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छोट बड़ो सब सम बसैं, हो रैदास प्रसन्न

जात पात के फेर में, उरझत हैं सब लोग!मानवता को खात है, रैदास जात का रोग!! ..... जात पात में जात है, ज्यों केलन में पातरैदास न माणुस जुड़ सके, जब तक जात न जात!! ..... ऐसा चाहौं राज मैं, जहां मिलै सबै को अन्न!छोट बड़ो सब सम बसैं, हो रैदास
 
Ek ziddi dhun
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संतगुरु रविदास [हिन्दी साहित्य का इतिहास] - आलोक शंकर

ज्ञानाश्रयी शाखा में सन्त कबीर के बाद सन्त रविदास या रैदास का नाम उल्लेखनीय है| कबीर के गुरु रामानन्द जी के बारह शिष्य थे, उनमें से एक थे रैदास या रविदास (ये रामदास ,गुरु रविदास आदि नामों से भी प्रचलित थे)| इनका जन्म 1376 मे काशी में हुआ था| रैदास कब
 
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