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“रचनाएँ रचवाती हो!” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

रोज-रोज सपनों में आकर, छवि अपनी दिखलाती हो! शब्दों का भण्डार दिखाकर, रचनाएँ रचवाती हो!! कभी हँस पर, कभी मोर पर, जीवन के हर एक मोड़ पर, भटके राही का माता तुम, पथ प्रशस्त कर जाती हो! शब्दों का भण्डार दिखाकर, रचनाएँ रचवाती हो!! मैं हूँ मूढ़, निपट अज्ञानी,
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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"माँ तुम्हारी आरती में ही मेरा संसार है” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

आपका माँ! दास पर उपकार है उपकार है। आपके आशीष ही, मेरे लिए उपहार है।। आपके बल से कलम-स्याही, सभी की बोलती, कण्ठ में हो आप तो, रसना सुधा सा घोलती, गीत-छऩ्दों में समाया, आपका आधार है। आपके आशीष ही, मेरे लिए उपहार है।। हो रहा सारा जगत्, रौशन तुम्हारे ज्ञान
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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""शारदे जग का करो उद्धार!" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

बन्द ना हो जायें माँ के द्वार! वर दे वीणा वादिनी, वर दे ... बसन्त पञ्चमी की हार्दिक बधाई ! बन्द ना हो जायें माँ के द्वार! वन्दना करता हूँ मैं शत् बार!! मन में मेरे ज्ञान का प्रकाश कर दो, हृदय में मेरे नवल विश्वास भर दो, पुष्प-अक्षत माँ करो स्वीकार!
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक