भला मानो होली है
निवेदन फागुन सेन जाने कब क्या हुआ बचपन हो गया लुप्तयौवन छलके देह से फागुन रखियो गुप्तकुछ छींटे महसूस कर भीगा सारी रात-मौसम हुआ शरारती खबर बांट दी मुफ्तभांग और होलीलगती पीकर भांग को होली बड़ी विचित्रफिर तो भाभी सा लगै देखो अपना मित्रअगर कहीं वो पास नहीं
Mar 01 2010 07:57 AM



Shuffle








