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हम ऐसे क्यों है ?

 लघुकथा मै और वह रसोई में काम  करती हुई पत्नी के चेहरे की खीझ साफ दिखाई दे रही थी |उस पर घड़ी की तेज चलती हुई सेकण्ड की सूई उसकी खीझ
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गुलामी.

वह गुलाम है लेकिन उसकी मानसिकता नहीं. क्या हो गया जो उसने दो वक्त की रोटी के लिये ठाकुर से कुछ रुपये उधार ले लिये, इसके बदले में ठाकुर ने भी तो उसकी जमीन गिरवी रख ली थी.दो दिनों से उसका बेटा बीमार था कैसे जाता वह ठाकुर की खातिरदारी करने..?.उसने कोई गुनाह
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आज का गांधी

चौबीस-पच्चीस साल का एक युवक चौराहे पर भाषण दे रहा था-"दोस्तों , भ्रष्टाचार देश की सबसे बङी समस्या है. आज इसके चलते लोगों को नौकरी नहीं मिलती, लाचारों को न्याय नहीं मिलता, गरीबों को रोटी नहीं मिलती, सरकार के खर्च होनेवाले एक रुपया में से दस पैसा भी
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चीनी लघु कथा- परस्पर सहयोग

श्रीमान ई पिछले कई वर्षों से साहित्य की दुनिया में संघर्षशील थे, पर आज तक उन्हें कोई प्रसिद्दि नहीं मिली। उन्होंने अपने सारे सम्पर्कों का लाभ उठाया, फ़िर भी शोहरत नहीं मिल पायी। एक दिन उनकी मुलाकात प्रसि्द्दआलोचक च्यांग से हुई। उन्होंने च्यांग महोदय को
 
रतन चंद रत्नेश
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न अगाड़ी न पिछाड़ी ... उफ्फ !! ये नई गाड़ी (लघुकथा)

मार साले को .... अबे तेरे बाप की गाड़ी है जो खरोच मार दिया. पकड़ लो साले को ! और मैं भी नई चमचमाती गाड़ी को देखने लगा. खरोंच को भी देखने की जिज्ञासा हुई. पूरी गाड़ी देखा पर खरोंच नजर नही आई. उधर उस आटो चालक को पकड़ कर पीटने का भी कार्यक्रम शुरू हो चुका था.
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''चोर कहीं का..''(लघुकथा)----------------------------------->>> दीपक 'मशाल'

''कल तो किसी तरह बच गया लेकिन आज? आज कैसे बच पाऊँगा पिटाई से, जब घर पर पता चलेगा तो....'' ये सोच-सोच कर सिहरा जा रहा था वो. थोड़ी-थोड़ी देर बाद क्लास के बाहर टंगी घंटी को देखता जाता और फिर चपरासी को.. ठीक ऐसे जैसे जेठ की दोपहर में प्यास से
 
दीपक 'मशाल'
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भिखारी

वे खाते पीते घराने के थे।मगर उन्हें लगा कि कुछ करना चाहिये।उन्होंने अपने आस-पास ध्यान से देखा।कुछ कर दिखाने के अधिकांश क्षेत्र भाई लोगों ने पहले से ही हथिया रखे थे।सहसा उनकी नजर फुटपाथ पर भटकते एक भिखारी पर पडी।वे खुशी से उछल पडे,मानो अंधेरे में कोई
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मैं भी भूखा हूं.

संस्था में चार लोग काम कर रहे थे. कल मुझे एक हजार रुपये प्रति श्रमिक कुल चार हजार रुपये वेतन देना था.हाथ पर रुपये सिर्फ़ दो हजार ही थे.मैंने चारो श्रमिक के पिछले माह के कार्य का अवलोकन किया.दो श्रमिक लगातार कार्यालय में उपस्थित हुए थे. एक श्रमिक के दाहिने
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बसंत आर्य की लघुकथा : खिडकियाँ

मेहरा साहब उस दिन विमान मे बैठे बैठे किसी फिल्मी पत्रिका मे एक अभिनेता के सपनों के घर के बारे मे पढकर चौंक गये थे. चौंकना स्वाभाविक था, क्योकि वह अपने सपनों का महल किसी सुरम्य वादी या स्वर्ग मे नही बसाना चाहता था. वह तो बस इतना चाहता था कि उसका घर
 
रवीन्द्र प्रभात
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छमिया(लघुकथा)---------------------->>>दीपक 'मशाल'

नए शहर में पहले दिन बाज़ार से कुछ खरीदने गई थी रमा.... कि तेज धूप में अचानक सड़क पर गिरते उस लड़के को देख वो भी अपनी स्कूटी ले उसकी तरफ बढ़ गई. १०-१२ लोग लड़के को घेर कर खड़े हो गए, मगर सभी उसे देख केवल उसकी बीमारी के बारे में कयास लगाए जा रहे
 
दीपक 'मशाल'
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बड़ा आदमी(लघुकथा)----------------------------------->>>दीपक 'मशाल'

मुजीब ढाबे से चाय पीने के बाद लौट कर अपने ट्रक पर आया, गाना चालू किया और एक बार फिर ट्रक को पुणे की तरफ दौड़ा दिया.. थोड़ी देर बाद जैसे ही दो गानों के बीच गैप आता, उसे ऐसा लगता कि ट्रक में कोई दूसरा भी है उसने इधर-उधर देखा तो कोई दिखाई ना दिया. अपने
 
दीपक 'मशाल'
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सत्संग********* {लघुकथा} *************सन्तोष कुमार "प्यासा"

कल ही एक मित्र मेरे पास आए और बोले "शहर में एक बड़े ही पहुंचे हुए पंडित जी आएं है ! वे बड़े ही ज्ञानवान समाजसेवी और नेक ह्रदय के व्यक्ति हैं ! १५ दिन से शहर में उनका सत्संग चल रहा है !" तो मै क्या करूँ जी वैसे भी आपको ज्ञेय हैं की मुझे सत्संग वत्संग में
 
संतोष कुमार "प्यासा"
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दाग अच्छे हैं(लघुकथा)-------------------------------->>>दीपक 'मशाल'

''निकल बाहर यहाँ से... बदतमीज़ कहीं का..'' बरसाती गंदे पानी से सनी चप्पलें पहिनें कल्लू को अपने घर में अन्दर घुसते देख शोभा आंटी ने अचानक काली रूप धारण कर लिया और उसकी कनपटी पर एक तमाचा जमाते हुए उसे घर से बाहर निकाल दिया.''रमाबाई तुमसे कितनी
 
दीपक 'मशाल'
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मेरी तौबा (लघुकथा )

"कुछ सोच रही हो " मैंने उसका हाँथ हौले से दबाकर पूछा "नहीं तो " नेहा के चेहरे पर शरारत की लहर दौड़ गई अब वो आसानी से बताएगी नहीं ,जब तक मैं उससे ८ -१० बार पूछ नहीं लूँगा .चार सालों से जानते है एक दुसरे को ऑफिस में मिले,दोस्त बने फिर एहसास हुआ हम अपना
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सरकार (लघुकथा)

-गंगा सहाय मीणा मैं 14-15 साल का हो गया था लेकिन मैंने कभी सरकार को नहीं देखा. मैं किताबों-अखबारों में पढकर और लोगों से सुन-सुनकर तंग आ गया था कि सरकार ये कर रही है, वो कर रही है, सरकार ने ये कहा, वो कहा. आखिर सरकार है कौन, कैसी दिखती है? बोतल से निकले
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बरसाती (लघुकथा)---------------------------------->>>दीपक 'मशाल'

५-६ रेनकोट देखने के बाद भी उसे कोई पसंद नहीं आ रहा था. दुकानदार ने साहब को एक आखिरी डिजाइन दिखाने के लिए नौकर से कहा.. 'पता नहीं ये आखिरी डिजाइन कैसा होगा? इन छोटे कस्बों में यही तो समस्या है कि जरूरत की कोई चीज आसानी से मिलती नहीं.' वो हीरो
 
दीपक 'मशाल'
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बोनट(लघुकथा)----------------------------->>> दीपक 'मशाल'

रोज की तरह कॉलेज जाने के लिए जब उसने अपनी सहेलियों के साथ पास के शहर जाने वाली पहली बस पकड़ी तो बस में क़दम रखने पर कुछ भी नया नहीं मिला.. सामने वाली सीट पर वही बैंक बाबू अपनी अटैची लिए बैठे थे, उनके साथ रस्ते के गाँव में उतरने वाले वो प्राइमरी
 
दीपक 'मशाल'
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बच्चों का कठपुतली-खेल

गर्मी की छुट्टी शुरु हो गयी थी.स्कुल के बच्चे जो होस्टल में रहते थे, खाली समय में कुछ करना चाहते थे.सबने मिलकर सोचा कि कठपुतली खेल खेला जाये ..बच्चों ने प्रांगण को घेर कर एक रंगमंच बनाया और दर्शकों के लिये दर्शक-दीर्घा बनाया गया. फ़िर सभी ने लकङियों के कई
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चालू

लघुकथाचालूउन्होंने जाल फेंका।शिकार किसी तरह बच निकला।यूं समझिए कि ख़ाकसार किसी तरह बच निकला।भन्ना गए। सर पर दोहत्थड़ मारकर बोले, ‘‘तुम तो कहते थे भोला है। देखो तो सही साला कितना चालू आदमी है।’’ -संजय ग्रोवर
 
संजय ग्रोवर Sanjay Grover
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तलब (लघुकथा)------------------------------->>> दीपक 'मशाल'

आँख खुलते ही सुबह-सुबह मुकेश को अपने घर के सामने से थोड़ा बाजू में लोगों का मजमा जुड़ा दिखा. भीड़ में अपनी जानपहिचान के किसी आदमी को  देख उसने अपने कमरे की खिड़की से ही आवाज़ देते
 
दीपक 'मशाल'
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वतन के रखवाले (लघुकथा)------------------------------->>>दीपक 'मशाल'

''आप कैसे ये जनरल बोगी खाली करा सकते हैं जबकि इसके बाहर 'सैनिकों के लिए आरक्षित' या ऐसा कुछ भी नहीं लिखा?'' उन १०-१२ सैनिकों के कहने पर चुपचाप उस सामान्य बोगी से उतरते लोगों में से उस पढ़े-लिखे से
 
दीपक 'मशाल'
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जरिया(लघुकथा)----------------->>>दीपक 'मशाल'

 ''अंकल मैं उस कॉमिक्स का दो दिन का किराया नहीं दे पाऊंगा.'' कॉमिक्स को एक दिन ज्यादा रखने का किराया देने में असमर्थता ज़ाहिर  करते हुए बल्लू ने दुकानदार से कहा. लेकिन उसके चेहरे पर कोई
 
दीपक 'मशाल'
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जख्म

"लो पहले इससे अपना बदन ढक लो" कहते हुए ठाकुर ने उसके फ़टे हुए कपङे से निकल आये अंगों पर एक तौलिया डाल दिया.फ़िर उसके एक गाल पर अपना हाथ रखकर अपनी ऊंगलियों से उसके आंसू पोछते हुए कहा-"जानवर था वह जो इतनी प्यारी कोमल बच्ची के साथ बलात्कार किया,
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आयरनमैन(लघुकथा)------------------>>>दीपक 'मशाल',

'तड़ाक... तड़ाक... तड़ाक...' तीन-चार तमाचों की तेज़ आवाज़ और गालियों के साथ किसी के गर्जन को सुन बरात के बीच से नन्हे  मुग्ध  का  ध्यान  अचानक  डांस से हटकर उस ओर चला गया. अपने दोनों गालों और
 
दीपक 'मशाल'
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''लोग क्या कहेंगे?''(लघुकथा)-------------->>>दीपक 'मशाल'

'अ' एक लड़की थी और 'ब' एक लड़का. बचपन से ही दोनों के बीच एक स्वाभाविक आकर्षण था, जिसे बढ़ती उम्र और मेलजोल ने प्रेम के रूप में निखार दिया. दोनों साथ में पढ़ते, घूमते-फिरते, कॉलेज जाते और कला-संगीत के कार्यक्रमों में रुचियाँ लेते. एक दूसरे की रुचियों
 
दीपक 'मशाल'
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भीतर का सच

अशोक भाटियाबच्ची सो चुकी थी । वह खाना खाकर खाली था। उसने काम के हिस्से के तौर पर, ब्रश किया, टी.वी. ऑन किया और बैड पर पसर गया । उधर रमा सुबह के लिए दही जमाने, सब्जी बनाने और कपड़े तहाने के बीच , ताबड तोड घुम रही थी । वह खाली हुई तो पति ने बाहरी दरवाजे बंद
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नन्दलाल भारती का लघुकथा संग्रह एहसास - पीडीएफ़ ईबुक में मुफ़्त डाउनलोड कर पढ़ें

नन्दलाल भारती का लघुकथा संग्रह रचनाकार पर पढ़ें स्क्रिब्ड ईपेपर पर यहीँ या मुफ़्त में डाउनलोड कर या प्रिंट कर पढ़ें. डाउनलोड हेतु नीचे दिए गए डाउनलोड कड़ी का प्रयोग करें. बड़े आकार में पढ़ने के लिए फुलस्क्रीन कड़ी पर क्लिक करें. Ehsaas Short Stories Book
 
Raviratlami
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शुभ अशुभ और कथनी करनी - पवित्रा अग्रवाल रचित दो लघुकथाएं

एक "मां अपने घर इतनी सारी आंटी क्यों आई थीं....इनके घर में शादी है क्या ?" --पॉँच छह वर्षीय पुत्र ने पूछा "नहीं बेटा शादी नहीं है .इनके दादा जी की तेरहवीं है ,उसका न्योता देने आई थीं ." "तेरहवीं क्या होता है मां ?" "जब कोई मर जाता है तो उसके मरने के
 
अविनाश वाचस्पति
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सालगिरह का तोहफ़ा

मालिक के बेटे की सातवीं सालगिरह मनायी जा रही थी।सैकङों लोग मालिक के लिये उनके घर के ही सदस्य थे.घर के सभी लोगों को तोहफ़े बांटे गये.एक उजला टी-शर्ट घर मे रह रहे सभी लोगों को दिया गया....लेकिन वितरण का कार्य चमचागिरि करनेवाले कर्मचारियों को सौंपा
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मगरमच्छ

मगरमच्छ एक बडे-से गड्डे में, गंदे-से पानी में पड़ा रहता था। कुछ नहीं मिलता था उसे खाने को। जंगल में छाड.-छंखाडों और कंकरीले मैदानों के बीच गड्डे के बदबूदार पानी पर जमी थी काई। काई – मिट्टी, मेंडक और छोटे-मोटे कीडों से नहीं बुझती थी मगर की भूख। पक्षी उसके
 
प्रीतीश बारहठ
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सुरेन्द्र सुकुमार की लघुकथा – धर्म का सदुपयोग

ट्रेन में सफर कर रही एक मुस्लिम महिला का दो वर्ष का बच्चा बहुत परेशान कर रहा था. मां का दूध पीने की जिद कर रहा था. मां बार-बार शीशी का दूध मुंह से लगाती. पर बच्चा शीशी से मुंह नहीं लगाता. महिला झुंझला कर कभी बच्चे को मारती, फटकारती, डराती. धमकाती कभी
 
Raviratlami
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लधुकथा - नकली मुठभेड़

डी.आई.जी. सुधांशु अपने कक्ष में आज अकेले बैठे हैं। तभी डी.वाय.एस.पी. शर्मा ने उनके कमरे में प्रवेश किया। शर्माजी आज बहुत खुश थे। उनकी प्रसन्नता छिपाए नहीं छिप रही थी। वे उत्साह में भरकर डी.आई.जी को बता रहे थे कि सर! आज हमें बहुत बड़ी सफलता हाथ लगी है।
 
Dr. Smt. ajit gupta
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आपके जैसा ही कुछ हमारे माँ-बाप भी हमारे बारे में समझते हैं(लघुकथा)------>>>दीपक 'मशाल'

आप से निवेदन है कि कृपया सुझाव दें कि ये लघुकथा पूरी रखें या जहाँ पर £ लिखा हुआ है वहाँ से ऊपर तक का भाग हटा दें.. आपके मार्गदर्शन के लिए आभारी रहूँगा.  यूनिवर्सिटी ने जब से कई नए कोर्स शुरू किये हैं, तब से नए
 
दीपक 'मशाल'
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अपराधी को सजा हुई और सारा परिवार ही भूख की चपेट में आ गया

कानून और इंसाफ की हम सभी प्रतिदिन दुहाई देते हैं। लेकिन जिसे न्‍याय करना है उसके सामने कई बाद चुनौतियां खड़ी हो जाती हैं। एक तरफ कानून कहता है कि अपराधी को सजा दो, तो दूसरी तरफ उसकी सजा सारे परिवार की सजा बन जाती है। कई बार हम समाचार पत्रों में पढ़ते हैं
 
Dr. Smt. ajit gupta
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लघुकथा------------------------>>>दीपक 'मशाल'

पूजा के लिए सुबह मुँहअँधेरे उठ गया था वो, धरती पर पाँव रखने से पहले दोनों हाथों की हथेलियों के दर्शन कर प्रातःस्मरण मंत्र गाया 'कराग्रे बसते लक्ष्मी.. कर मध्ये सरस्वती, कर मूले तु.....'. पिछली रात देर से काम से घर लौटे पड़ोसी को बेवजह जगा दिया अनजाने
 
दीपक 'मशाल'
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संजय भारद्वाज की लघुकथा – बस इसलिए!

"पकड़ो-पकड़ो, चोर....।' सभास्थल पर फूल मालायें टांगनेवाला जोर से चिल्लाया। भीड़ आवाज की दिशा में मुड़ी .... फूलों का हार लेकर भागते दस-बारह वर्ष के मरियल से लड़के को धर लिया गया। अधिकांश ने उस पर हाथ साफ करना शुरू कर दिया था। अब तक भागता-हांफता फूलवाला
 
Raviratlami
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हमारे लेखन का भविष्‍य?

हम रोज ही कितना कुछ लिखते हैं। अपने लिखे को लेकर झगड़ा भी करते हैं। कभी कोई हमारे साहित्‍य की चोरी कर लेता है तो हम उसे धमकाते भी हैं। कभी कोई कागज उड़कर इधर-उधर हो जाता है तो कितना नाराज होते हैं अपने घर वालों पर? एक-एक शब्‍द को सहेज कर रखते हैं। अपनी
 
Dr. Smt. ajit gupta
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रवि भारद्वाज की लघुकथा : शिवरात्रि

उसने अपने फूल पत्‍तों, बेल पत्‍ती, रोली की डिबिया, अक्षत को बड़े सलीके से एक बड़े टोकरे में सजाया और शिव मन्‍दिर के नीचे बहने वाली नदी के बिल्‍कुल किनारे बैठ गया, उसने इस बात का विशेष ध्‍यान रखा कि सब की नजर उस पर पड़े तथा उसकी नजर भी सब शिव भक्‍तों पर
 
Raviratlami
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नन्‍दलाल भारती की चार लघुकथाएँ

- आवारा धनजू नन्‍हा था तब उसकी हर गलतियां माफ कर दी जाती थी। कभी कभी उसकी जिद पर पापा शराब की एक बूंदों गिलास भर पानी में डालकर दे देते। बेटे की जीभ की चटपट से पापा भी हंस पड़ते, मम्‍मी भी बाप बेटे की हंसी में बराबर की सरीखी बन जाती थी। यहीं हंसी
 
Raviratlami
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कभी कुटिल व्‍यक्ति भी आपको सफलता दिला देते हैं

कभी आप किसी महत्‍वपूर्ण पद पर कार्यरत हैं और आप अपने कार्य द्वारा मंजिल प्राप्‍त करना चाहते हैं। लेकिन देखते हैं कि कोई एक व्‍यक्ति आपके पीछे पड़ जाता है। सारी कुटिलता लिए वह आपके हर अच्‍छे फैसलों को भी बेकार सिद्ध करने पर उतारू हो जाता है। अधिकतर ऐसा
 
Dr. Smt. ajit gupta