया अवार्ड "- chhammakchhallokahis.blogspot.comको

आए हाए हाए! बहुत दिन बाद छम्मकछल्लो आपसे मुखातिब है. अरे बस यूं ही, एक जान दिल जहान! सब कुछ कर लेने की ख्वाहिश! पता है ना कि एक ही जनम है, सो उसी में भरपूर जी लेने की चाहत! अभी दो-दो नाटक "बिम्ब-प्रतिबिम्ब" और "मि. जिन्ना" में लगी थी. जेलों में थिएटर
 
Vibha Rani
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पेंसिल और आदमी

पेंसिल बनानेवाले ने पेंसिल से कहा- "तुम्हारा जीवन एक नई दिशा की ओर जानेवाला है. इसलिए 5 बातें याद रखना- 1  जीवन में तुम कुछ भी महान कर सकते हो. अर्थात कोई भी महान रचना तुम्हारे द्वारा लिखी जा सकती है. इसलिए अपनी सामर्थ्य पहचानो. 2  कठिन धारदार
 
Vibha Rani
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सबसे आसान रास्ता-नशा!

एक बार शैतान एक आदमी के पास पहुंचा और उससे बोला- "तुम नशा कर लो." आदमी ने मना कर दिया कि वह नशा नहीं करता. शैतान ने कहा कि "अगर तुम यह नहीं कर सकते तो अपनी बीबी की पिटाई कर डालो." आदमी ने गुस्से से कहा कि "वह यह कैसे कर सकता है? वह क्यों बिना वज़ह अपनी
 
Vibha Rani
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गुडिया रोई मुन्नी रोई

यह कविता रेखा दी ने अपनी यादों की पिटारी से निकाल कर हमें दी है। आप भी अपनी पिटारी खोलें और कवितायें bhejen gonujha.jha@gmail.com पर नन्हीं मुन्नी ओढे चुन्नी गुडिया खूब सजाई है, किस गुड्डे के साथ हुई इसकी आज सगाई है. रंग बिरंगी ओढे चुनरिया माथे पर चम
 
Vibha Rani
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कितनी मेहनत?

एक आश्रम में बच्चे विद्या अर्जन किया करते थे। विद्या अर्जन के साथ-साथ उन्हें आश्रम के भी अन्य सारे काम करने होते थे। काम करने के बाद वे सभी छात्र जंगल जाते और वहाँ से सूखे पत्ते चुन कर लाते। रात में वे सब उन सूखे पत्तों को एक-एक कर जलाते और उनके प्रक
 
Vibha Rani
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मुनिवर नारद! नारायण! नारायण!!

हे मुनिवर नारद , आपने नारायण नारायण की रट लगा कर भवसागर पार कर ली। आपने ऐसा संदेश दिया कि जो नारायण नाम उचारेगा, उसे किसी भी तरह की मोह माया नहीं व्यापेगी। परंतु बावजूद इसके, आप नारायण की ही कृपा और उनकी ही महिमा से नारी के मोहपाश में बंध गये। इतने क
 
Vibha Rani
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गुजरात- यानी जहां गुजरे अच्छे से रात!

छम्मकछल्लो के एक मित्र हैं डॉ. माणिक मृगेश. गुजरात प्रेमी हैं. वे अक्सर कहते हैं, गुजरात- यानी जहां गुजरे अच्छे से रात! और यह जो शख्स है , उसका नाम प्रवीण है। वह प्राइवेट टैक्सी का ड्राइवर है। नरोदा पटिया में रहता है। समय बिताना था। हमारी गाड़ी अपने
 
Vibha Rani
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रब का बन्दा -एक लघु कथा

पढिये लघुकथा.कॉम पर अपनी एक लघु कथा. लिंक है- http://www.laghukatha.com/304-1.htm वह शहर के सबसे बड़ चौराहे पर था। आने-जाने वालों की संख्या बहुत थी। उसे अच्छे पैसे मिल जाते थे। वह खुश था। आज भी वह अपनी नियत जगह पर था। दफ्तर के बाबुओं का आना-जाना शुरू
 
Vibha Rani
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मुंबई में 8वां महिला नाट्यलेखक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आरम्भ

मुंबई में 8वां महिला नाट्यलेखक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन यानी Women Playwright International (WPI) 1 से 7 नवंबर, 2009 तक मुंबई विश्वविद्यालय के अकेडमी ऑफ थिएटर आर्ट तथा स्त्री मुक्ति संघटना, मुंबई के सौजन्य से आयोजित किया जा रहा है। WPI के गठन का उद्देश
 
Vibha Rani
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"एक्सप्लोसिव्स" में तोषी ने उकेरा ड्राइंग का एक नया पन्ना

आज जब हिन्दुस्तान और पाकिस्तान दोनों ही देश एक दूसरे के खिलाफ आग उगल रहे हैं, वैसे में तोषी यानी विधा सौम्या अपनी कला के माध्यम से दोनों देशों के बीच एक नया पुल रचने की प्रक्रिया में है. ज़ाहिर है कि पुल निर्माण की इस प्रक्रिया में वह अकेली नहीं है. उ
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“अजिंठा” में कब्र से निकल आई “पारो”

।com/2009/10/16/ajintha-in-nehru-theatre-festival/ http://www.artnewsweekly.com/substory.aspx?MSectionId=1&left=1&SectionId=31&storyID=९६ http://janatantra.com/2009/10/16/ajintha-in-nehru-theatre-festival/ नेहरु सेंटर थिएटर फेस्टिवल में इ
 
Vibha Rani
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व्यक्ति को कोसिए, संस्था को नहीं

जी, आज छम्मक्छल्लो नहीं, विभा रानी कह रही है, क्योंकि बात पर बात जब निकलेगी तब विभा रानी के लेखन पर भी आएगी। हिंदी का साहित्य जगत शायद अभी तक छम्मक्छल्लो से वाक़िफ नहीं हुआ है। भारतीय ज्ञानपीठ में भी विभा रानी की किताबें हैं और “नया ज्ञानोदय” में रचन
 
Vibha Rani
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नेहरु सेंटर, मुंबई का 13वां थिएटर फेस्टिवल

नेहरु सेंटर, मुंबई का 13वां थिएटर फेस्टिवल 3 से 14 अक्तूबर, 2009 तक आयोजित हो रहा है। 12 दिनों तक चलने वाले इस फेस्टिवल में मलयालम, उर्दू और बांग्ला के कुछ पुरस्कार विजेता नाटकों की भी प्रस्तुति होगी। 3 अक्तूबर, 2009 को फेस्टिवल की शुरुआत मराठी संगीत
 
Vibha Rani
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रिम-झिम बरसा पानी

कुछ बच्चियों ने मिल कर एक ब्लॉग -उन्हीं में से एक कविता यहाँ है। बारिश पर। आप भी पढें और अपनी यादों के पिटारे से कवितायें भेजे इस ब्लॉग पर देने के लिए रिम-झिम बरसा पानीलो भर जाते हैं सागर नालीनाचते है भालू मोरबच्चे खूब मचते शोरआते हैं जब बदल काले
 
Vibha Rani
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ओह, यह जकड़न

लोग और शास्त्र माँ को जाने क्या-क्या कहते है, किस-किस रूप में पूजते हैं. मगर वही माँ जब अपने बच्चे के प्रति निर्मम हो जाए तो उसे क्या कहेंगे. वह भी ऎसी-वैसी निर्ममता नहीं, उसके व्यक्तित्व, चत्रित्र व् शील के प्रति निर्ममता. अभी-अभी एक ऎसी माँ के बारे
 
Vibha Rani
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बन सकता है ताज महल फ़िर, चाहनेवाले अब भी बहुत हैं.

छाम्मक्छाल्लो की एक बुआ थी. खूब पूजा-पाठ वाली. शादी हुई. संयोग ऐसा कि फूफा भी उतने ही धार्मिक विचारोंवाले थे. बुआ की निभ गई. खूब निभी. ऐसी कि बस पूछें मत. फूफा अक्सर छाम्मक्छाल्लो के घर आते. घर के वे दामाद कहलाते. सो उसी तरह से उनकी आव-भगत छाम्मक्छाल
 
Vibha Rani
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जेल में राजेन्द्र बाबू की कैदी के रूप में सबसे बड़ी लाचारी

इस बार डाक्टर राजेन्द्र प्रसाद पर कुछ लिखने से पहले लेख पर छपी टिप्पणियाँ आपके अवलोकन के लिए। इसे हमारे मित्र व् राजेन्द्र बाबू के अनन्य भक्त हर्ष प्रसाद ने लिखा है। छाम्माक्छाल्लो अब से हर लेख पर पुस्तक का नाम आदि विवरण देने का प्रयास करेगी। आप सभी
 
Vibha Rani
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बाबा, फ़िर जेल कब जाओगे?

डाक्टर राजेन्द्र प्रसाद जब पटना सदर जेल में थे, तब श्री गोडबोले के आदेश से कई डाक्टरों ने उनकी जांच की। इससे धीरे-धीरे उनकी सेहत में सुधार आने लगा। कुछ दिन बाद निकट के सम्बन्धियों से मुलाक़ात की सुविधा मिलाने लगी। एक माह में २ मुलाकातें और २ पात्र लिख
 
Vibha Rani
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कबीर और आज

कल 'क़बीर' पर शबनम वीरमानी की २ दौक्यूमेंतारी फिल्में देखने को मिलीं। इनमे से पहली फ़िल्म "हद-अनहद" इतनी अच्छी थी की उसकी तारीफ़ के लिए शब्द नहीं हैं। मुम्बई की एक संस्था 'विकल्प' हर माह के अन्तिम सोमवार को पृथ्वी थिएअर में दौक्यूमेंतारी फिल्में दिखान
 
Vibha Rani