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यह कैसा आविष्कार ?

इंसान ने शुरुआत से ही विज्ञानं को अपना साथी बनाया हुआ है ............उसने अपनी हर जरूरत के मुताबिक अपने इसी साथी की मदद से अपने लिए ऐसी ऐसी खोजे करी कि आज वह अपनी धरती को छोड़ चाँद तक पर बसने के सपने सजा रहा है ! इन सब उपलब्धियों को देखे तो लगता है कि
 
शिवम् मिश्रा
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हजारों साल पुरानी ग्लोबल वार्मिंग की कहानी

हर साल गर्मी के रिकॉर्ड टूट रहे हैं। सभी बढ़ते तापमान से चिंतित हैं। चाहे विकसित देश हों या फिर विकासशील देश, सभी बढ़ते ग्लोबल वार्मिंग से चिंतित हैं। कैसे ग्लोबल वार्मिंग को रोका जाए, इसके लिए सम्मेलन पर सम्मेलन हो रहे हैं, लेकिन नतीजा सिफर निकल रहा है।
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ज्वालामुखी शांत, खतरा बरकरार

सारी दुनिया के लिए एक अच्छी खबर। अपनी राख की वजह से एक महीने तक यूरोप के हवाई ट्रैफिक को प्रभावित करने वाला आइसलैंड का ज्वालामुखी अब शांत हो गया है। ज्वालामुखी के क्रेटर का तापमान अब केवल 100 डिग्री सेल्सियस रह गया है। ज्वालामुखी से अब लावा की जगह केवल
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रेडिएशन एक सच्चाई

पूरे विश्व का हजारों टन कबाड़ भारत भूमि में रोज उतरता है। आने वाले कबाड़ का निरीक्षण करने के लिए हमारे देश में कोई नियामक संस्था नहीं है। 9/11 में ध्वस्त हुए ट्विन टावर का एक बड़ा हिस्सा भारत में आया था। रसायनिक अपशिष्ट के पुनर्चक्ररण का भी भारत एक बड़ा
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तू डाल डाल, मैं पात पात

यह चिट्ठी, साइबर अपराधों पर नयी श्रृंखला की भूमिका है। इस चिट्ठी को, सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो दाहिने तरफ का विज़िट,'मेरे पॉडकास्ट बकबक पर नयी प्रविष्टियां, इसकी फीड, और इसे कैसे
 
उन्मुक्त
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क्या वैचारिक शुद्धता का हमारी विद्या, आयु,,यश एवं बल वृ्द्धि से कुछ सम्बंध है ?

नीतिशास्त्र कहता है कि "माता-पिता,वृ्द्ध एवं गुरूजनों की सेवा से विद्या,आयु,यश एवं बल की वृ्द्धि होती है"। अपने बालपन की उम्र में हमने जब भी इस वाक्य को कहीं पढा या सुना तो हमेशा ही मन में यह शंका हुई कि भला वृ्द्धजनों की सेवा करने से आयु,बल इत्यादि कैसे
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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GSLV-D3: अगली पारी इसरो की बारी

असफलता में ही सफलता के बीज होते हैं। इसलिए हम ये नहीं कहेंगे कि स्पेस को भेदने में भारत असफल हो गया है। हिन्दुस्तान भले ही 15 अप्रैल को स्पेस में बादशाहत हासिल करने में कामयाब नहीं हो पाया, लेकिन इससे देशवासी जरा भी निराश नहीं है। क्योंकि देशवासियों
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ज्योतिष कूड़े का भार है

इस चिट्ठी में बीबीसी पर बेहतरीन विज्ञान श्रृंखला वंडरस् औफ द सोलर सिस्टम के बारे में और उससे पैदा हुऐ विवाद के बारे में चर्चा है। is citthi mein bbc per chal rahee behtreen shrnkhala Wonders of the Solar System aur us per huai vivaad kee charchha hai.
 
उन्मुक्त
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ज्योतिष कूड़े का भार है

इस चिट्ठी में बीबीसी पर बेहतरीन विज्ञान श्रृंखला वंडरस् औफ द सोलर सिस्टम के बारे में और उससे पैदा हुऐ विवाद के बारे में चर्चा है। is citthi mein bbc per chal rahee behtreen shrnkhala Wonders of the Solar System aur us per huai vivaad kee charchha hai.
 
उन्मुक्त
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हम न मानेंगे, हमारे मूरिसान लंगूर थे

इस चिट्ठी में चर्चा है कि, हिन्दुओं में विकासवाद का क्यों नहीं विरोध हुआ, और क्या भगवान विष्णु का वामन अवतार होमो फ्लॉरेसिएन्सिस (जिसके अस्थि पंजर इंडोनीशिया में मिले हैं) से प्रेरित है।इस चिट्ठी को, सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट
 
उन्मुक्त
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हम न मानेंगे, हमारे मूरिसान लंगूर थे

इस चिट्ठी में चर्चा है कि, हिन्दुओं में विकासवाद का क्यों नहीं विरोध हुआ, और क्या भगवान विष्णु का वामन अवतार होमो फ्लॉरेसिएन्सिस (जिसके अस्थि पंजर इंडोनीशिया में मिले हैं) से प्रेरित है।इस चिट्ठी को, सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट
 
उन्मुक्त
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दुनिया का डी.एन.ए.टेस्ट ज़रूरी है

  होली की मस्ती अब कम होने को है लेकिन बच्चों की मस्ती अभी कम नहीं हुई है ..हम सभी को अपने बचपन की होली याद आ रही है । चलिये " मस्तिष्क की सत्ता  "लेखमाला के इस लेख क्रमांक -5 की शुरुआत यहीं से करें ..
 
शरद कोकास
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"फिजिक्स ऑफ़ द इम्पोसिबल" – क्या यह सब संभव होगा?

उन्मुक्त जी अपने ब्लौग में अत्यंत विविधतापूर्ण लेख लिखते हैं और कभी-कभार अपनी प्रिय पुस्तकों का परिचय भी देते हैं. अपनी इस पोस्ट में उन्होंने मुझसे अनुरोध किया कि मैं इन दिनों पढ़ी जा रही किताब "फिजिक्स ऑफ़ द इम्पोसिबल" के बारे में लिखूं. इस
 
निशांत
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शंभर धागे सुखाचे

अमेरिकन शास्त्रज्ञ काय शोध लावतील याचा भरवसा देता येत नाही. अशी बातमी आहे कि त्यांनी असा धागा शोधून काढला आहे कि जो आपल्या कपड्यांमध्ये गुंफला जाईल. जशी आपल्या शरीराची हालचाल होईल त्यानुसार त्या धाग्यातून वीज निर्मिती होईल. या वीज निर्मितीचे प्रमाण
 
बहिर्जी नाईक
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विज्ञानं और तकनीक

अक्सर ही ऐसा होता है की लोग न जाने किस लक्ष्य के पीछे भागने में अपना उद्देश्य खो देते हैं| आज विज्ञानं के साथ भी यही बात है, सभी कलम तो उठाते हैं विज्ञानं लिखने को और लिखते हैं तकनीकी ज्ञान के बारे में| क्या ऐसा कुछ है की इन्हें इनका अर्थ मालूम नहीं, तो
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हम पोस्ट लिखते हैं नामी बनकर ... वे चुटकियों में उड़ा देते हैं बेनामी बनकर

Anonymous said...याने कि बेनामी ने कहा ...अरे भाई कुछ कहना है तो सामने आकर कहो! बुरका ओढ़ कर क्यों कहते हो। प्रशंसा करो, आलोचना करो, जो चाहे सो करो पर अपना परिचय देकर तो करो। जैसे हमने नामी बनकर पोस्ट लिखा है वैसे ही आप भी नामी बनकर टिप्पणी करो।हमने पोस्ट
 
जी.के. अवधिया
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सैकड़ों वर्ष पहले के इंजीनियर ही बेहतर थे

यह चिट्ठी सालों पुराने पानी संचय करने के तरीके को बता रही है। यह आज भी प्रसांगिक है। yeh chitthi puraane paani sanchay karne ke treeke ko bataa rahee hai. yeh aaj bhee prasangik hai. This post talks about old method of harvesting water that is still
 
उन्मुक्त
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जिन खोजा सो पाइया गहरे पानी पैठ ....

जिन खोजा तिन पाइया, गहरे पानी पैठ ...वैदिक विज्ञान ..वैदिक गणितसब कुछ भारतीय किताबों से सीखा ---कहना है आई आई एम् के क्षात्रों का , फ़टाफ़ट गणना करने वाले तरीकों के बारे में , पढ़िए ये समाचार ---ऊपर । बड़ा करने के लिए चित्र पर कहीं भी क्लिक करें ।----सब कुछ
 
Dr. shyam gupta
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अब बने न्यूरो सेल

चिकित्सा के क्षेत्र में वैज्ञानिकों ने चूहों पर प्रयोग कर उनके स्किन सेल्स को नर्व सेल्स में बदलने में सफलता पाई है. अभी तक इस क्षेत्र में जो प्रक्रिया अपनाई जाती थी वह स्टेम सेल्स के माध्यम से होती थी. स्टेम सेल्स के बाद इस तरह की खोज से भविष्य में नर्व
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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नवसुर में कोयल गाता है

ये हैं सबकी जानी-पहचानी कविता की चार पंक्तियाँ -काली-काली कू-कू करती, जो है डाली-डाली फिरती! ... ... ... ... ... ... ... ... जो पंचम सुर में है गाती, वह ही है कोयल कहलाती! और ये हैं चार पंक्तियाँ एक अनजानी कविता की - जब बसंत का मौसम आकर, इस धरती पर सज
 
रावेंद्रकुमार रवि
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बीज ही वृक्ष है।

मेरे एक मित्र हैं, अरविंद भारद्वाज, आज कल राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बैंच में वकालत करते हैं। वे कोटा से हैं और कोई पन्द्रह वर्ष पहले तक कोटा में ही वकालत करते थे। कुछ वर्ष पूर्व तक वे अपने पिता जी की स्मृति में एक आयोजन प्रतिवर्ष करते थे। एक बार उन्हों
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
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विज्ञान, क़ुरआन के आईने में

विज्ञान और विकास के इस दौर में आप जब मज़हब की बात करते हैं, तो लोग आपको अज्ञानी और पिछड़ा हुआ साबित करने की कोशिश करने लगते हैं, लेकिन...अगर बड़े-बड़े,ज्ञानी अल्लाह की एक किताब से सबक लेने वाले बन जायें तो ?अगर वैज्ञानिक अल्लाह की एक किताब से आज के
 
kuch to badlega
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ज्योतिषी का अर्थ सर्वज्ञाता होना नहीं हैं.........किसी भी विषय के जानकार की भान्ती ही ज्योतिषी की भी अपनी एक सीमा होती है।

किसी भी विषय का सामान्य ज्ञान जनसाधारण को न हो पाने की दशा में उस विषय के प्रति समाज में अनेक भ्रान्तियाँ उत्पन हो जाती है। ज्योतिष जो कि अपने आप में एक सम्पूर्ण विज्ञान है, परन्तु इसका विधिवत अध्ययन/अध्यापन न होने के कारण ही आज इसका वैज्ञानिक रूप
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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प्रधान मंत्री जी...... पर वैज्ञानिक हैं कहां?

.....पर वैज्ञानिक हैं कहाँ?वीरेन्द्र जैन गत दिनों हमारे प्रधान मंत्री श्री मनमोहन सिंह ने 97वीं भारतीय विज्ञान कांग्रेस के अवसर पर भारतीय वैज्ञानिकों का आवाहन करते हुये कहा कि वे विज्ञान को नौकरशाही और विभिन्न संस्थानों में व्याप्त पक्षपात से मुक्त कराने
 
वीरेन्द्र जैन
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सांस्कृतिक गुलामी की हसीन रातें

हाल ही में राष्ट्रीय विज्ञान कांग्रेस के अवसर पर प्रसिध्द वैज्ञानिक और इसरो के भू.पू, अध्यक्ष जी.माधवन नायर ने कहा विज्ञान की खोजों को भारतीय भाषाओं में लाने का प्रयास किया जाना चाहिए। भारतीय भाषाओं में अंग्रेजी के समानार्थी शब्द बनाए जाएं। जिससे विज्ञान
 
jagadishwar chaturvedi
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अपनी बद्धमूल धारणाओं को छोडकर ही किसी रहस्य से पर्दा उठाया जा सकता है!!!

चाहे देरी से ही सही, सर्वप्रथम तो समस्त इष्ट मित्रों तथा सुधि पाठकों को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाऎँ!!!चलिए अब बात करते हैं मेरी पिछली पोस्ट के बारे में, जिसमें मैने अपने जीवन से जुडे एक विचित्र घटनाक्रम का उल्लेख आप लोगों के सामने किया था। उसमें आपने
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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बन ही गया विश्व का पहला मोलीक्यूलर ट्रांजिस्टर

मोलीक्यूलर ट्रांजिस्टर बनाने में सफलता हासिल कर ली है। इलेक्ट्रानिक के क्षेत्र में इस कामयाबी को बहुत बडा़ कदम माना जा रहा है। आज से करीब साठ साल पहले बेल प्रयोगशाला में पहली बार प्रयोगात्मक ट्रांजिस्टर बनाए गए थे तब के बाद से अब जाकर वैज्ञानिकों ने इस
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कलैंडर का विज्ञान

[नया साल शुरु होते ही हम अपने कलैंडर बदल लेते हैं। लेकिन क्या आपको मालूम है कि कलैंडर की शुरुआत कैसे हुई? क्यों 1 जनवरी से ही वर्ष का आरम्भ माना जाता है? क्या किसी वर्ष में 365 की जगह 445 दिन भी थे? क्या किसी महीने में मात्र 21 दिन भी थे? विश्व में कितने
 
श्री देवेन्द्र मेवाड़ी जी
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ग्लोबल वार्मिंग कम करने हेतु उपग्रहों का प्रयोग

ग्लोबल वार्मिंग कम करने हेतु उपग्रहों का प्रयोगपृथ्वी पर बढ़ते तापमान (ग्लोबल वार्मिंग) को कम करने हेतु एक अच्छा उपाय सुझाया है-- डेण्टोन, अमेरिका के मि. क्रिश विलिस ने - कि एक विशाल सूर्य ढाल (Sun Shield) बनाकर अन्तरिक्ष में पृथ्वी की भूस्थिर कक्षा
 
हरिराम
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लड़का या लड़की मनचाही सन्तान प्राप्ति का सहज उपाय

लड़का या लड़की मनचाही सन्तान प्राप्ति का सहज उपायVedic way for Male Female childbirthपीएनएन में मीनाक्षी अरोड़ा जी ने "जेंटर मेंटर किट: बेटी तुम्हें मारने का एक और नया तरीका" नामक लेख में कन्या भ्रूण हत्या के मामलों का कटु-सत्य प्रकाशित किया है। देश
 
हरिराम
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रामसेतु तोड़ने सम्बन्धी पर्यावरणीय दृष्टि

हिन्दी चिट्ठाकार गूगल समूह की इस परिचर्चा में रामसेतु को तोड़ने के बारे में कई विचार व्यक्त किए गए हैं। अखबारों में इसके पक्ष और विपक्ष में तर्क-वितर्क दिए जा रहे हैं। कई लोग इसे राजनीतिक खेल कहते हैं तो कई अन्य इसे धार्मिक और पौराणिक आस्था का प्रतीक
 
हरिराम
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मैंने उसे थूकते हुऐ देखा है

विकासवाद का क्या सबूत है, मिसिंग लिंक कहां है - इस चिट्ठी में इसी की चर्चा है। इस चिट्ठी को आप सुन भी सकते है। सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह ऑडियो फाइल ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप, Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC medi
 
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समुद्र मंथन से – ब्रह्माण्ड के कोने तक

यह चिट्ठी 'सृष्टि दर्शन: समुद्र मथंन से - विकसित होता ब्रह्माण्ड' और 'हमारा जाना ब्रह्माण्ड' नामक प्रलेखी फिल्म के बारे में बता रही है। yh chitthi 'Visions of the Cosmos: From the Milky Ocean to an Evolving Universe' aur 'The Known Universe' naamak d
 
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समुद्र मंथन से – ब्रह्माण्ड के कोने तक

यह चिट्ठी 'सृष्टि दर्शन: समुद्र मथंन से - विकसित होता ब्रह्माण्ड' और 'हमारा जाना ब्रह्माण्ड' नामक प्रलेखी फिल्म के बारे में बता रही है। yh chitthi 'Visions of the Cosmos: From the Milky Ocean to an Evolving Universe' aur 'The Known Universe' naamak d
 
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कुछ दोहे--डा. श्याम गुप्त के.....

दोहा हिन्दी साहित्य का एक अति प्रचलित छंद है जिसे गागर में सागर भरने वाला कहा जाता है, प्राकृत में इसे दूहा कहा जाता था| यह मात्रिक छंद है जिसमें १३-११ /१३-११ मात्राओं के दो चरण होते हैं | यह छंद साहित्य के प्रत्येक रस-विधा में प्रयोग होता है। नीति व
 
Dr. shyam gupta
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दीपावली , विज्ञान व वैज्ञानिकता ---

विज्ञान , अर्थशास्त्र , सामाजिकता , मानवता , सत्व - आचरण व व्यवहार का समन्वय है , दीपावली का पर्व | घरों की सफाई,घूरा-पूज़न,कूड़ा- करकट जलाना, धन्वन्तरी पूजन , यम् पूजन आदि स्वास्थ्य-शुचिता , रोगों की रोकथाम , सामाजिक व रोकथाम चिकित्सा केवैज्ञानिक तथ्य
 
Dr. shyam gupta
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डॉ. संजय तिवारी को राष्ट्रीय रिसर्च अवार्ड

रायपुर । पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय इलेक्ट्रानिक विभाग में रीडर डॉ. संजय तिवारी को यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) ने राष्ट्रीय रिसर्च अवार्ड से नवाजा है । डॉ. तिवारी ने देश के पांच चुनिंदा विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों को पछाड़ा । इन्हें यह उप
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यू हैव किल्ड गॉड, सर

इस चिट्ठी में अमेरिका के लूज़िआना राज्य के साइंस एजूकेशन ऐक्ट, विलायती फिल्म 'क्रिएशन' और इस श्रंखला के निष्कर्ष की चर्चा है। इस चिट्ठी को आप सुन भी सकते है। सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह ऑडियो फाइल ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप,
 
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नवरात्रि में साबूदाने की खिचड़ी खाने से पहले सोचें..

नवरात्रि का पर्व प्रारम्भ होने जा रहा है और बहुत से श्रद्धालु इस तैयारी में हैं कि इस बार पूरे नौ दिन का उपवास कर ही लिया जाये । उस दिन एक मित्र से पूछा “ क्यों भई इस बार भी पूरे नौ दिन ? “ उन्होने कहा “ बिलकुल “ मैं जानता था उन्हे पर्व के बारे में
 
शरद कोकास
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सर जगदीशचंद्र बोस का संकल्प

आज बात करेंगे भारत के महान वैज्ञानिक सर जगदीशचंद्र बोस की, जिन्होंने पेड़-पौधों में संवेदनाएं होने की बात सिद्ध करके संसार को आश्चर्यचकित कर दिया था. इस महान खोज के अलावा बोस ने बेतार (wireless) तकनीक का प्रयोग करके रेडियो तरंगों के संप्रेषण के क्षेत