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ओ रात के मुसाफिर

आज दो गाने आपके सामने पेश कर रहा हूँ, अभी ये दो गाने मेरे लैपटॉप पे कल से लगातार बज रहे हैं..उम्मीद है आपको पसंद आएगी :)पहला गाना "ओ रात के मुसाफिर,चंदा ज़रा बता दे..", रफ़ी साहब और लता जी द्वारा गाया हुआ और हेमंत कुमार जी का संगीत..फिल्म का नाम "मिस
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मां ! तुझसा नहीं कोई रिश्ता

लो एक बार फिर से आ गया मां-दिवस एक बार फिर से सुबह सुबह दी मुबारक़बाद उन्हें फ़ोन पर और बताया, आज है मां का दिन यानि मां-दिवसजानती तो नहीं कब और क्यों शुरू हुआ ये दिन जानती बस इतना हूं, है अधूरा हर दिन, तुम बिन दूर हूं, पर तुम हो दिल में हर पल-छिन है दुआ,
 
रवीन्द्र गोयल्
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नैनों में बदरा छाये

स्वर - लता मंगेशकरसंगीत - मदन मोहनगीत - राजा मेंहदी अली खांफ़िल्म - मेरा सायाइस फ़िल्म 1966 में रिलीज हुई थी और इस फ़िल्म के ज्यादातर सभी गाने बहुत हिट हुये थे.झुमका गिरा रे.. बरेली के बाजार मेंतू जहां जहां चलेगा.. मेरा साया साथ होगाआप के पहलू में आ कर रो
 
मोहिन्दर कुमार
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दिल का दिया जला के गया ये कौन मेरी तन्हाई में

दिल का दिया जला के गयाये कौन मेरी तन्हाई मेंसोये नग़मे जाग उठे,होंठों की शहनाई मेंदिल का दिया ...प्यार अरमानों का दर खटकाएख़्वाब जागी आँखों से मिलने को आये-2कितने साये डोल पड़े, सूनी सी अंगनाई मेंदिल का दिया ...एक ही नज़र में निखर गई मैं तो,आईना जो देखा संवर
 
मोहिन्दर कुमार
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वो देखो जला घर किसी का

फ़िल्म : अनपढ गीत : राजा मैंहदी अली खान संगीत : मदन मोहन कोहली
 
मोहिन्दर कुमार
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एक तू ना मिला...

फ़िल्म : हिमालय की गोद में
 
मोहिन्दर कुमार
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है इसी में प्यार की आबरू

फ़िल्म : अनपढ गीत: राजा मैंहदी अली खान संगीत : मदन मोहन कोहली
 
मोहिन्दर कुमार
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गिफ़्ट पैक

औरतों में प्रतिभा नही होतीपर होती हैं उनके पास बिन्दी, चूड़ियाँ, काजल..औरतों मेहनत भी नही कर पातींपर उन्हे आता है चहकना, खिलखिलाना, मुस्कुराना...औरतों के लिए आगे बढ़ना मुश्किल नही होता बड़ी आसानी सेवे बढ़ जाती हैं आगेअगले को अपनी मुस्कान का
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भोर भये पनघट पे, मोहे नटखट श्याम सताये

गीत: भोर भये पनघट पे मोहे नटखट श्याम सतायेफ़िल्म: सत्यम् शिवम् सुन्दरम् (1978)गीतकार: आनन्द बक्षीसंगीतकार: लक्ष्मीकांत-प्यारेलालस्वर: लता मंगेश्करगीत के बोल:खिले है आशा के फूल मन मेंयह राज़ हमने छुपाया हमनेक़दम मुबारक़ हमारे दर पेनसीब हमने जगाया हमनेहोऽ -२
 
Vinay Prajapati 'Nazar'
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जो समर मे हो गए अमर

सुबह-सुबह अनुराग शर्मा की पोस्ट ने अनायास ही बहुत पुराना गीत याद दिला दिया । लता दी के स्वर में,जयदेव का संगीत बद्ध आदरणीय पं नरेन्द्र शर्मा रचित -जो समर मे हो गए अमर । ये गीत मुझे सदा ही मौन कर जाता है । और अकेले मै ही क्यों …मुझे याद है कालेज के एन सी
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