पसंद करें
8
नापसंद करें

एक अज़ब-गज़ब लोकगीत---->>>दीपक 'मशाल'

आज मस्तिष्क के समंदर में विचारों की लहरें उठने का नाम ही नहीं ले रही थीं, साथ ही तन और मन के देव और दानवों ने थके होने का बहाना बना के मंथन से भी इंकार कर दिया.ऐसे में सोचा की आपको कुछ ऐसा पढवाता हूँ जो औरों से काफी अलग हो. अगर आपको याद हो तो
 
दीपक 'मशाल'
पसंद करें
0
नापसंद करें

अतीत होते हमारे लोकगीत.....!!!

पिछली पोस्ट में त्रिनिडाड के बैठक संगीत के बारे मैने लिखा था पर ऐसा नहीं है कि ये बैठक संगीत सिर्फ़ और सिर्फ़ कैरेबियन देशों की थाती है....भाई हम भी कभी अपनी अंतरंग बैठकों में कुछ ऐसे गीतों को गाते रहे हैं कि जिस गाने से महफ़िल शुरू हुई होती वहां
 
vimal verma