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कांक्रीट क्रांति

यादों ने जहां जन्म लिया वह तीर्थ स्थल कांक्रीट क्रांति में शहीद हो चुका है। किंतु मस्तिष्क के किसी कोने में धुन्धलाती सी तस्वीर है, जिसे मैं चाह कर भी कागज़ पर नहीं उकेर सकता। कैसे उकेरुंगा? क्या कडकडाती ठिठुरती वह रात, शहर के बाहर की सुनसान अन्धेरे म
 
अमिताभ श्रीवास्तव