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राग दीपक उवाच

पूर्णिमा की रात में चाँद बदल जाते हैं ! वक्त के साथ वफादार बदल जाते हैं !! सोचता हूँ तेरी याद में वक्त बरबाद ना करूँ ! पर सोचते सोचते कमबख्त विचार बदल जाते हैं !! ********************************************** एक बदसूरत खातून से एक लफंगा बोला ! क्या
 
दीपक "तिवारी साहब"
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