सफ़र ही मंज़िल है
लौट आया…वैसे बुद्धु हो या होशियार लौट के घर तो आता ही है। क्या जगह है सिक्किम! इतनी प्यारी, इतनी आत्मीय,इतनी ख़ूबसूरत। ख़ुद को ही आदर्श मानने वाले हम कितना कुछ सीख सकते हैं उनसे। सबसे पहले तो यही कि ज़मीन कब्ज़ा करने से दिल कब्ज़ा नही होते। समझ ही नही आय
Oct 23 2009 09:15 PM



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