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भारत से सुभाष नीरव की दो लघु कथाएं

लेखक परिचय हिंदी कथाकार/कवि सुभाष नीरव लगभग पिछले 35 वर्षों से कहानी, लघुकथा, कविता और अनुवाद विधा में सक्रिय हैं। अब तक तीन कहानी-संग्रह ”दैत्य तथा अन्य कहानियाँ (1990)”, ”औरत होने का गुनाह (2003)” और ”आखिरी पड़ाव का
 
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यू.के. से प्राण शर्मा की दो लघुकथाएं

‘राज़ ‘ - प्राण शर्मा धर्मपाल ने टेलिफ़ोन का चोगा उठाकर सतपाल का फ़ोन नंबर मिलाया.फ़ोन की लाइन अंगेज थी.” पता नहीं कि लोग फोन पर क्या- क्या बातें करते हैं? घंटों ही लगा देते हैं.किसी और को बातकरने का मौक़ा ही नहीं देते हैं.” खीझ कर
 
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कनाडा से विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय “उड़नतश्तरी” हिंदी ब्लॉग के समीर लाल “समीर” की दो लघुकथाएं

समीर लाल का जन्म २९ जुलाई, १९६३ को रतलाम म.प्र. में हुआ. विश्व विद्यालय तक की शिक्षा जबलपुर म.प्र से प्राप्त कर आप ४ साल बम्बई में रहे और चार्टड एकाउन्टेन्ट बन कर पुनः जबलपुर में १९९९ तक प्रेक्टिस की. सन १९९९ में आप कनाडा आ गये और अब वहीं टोरंटो नामक शहर
 
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अशोक जमनानी की लघु कथा: पेटदर्द

Share                 मंत्री जी के पेट में रह-रह कर दर्द उठता। दिन पर दिन बीतते जा रहे थे लेकिन दवा और दुआ दोनों ही बेअसर सिद्ध हो रहीं थीं।अच्छे से अच्छा इलाज़ चल रहा था;
 
माणिक
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आयरलैंड (यू.के.) से दीपक चौरासिया “मशाल” की दो लघुकथाएं

दीपक चौरसिया ‘मशाल’ २४ सितम्बर सन् १९८० को उत्तर प्रदेश के उरई जिले में जन्मे दीपक चौरसिया ‘मशाल’ की प्रारंभिक शिक्षा उत्तर प्रदेश के ही कोंच नामक स्थान पर हुई. बाद में आपने जैव-प्रौद्योगिकी में परास्नातक तक शिक्षा अध्ययन किया और
 
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भारत से डॉ. मधु संधु की दो लघुकथाएं

डॉ. मधु संधु शिक्षा : एम. ए. पी.एच. डी.(हिंदी) पी.एच.डी. का विषय : सप्तम दशक की हिन्दी कहानी में महिलाओं का योगदान सम्प्रति :गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में प्रोफ़ेसर एवं विश्विद्यालय अनुदान की बृहद शुद्ध परियोजना की प्रिंसिपल
 
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यू.के. से फ़हीम अख़्तर की लघुकथा – लाल कुर्सी

लाल कुर्सी फ़हीम अख़्तर लन्दन, यू.के. जूली और उसके शौहर दोनों मार्केट में घूम रहे थे कि अचानक जूली कि नज़र उस कुर्सी पर पड़ी जो बेहद बड़ी और लाल कपड़ों में पूरी तरह ढकी हुई थी. जूली के आग्रह पर उसका शौहर उस कुर्सी को ख़रीदने को तैयार हो गया. अब जूली का
 
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यू.के. से डॉ. गौतम सचदेव की लघुकथा

दान और दानी डॉ. गौतम सचदेव सेठ धनीराम अपनी माता जी की पहली बरसी के उपलक्ष्य में ग़रीबों में कम्बल बाँट रहे थे । ख़बर सुनते ही उनके घर के बाहर सैकड़ों की भीड़ जमा हो गई । सेठ जी ने सबसे लाइन बनाने को कहा, लेकिन कोई इसके लिये तैयार नहीं हुआ । जब [...]
 
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भारत से सुकेश साहनी की दो लघुकथाएं

प्रतिमाएं -सुकेश साहनी उनका काफिला जैसे ही बाढ़ग्रस्त क्षेत्र के नज़दीक पहुँचा, भीड़ ने घेर लिया। उन नग-धड़ंग अस्थिपंजर-से लोगों के चेहरे गुस्से से तमतमा रहे थे। भीड़ का नेत्तृव कर रहा युवक मुट्ठियाँ हवा में लहराते हुए चीख रहा था, “मुख्यमंत्री—मुर्दाबाद
 
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यू.के. से प्राण शर्मा की दो लघुकथाएं

मेहमान -प्राण शर्मा घर में आये मेहमान से मनु ने आतिथ्य धर्म निभाते हुए पूछा-” क्या पीयेंगे,ठंडा या गर्म?” ” नहीं, कुछ भी नहीं.” मेहमान ने अपनी मोटी गर्दन हिला कर कहा. ” कुछ तो चलेगा?” ” कहा न, कुछ भी
 
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यू.के. से महेंद्र दवेसर “दीपक” की लघुकथा – ‘त्रिशूल’

महेन्द्र दवेसर “दीपक जन्म: नई देहली¸14 दिसम्बर 1929 शिक्षा तथा संक्षिप्त जीवन चित्रण: 1947 में विभाजन के समय डी. ए. वी. कॉलेज, लाहौर में F.Sc (Final) के विद्यार्थी। प्रभाकर (पंजाब विश्वविद्यालय, 1950)। पंजाब युनीवर्सिटी कैम्प कॉलेज, नई देहली में एम. ए. –
 
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भारत से आचार्य संजीव ‘सलिल’ की दो लघुकथाएं

गाँधी और गाँधीवाद आचार्य संजीव ‘सलिल’ बापू आम आदमी के प्रतिनिधि थे. जब तक हर भारतीय को कपड़ा न मिले, तब तक कपड़े न पहनने का संकल्प उनकी महानता का जीवत उदाहरण है. वे हमारे प्रेरणास्रोत हैं’ -नेताजी भाषण फटकारकर मंच से उतरकर अपनी मंहगी आयातित कार में
 
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भारत से रामेश्वर कम्बोज ‘हिमांशु’ की दो लघुकथाएं

ऊँचाई रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ पिताजी के अचानक आ धमकने से पत्नी तमतमा उठी, “लगता है बूढ़े को पैसों की ज़रूरत आ पड़ी है, वर्ना यहाँ कौन आने वाला था। अपने पेट का गड्‌ढा भरता नहीं, घर वालों का कुआँ कहाँ से भरोगे?” मैं नज़रें बचाकर दूसरी ओर देखने
 
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यू.के.(बेलफास्ट, आयरलैंड) से दीपक ‘मशाल’ की लघु कथा

“मुझे नहीं होना बड़ा” दीपक ‘मशाल’ आज फिर सुबह-सुबह से शर्मा जी के घर से आता शोर सुनाई दे रहा था. मालूम पड़ा किसी बात को लेकर उनकी अपने छोटे भाई से फिर कलह हो गयी.. बातों ही बातों में बात बहुत बढ़ने लगी और जब हाथापाई की नौबत आ
 
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भारत से सुधा अरोड़ा की दो लघुकथाएं

परिचय : सुधा अरोड़ा जन्म : अविभाजित लाहौर (अब पकिस्तान) में ४ अक्टूबर १९४६ को हुआ. शिक्षा : १९६५ में श्री शिक्षायतन से बी.ए. ऑनर्स और कलकत्ता विश्वविद्याय से एम.ए. (हिंदी साहित्य). कार्यक्षेत्र : १६५-१९६७ तक कलकत्ता विश्वविद्यालय की पत्रिका
 
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भारत से सुकेश साहनी की दो लघुकथाएं

सुकेश साहनी जन्म : 5 सितम्बर, 1956(लखनऊ) शिक्षा : एम.एस-सी. (जियोलॉजी), डीआईआईटी (एप्लाइड हाइड्रोलॉजी) मुम्बई से। कृतियां : डरे हुए लोग, ठण्डी रजाई (लघुकथा-संग्रह), मैग्मा और अन्य कहानियां, (कहानी-संग्रह), अक्ल बड़ी या भैंस (बालकथा-संग्रह), लघुकथा संग्रह
 
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भारत से रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ की दो लघुकथाएँ

रामेश्वर काम्बोज हिमांशु जन्म : 19 मार्च,1949 शिक्षा : एम ए-हिन्दी (मेरठ विश्वविद्यालय से प्रथम श्रेणी में) ,बी एड प्रकाशित रचनाएँ : ‘माटी, पानी और हवा’, ‘अंजुरी भर आसीस’, ‘कुकडूँ कूँ’, ‘हुआ सवेरा’ (कविता
 
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प्राण शर्मा की दो लघुकथाएं

वसंत पंचमी के शुभ अवसर पर आप सब को शुभकामनाएं अखबार - प्राण शर्मा भरत उच्च शिक्षा के लिए यू.के. में आया था .पंजाब यूनीवर्सिटी से उसने अंग्रेज़ी में एम.ए. कर रखी थी. यूँ तो वो पढ़ा-लिखा था लेकिन यहाँ के रीती-रिवाजों से अनजान था. उसके आने के कुछ दिनों के
 
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यू. के. से प्राण शर्मा की दो लघुकथाएं

ये इंग्लॅण्ड है,माई ब्रोदर –प्राण शर्मा गोपीनाथ से लन्दन जाने वाली कोच छूट गयी थी. एक अन्य कोच ड्राईवर ने बड़ी शिष्टता से उसको अगली कोच का समय बताया. गोपीनाथ को लगा कि उसने उस ड्राईवर को पहले भी कहीं देखा था. उसने भेजे पर जोर दिया.याद आते ही उसने
 
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अमेरिका से देवी नागरानी की दो लघुकथाएं

देवी नागरानी न्यू जर्सी, यू.एस.ए. रिश्ता अमर अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उच्च शिक्षा के लिए अमरिका जाकर पढने की इच्छा प्रकट की साथ में वादे भी किया कि वह पढ़ाई पूरी करते ही वापस आकर दोनों की देखभाल भी करेगा। दोनों बहुत खुश हुए । उन्होंने तमाम उम्र
 
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तेजेंद्र शर्मा की पुस्तक ‘सीधी रेखा की परतें’ का लोकार्पण और आचार्य संजीव ‘सलिल’ की लघु कथा

भोपाल में तेजेन्द्र शर्मा का रचना पाठ एवं पुस्तक लोकार्पण : उर्मिला शिरीष (भोपाल) – संस्कृति, साहित्य तथा ललित कलाओं के लिए समर्पित संस्था स्पंदन भोपाल द्वारा दिनांक २६ नवंबर ०९ को स्वराज भवन, भोपाल में लंदन के प्रतिष्ठित कथाकार तेजेन्द्र शर्मा
 
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आचार्य संजीव ‘सलिल’ की दो लघुकथाएं

लघुकथा एकलव्य ‘नानाजी! एकलव्य महान धनुर्धर था?’ - ‘हाँ; इसमें कोई संदेह नहीं है.’ - ‘उसने व्यर्थ ही भोंकते कुत्तों का मुंह तीरों से बंद कर दिया था ?’ -’हाँ बेटा.’ - ‘दूरदर्शन और सभाओं में नेताओं औ
 
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देवी नागरानी की दो लघुकथाएं

देवी नागरानी लघुकथा असली शिकारी देवी नागरानी हमारे पड़ोसी श्री बसंत जी अपनी तेरह महीने के नाती को स्ट्रोलर में लेकर घर से बाहर आए और मुझे सामने हरियाली के आस पास टहलते देखकर कहाः “”नमस्कार बहन जी” “नमस्कार भाई साहब. आज नन्हें
 
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प्राण शर्मा की दो लघुकथाएं

अधजल गगरी छलकत जाए - प्राण शर्मा तीन बार दसवीं में फ़ेल कमाल जी की बातें सुनते रहिये और बोर होते रहिये. दोस्तों से मिलते ही वे शुरू हो जाते हैं- “मेरे चाचा जी एम .ए. और पी.एच .डी थे. सरकारी विभाग में सीनिअर ऐडवाईज़र थे. पांच हजार रूपये उनकी मंथल
 
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प्राण शर्मा की दो लघुकथाएं

प्रेमिका -प्राण शर्मा अनुरागी और मधुरिमा के बीच इन्टरनेट पर रोज़ ही प्रेम-वार्तालाप होना शुरू हो गया. प्रेम-वार्तालाप में वे दोनो इतना खो जाते कि उन्हें खाने-पीने की कोई सुध नहीं रहती. मधुरिमा प्यारी-प्यारी और मधुए-मधुर बातें करती. इश्क के रटे हुए शे
 
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प्राण शर्मा और देवी नागरानी की लघुकथाएं

लघुकथा- खट्टे संतरे प्राण शर्मा रमेश बड़े शौक़ से खाने के लिए साफ़ सुथरे और चमचम करते संतरे सुबह सब्जी मंडीसे खरीद कर लाया था. उसकी आदत है रात को रोटी खाने के बाद दो-तीन संतरे लेने की. रोटी खाने के बाद दो-तीन संतरे लेने से सुबह खुलकर पखाना आता है, ऎसी उ
 
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लघु कथा : दौड़

मैं अपने बेटे को निहार रही थी. वह मेरे सामने लेटा अपने पाँव केअँगूठे को मुँह में डालना चाह रहा था. और मैं उसके नन्हे-नन्हे हाथोंसे पाँव का अँगूठा छुड़वाने की कोशिश कर रही थी. उस कोशिश मेंवह मेरी उँगली को भी मुँह में डालना चाहता था. चेहरे पर चंचलता,आँखों
 
Shabdsudha
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अधूरा कर्तव्य

दिन चढ़ आया था, चिड़ियॉँ आ-आकर आंगन में फुदकने लगीं थी, कोई ओखली पर बैठी, कोई तुलसी के चौतरे पर, अभी तक तो दादी गंगा स्नान करके आ जाती थी पर आज क्या हो गया| मेरी आयु चार-पाँच वर्ष की रही होगी, तब घड़ी देखना और समय का ज्ञान न था फिर भी बालपन मे [...]
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भारतीय नारी (राजस्थान साहित्य अकादमी की मधुमती पत्रिका मई 2009 में प्रकाशित)

एक सब्ज़ीवाली नित दोपहर मालती के घर की कालबैल बजाती। ‘‘बीवीजी! कुछ सब्ज़ी लेंगीं ?’’मालती-‘‘नहीं! अभी नहीं चाहिए।’’सब्ज़ीवाली-‘‘कुछ तो ले लो, हम दो कोस चलकर यहां आतीं हैं सब्ज़ी बेचने के वास्ते। अच्छा न लेयो तो पानी ही पिलाय देओ।’’मालती पानी देते
 
रचना गौड़ ’भारती’
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अपने -पराये

नदी में डूबते हुए एक युवक को मल्लाहों ने खींच कर बाहर निकाल लिया । किनारे पर बैठा एक साधु यह देख रहा था । बाहर आकर युवक दुखी स्वर में बोला - ‘ आपने मुझे क्यों बचा लिया , जिनके साथ मैंने अच्छा किया था , उन्होने मेरे साथ बुरा किया । आपके साथ न मैंने अच
 
रचना गौड़ ’भारती’
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पानी और बुलबुला

आपको पता है प्रकृति बोलती है । ये चांद सितारे,हवा,पानी,फूल,पत्थर सभी आपस में बातें करते हैं । ऐसी बातें जिनकी न तो कोई भाषा होती है,और ना ही शब्द । हमें सुनायी देती है तो एक हल्की गूंज जिसे हम इनका शोर समझते है । यक़ीन नहीे होता तो सुनिये पानी और बुल
 
रचना गौड़ ’भारती’
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दिनचर्या

दिनचर्या चिड़ियों की चूँ-चूँ ने आभास कराया, भोर हो गयी है। भास्कर आँगन में आ गया है, अरे आज फिर देर हो गयी जैसे-तैसे स्नान करके तैयार हो जलपान ग्रहण किया और सड़क पर सरपट दौड़ लगायी, बस पकड़नें की। हाँफते-हाँफते जान गले में अटक गयी किसी तरह दफ्तर पहुंचा ।
 
SURINDER RATTI
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गुरूदीप खुराना की लघु कथा

गुरुदीप खुराना महत्वपूर्ण कथाकार हैं। दिखावे की किसी भी तरह की संस्कृति से उन्हें परहेज है। रचना में ही नहीं सामान्य जीवन में भी उनके मित्र उन्हें इसी तरह पाते हैं। उनकी रचनाओं की खास विशेषत है कि वे ऐसे ही जैसे कोई बहुत चुपके से , आपके बगल में आकर क
 
vijay gaur/विजय गौड़