वर्षा तुम जल्दी आना!
वर्षा केवल पानी नहीं लाती, वह अपने साथ लगभग सभी इन्द्रियों की तृप्ति का साधन भी लाती है। कई महीनों से झुलसे हुए शरीर को वह फिर से हर इन्द्रीय सुख ग्रहण करने के लिए तैयार कर देती है। पहली फुहार पड़ते से ही मानव मन मोर की तरह नाच उठता है। उसका शरीर भीगता
Jun 01 2010 05:08 PM



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