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जारी है एक सफ़र मेरा तीरगी के साथ

जारी है एक सफ़र मेरा तीरगी के साथ जंग चल रही है मेरी रौशनी के साथ मुझे मालूम नहीं कि क्या सोच कर मै खुद भी रो दिया बेबसी के साथ ताज़ा हुए है जख्म मेरे फिक्र कीजियेजब से मिला वो मुझे बेरुखी के साथ पैमाने मै तुझको यू उदास देखकर मैकदे से घर गया तिशनगी के साथ
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दुश्मने-जां से भी मिलिए मुस्कुरा करके...

दुश्मने-जां से भी मिलिए मुस्कुरा करकेदेखिये सारे शिकवे-गिले को भुला करकेदुश्मने-जां से भी मिलिए मुस्कुरा करकेवफा के बदले अब नहीं मिलती वफा हमने तो देखा है ये भी तजुर्बा करकेखुशिया भी मिली तो अजनबी बनके जब से गया वो गम से आशना करके ख्यालो कि मंजिल कदम-२
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मेरी बेबसी देखिये

बना डाला खुदा उफ़ ये बंदगी देखियेअकीदते-बाज़ार मे खडा आदमी देखियेसमंदर भी लगने लगा है दरिया मुझेभड़की है एक कदर तिशनगी देखियेहर बार आईने मे शक्ल नयी सी दिखेकितने हिस्से मे बट गयी जिंदगी देखियेरो देते है तन्हाई मे खुद से बाते कर"मीत"गर मिले फ़ुर्सत तो मेरी
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रुलाकर मुझको वो भी तो रोया होगा

रुलाकर मुझको वो भी तो रोया होगा जगाकर मुझको वो भी न सोया होगा चलो उसे हमदर्दी की धूप मे सुखा ले जो तकिया उसने आसुवों से भिगोया होगा कवि: रोहित कुमार "मीत" जी की रचना रचना के बारे में अपनी मह्तबपूर्ण राय बताये ताकि अगली रचना और भी बहतर हो
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ये किसानो की है हकीक़त क्या बात

आदमी मे आदमीयत क्या बात हैहर-एक की नेक नीयत क्या बात हैसाकी ने शराब मे क्या शै मिला दीवाएज़ को भी दी नसीहत क्या बात हैबदमिजाज़ हुवा शहर नए दौर के नाम पेसंस्कृति की ये फजीहत क्या बात हैमाँ-बाप भगवान सामान यहाँ औरपत्थरों मे भी अकीदत क्या बात हैभूख खाते है