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साक्षात्कार हेतु छः लाख रुपये रिश्वत न देने का पछतावा है अब हमें.

पता नहीं यह बात सभी के समक्ष रखने लायक है अथवा नहीं पर अब जबकि अदालत की ओर से भी नियुक्तियों की अनुमति मिल गई है तो लगा कि अपनी व्यथा को आप सभी के सामने रख देना चाहिए। अपने मन का बोझ कुछ तो कम होगा।बात दरअसल यह है कि उत्तर प्रदेश के अशासकीय महाविद्यालयों
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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इतिहास को भुला कर हम दिखाना क्या चाहते हैं???

बहुत-बहुत भटके पर कोई और न मिला। नहीं जी, ये हमारे दिले नादान का हाल किसी प्रियतमा के लिए नहीं है, हाल ये है हमारा ब्लाग और समाज के चलन पर। आज का दिन कुछ विशेष है क्योंकि किसी विशेष का जन्मदिन है। सम्भवतः किसी को याद भी नहीं है? किसी को तो याद है तभी
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर