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सांप पंचायत

कुत्तों की पंचायत में कुतिया ने गुहार लगाई अगर सारे ये सब मेरे भाईतो में किसकी लुगाईपंचायत में एक दहाड़शेर बूढ़ा भी हो जुगाली तो कर ही सकता हेकुतिया शरमाई फिर में जंगल ही चली जातीकम से कम हनीमून तो मनातीपंचायत से फिर एक दहाडा हमारा हुक्म और तुम्हारी
 
makrand
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आप बताओ कौन सा लोकतंत्र सच्चा है

मेरी उम्र 30 वर्ष होने को है। मैंने कक्षा 9 से शायद अखबार में खेल के अलावा अन्य पेज देखने शुरू किए। तभी से मैं पढ़ता और सुनता आ रहा हूं कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। इस देश में सभी को अभिव्यक्ति की आजादी है। इसके बाद मैंने एमए प्रथम वर्ष की
 
rajiv pandey
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पत्रकार यानी लोकतंत्र का चौथा धब्बा...

मामा खबरुद्दीन से पार पाना बेहद कठिन होता है, लेकिन उस दिन मामा घर पर नहीं थे। उनका बेटा मोनू राम मिल गया। बोला, 'भइया, ये बुद्धिजीवी लोग कौन होते हैं?' दिल ने कहा, कहीं मामा की जगह आज उनके बेटे से तो मुठभेड़ नहीं हो जाएगी, दिमाग बोला, हो भी गई तो इस
 
प्रभात गौड़
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भगवान, इस देश को एक डिक्टेटर दे दो

उस शाम जब मामा से मिलने गया , तो वह कुछ परेशान से नजर आ रहे थे। पूछने पर पता चला कि आज किसी यूनियन का धरना-प्रदर्शन हो रहा था , उसी के चक्कर में बेचारे पूरे दो घंटे जाम में फंसे रहे।   मुझे हंसी आ गई। मैंने कहा , ' मामा, इसमें परेशान होने की क्य
 
प्रभात गौड़
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लोकतंत्र की लाज ...

मोहल् ला लाइव पर टीवी पत्रकार आशुतोष का एक लेख सर कलम करने की विचारधारा शीर्षक से छपा है , जिस पर अभी - अभी मैंने अपनी प्रतिक्रिया वहां छोड़ी है . उसी प्रतिक्रिया को मैं अपने पाठक मित्रों के लिए यहां पुनर्पेश कर रहा हूं . ‍ विश्‍वसतसूत्र और क्‍या कहत
 
राकेश
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भारत का कारपोरेट लोकतंत्र में रूपान्‍तरण

हरि‍याणा वि‍धानसभा चुनावों में वि‍भि‍न्‍न दलों के द्वारा जि‍स तरह के प्रत्‍याशी खड़े कि‍ए गए हैं उससे एक चीज साफ है कि‍ अब लोकतंत्र गरीबों का खेल नहीं है। लोकतंत्र में वही प्रत्‍याशी खड़ा हो सकता है जो धनी हो अथवा धनी दल का उम्‍मीदवार हो। यह लोकतंत्र
 
jagadishwar chaturvedi
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क़साब के बहाने कुछ सवाल

मुंबई हमलों के दोषी क़साब की तरफ से मुकदमा लड़ने के लिए नियुक्त वकील 'अंजलि वाघमारे' के घर पर जिस तरह पथराव किया गया, इससे कुछ सवाल निकलकर सामने आएँ हैं। गौरतलब है की वकीलों ने यह केस लड़ने से मना कर दिया था जिसके बाद विशेष अदालत ने इस केस में उन्हें क
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लोकतंत्र में 'जूता'

कहते हैं जब आदमी हर जगह से निराश हो जाता है तो भगवान को याद करता है। उनसे मदद मांगता है न मिलने पर उन्ही को कोसता भी है। लेकिन अब लोगों ने भगवान को छोड़कर जूते का सहारा ले लिया है। चारों तरफ दनादन जूते बरसें, अभी बरस रहे हैं, और मौसम देखकर लग रहा है
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प्रयोग या परिणाम?

मीरा कुमार को लोकसभा का अध्यक्ष बनाकर भारत के संसदीय इतिहास में एक नई इबारत लिख दी गई है। १५वीं लोकसभा, २००९ का चुनाव जहाँ कांग्रेस के लिए एक नया उत्थान सन्देश लेकर आया वहीँ संसदीय राजनीति का चेहरा भी प्रकाशवान हुआ है। मीरा कुमार के रूप में पहली बार
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२७ सितंबर: शहीद भगतसिंह का जन्मदिन

भगत सिंह का जन्म कृषकों के एक सिख परिवार में बंगा (लायलपुर-अब पाकिस्तान) में 27 सितंबर 1907 को हुआ था। आपके परिवार में सभी देशभक्त, सुधारवादी तथा देश की आजादी के दीवाने थे। बड़ा होने पर …” शेष के लिए समाचार पढ़ें - “दैनिक भास्कर̶
 
योगेन्द्र जोशी
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प्रधानमंत्री उल्लू तो गृहमंत्री कुत्ता, या इलाही माजरा क्या है ?

जरा देखिये तो जंतर -मंतर का नजारा है ! एक सज्जन हैं मच्छेन्द्र नाथ सूर्यवंशी , भारत की वर्तमान लोकतान्त्रिक शासन व्यवस्था से निराश और हताश , व्यवस्था परिवर्तन के सिपाही बने जंतर-मंतर पर धरना दे रहे हैं । मैं जब से देखता हूँ उनकी झोपडी वहीँ बनी हुई है
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SECULAR शब्द , संविधान और इंदिरा गाँधी

भारत आरम्भ से ही धर्म निरपेक्ष राज्य रहा है। यों SECULAR शब्द को संविधान की प्रस्तावना में घुसेड़ने का श्रेय श्रीमती इन्दिरा गान्धी का है। घुसेड़ने शब्द का प्रयोग बहुत ही प्रासंगिक है। जब सन 1947 से ही 'सर्व धर्म सम्भाव' की भावना एवं कार्यप्रणाली हमारे
 
varun singh
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नवगठित केंद्रीय सरकार – यूपीए (संप्रग) की या कांग्रेस की?

काफी जद्दोजेहद के बाद अंततः केंद्र की सरकार गठित हो ही गयी । पिछली बार की तरह इस बार भी कांग्रेस पार्टी ही सरकार का नेतृत्व कर रही है । इस बार उसे अन्य दलों को गठबंधन में शामिल करने में वैसा प्रयास नहीं करना पड़ा जैसा पिछली बार करना पड़ा । इस दफे घटकों
 
योगेन्द्र
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भाजपा की हार या कांग्रेस की जीत या.......

रात्रि के बजे हैं 11:20 और अभी-अभी टी0वी0 छोड़ कर उठे हैं। सारे दिन किसी न किसी रूप से परिणाम जानने की चाह बनी रही। चाह इस कारण से क्योंकि हमारे शहर में विद्युत व्यवस्था का आलम यह है कि दोपहर में 12 बजे जाने के बाद रात में आठ बजे ही घर में तारों के द्
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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ऐसे यौवन को धिक्कार

आज भारत में युवाओं का बड़ा महिमामंडन हो रहा है । ७१% नौजवानों की आबादी वाले राष्ट्र में युवाओ की राजनीतिक स्थिति पर चुनाव विश्लेषक योगेन्द्र यादव ने एक सटीक प्रश्न उठाया है कि " क्या सचमुच इस देश में ऐसा नौजवान युवा वर्ग मौजूद है जो अपने बूते राजनीति
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क्या देश में एक नेहरु खानदान ही नेता जनने की क्षमता रखता हैं ?

कल बस में बात-चित के दौरान एक यात्री ने कुछ प्रश्न खड़े किए,उसने जो कुछ कहा हु -बहू नीचे लिख रहा हूँ । " वर्तमान राजनीति के तीन तथाकथित युवा प्रतिनिधि राहुल , प्रियंका और वरुण ,सब के सब गाँधी !कांग्रेस हो या भाजपा गाँधी परिवार हावी है ! क्या देश में ए
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ये बदजुबान नेता और ये बेशर्म राजनीति

बड़ी बेशर्मी महसूस होती है जब ये लगता है कि हमें कुछ बेशर्म और बदजुबान लोगों में से किसी को चुनकर अपना भाग्य निर्माता बना देना है। संतोष भी होता है तब जब इस तरह के लोगों को जनता भी उनके ही अंदाज में गरियाते हुए खदेड़ देती है। इन सब बातों से यह तो तय
 
rajesh ranjan
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बाप के बाद बेटा फ़िर पोता .....................................

लोकतंत्र मूर्खों का शासन होता है पर, यहाँ तो मूर्खों ने लोकतंत्र को हीं राजशाही की ओर ठेल दिया है। राजतन्त्र नहीं तो और क्या है ? गाँधी, सिंधिया, पायलट, ओबेदुल्लाह जैसे खानदान ही शासन में बचे हैं। ये तो चंद बड़े नाम हैं छोटे-छोटे स्तरपर भी कई मंत्री
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छब्बीस जनवरी अर्थात् गणतंत्र दिवस, और मैं

आज गणतंत्र दिवस है, साठवां गणतंत्र दिवस । हर बीते वर्ष की तरह मनाया जाने वाला दिवस । अगले वर्ष इसी तारीख पर फिर मनेगा, हर बार की भांति रस्मअदायगी निभाते हुए । बड़े-बड़े संकल्पों की बात की जायेगी, देश की उपलब्धियां गिनी और गिनायी जायेंगी । लेकिन क्या है
 
योगेन्द्र