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भकुआए टीवी पत्रकार आज आप हमें गरिआइए

ये अपने रवीश ने सूर्यग्रहण के चक्कर में अपना क्या हाल बना रखा है? बिखरे हुए बाल,चेहरा उड़ा हुआ,आंखें ऐसी कि बेमन से खोल-बंद कर रहे हों,पलकों के उठने-गिरने में जबरदस्ती करनी पड़ रही हो,ताकत लगानी पड़ रही हो। बोलने का उनका मन ही नहीं हो रहा। कभी हंसते
 
विनीत कुमार