धर्म, ईश्वर और स्त्री
मैं खुद को धर्म और ईश्वर के पाखंड से हमेशा दूर रखती हूं। मेरा न किसी धर्म में विश्वास है न किसी ईश्वर में आस्था। अक्सर अपनी इस आदत को लेकर मुझको दूसरों के विरोध का खामियाज़ा भी भुगतना पड़ता है। मगर मुझको उस खामियाज़े की परवाह नहीं। दूसरे मुझसे कहते हैं
Dec 24 2009 01:22 PM



Shuffle








