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चहुं ओर प्रकाश फेकने वाले दीप को ही हम सुंदर कह सकते हैं !!

आध्‍यात्मिक ज्ञान सहित जीवन प्रदत्‍त शिक्षा के लिए भारत विश्‍व में अग्रणी रहा है। साम्‍य भाव के स्‍तर पर निर्धन , धनी शिष्‍यों की एकता , नैतिकता और कर्मठता का पाठ व्‍यावहारिक , शैक्षिक स्‍थल से ही जिन गुरू आश्रमों में परहित भाव से प्राप्‍य था , अब वह
 
संगीता पुरी
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हमें समाज में पलती हिंसक अराजकता और उच्‍छृंखलता को समाप्‍त करने की आवश्‍यकता है !!

आज महानगर का लंबा राजपथ हो या गावं देहात की पतली पगडंडियां , सभी अपने अपने विकास के लिए व्‍याकुल एक दूसरे को धकियाते लोग आगे बढे जा रहे हैं । एक प्रश्‍न बार बार मन को कुरेदता है , कितनी जद्दोजहद के बाद मिली देश की स्‍वतंत्रता के कितने साल
 
संगीता पुरी