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एक आत्मीय वार्तालाप ......................सागर नाहर जी से ......................

 मैने दी एक दस्तक ........      सागर नाहर जी को ........और वे तकनीकी जानकारी देने हाजिर हो गए invisible होने पर भी ....................... आप भी पढिए ...........उनसे हुई पूरी बातचीत ......me:  नमस्ते Sagar: 
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“समीर लाल का स्वर सुन लिया!” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

“लाइव-संस्मरण” “…… ….. की आवाज पतली है?” दिनांकः 07-02-2010 समयः 9-47 PM अचानक मेरा चैट बॉक्स खुला- Udan: शास्त्री जी प्रणाम कैसे हैं. मुझे: नमस्कार जी! मैं ठीक हूँ आप कैसे हैं? Udan: बस, आपका शुभाशीष है आपके माईक है क्या? एक टेस्टिंग करना था. मुझे: भारत
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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"चाँद और निशा" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

विरह की अग्नि में दग्ध क्यों हो निशा,  क्यों सँवारे हुए अपना श्रृंगार हो। क्यों सजाए हैं नयनों में सुन्दर सपन,  किसको देने चली आज उपहार हो। क्यों अमावस में आशा लगाए हो तुम, चन्द्रमा बन्द है आज तो जेल में। तुम सितारों से अपना सजा लो चमन, आ न
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक