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लघु कहानी: ये तो सड़े हुए थे....!

(लेखक दोस्त कबीर कृष्ण की कलम से दुसरी कहानी आप सब के लिए।)पिछली गर्मी की छुटियों में मैं घर जा रहा था।अगले दिन की सुबह जब नींद खुली तो मेरी ट्रेन इलाहाबाद स्टेशन पर रुकी हुई थी।मैं उत्सुकतावश खिड़की से बाहर देखने लगा।तभी प्लेटफार्म की भीड़ से कोई दस