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सुनिये विविध भारती में दुधवा लाइव की बातें!

दुधवालाइव डेस्क* शनिवार २२ मई २०१० की शाम सात पैतालिस व रविवार २३ मई २०१० की सुबह सवा नौ बजे, भारत की सार्वजनिक क्षेत्र के रेडियो चैनल आकाशवाणी के मशहूर कार्यक्रम विविध भारती में दुधवा लाइव ई-पत्रिका के एक लेख का जिक्र किया गया। यह लेख था  "विश्व
 
दुधवा लाइव
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पूर्वांचल विश्वविद्यालय पर रेडियो फीचर

ये उन दिनों की बाद है जब मैं पूर्वांचल विश्वविद्यालय से अपने शैक्षिक जीवन की शुरुवात कर रहा था चुनौती कड़ी थी सुविधा के नाम पर सिर्फ अधबने क्लास रूम हमें मिले थे जिनमे हमें देश के भावी पत्रकारों को तैयार करना था लाइट आती नहीं थी कंप्यूटर मिलते नहीं थे और
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चिकन कला पर एक रेडियो फीचर

बहुत पहले लखनऊ की चिकन कला पर एक रेडियो फीचर बनाया था सोचा आप के साथ बाँट लिया जाए सुनें और बताएंhttp://www.box.net/shared/7xer84h9nj
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दिल तो बच्चा है...

बसंत में यदि घोंघाबसंत भी संत जसा व्यवहार करें तो थोड़ा आश्चर्य जरूर होता है। घुरहू पुत्र निरहू के व्यवहार में आए इस बदलाव से सभी परेशान थे। हालांकि गांव के पंडित सुखनंदन ने उसे मकर संक्रांति पर अतिशीतल जल से नहला कर उसके पिता को यह विश्वास दिला दिया था
 
अभिनव उपाध्याय
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एफ एम रेडियो

आजकल प्राइवेट रेडियो चैनल्स के आ जाने से हमारे पास काफी सारे विकल्प हो गए हैं। जैसे बैंगलोर में आप रेडियो सिटी, रेडियो वन, रेडियो मिर्ची, रेडियो इंडिगो, एस एफ एम, फीवर, विविध भारती इत्यादि सुन सकते हैं। जितने भी प्राइवेट रेडियो स्टेशन हैं उन सब पर एक
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एफ एम रेडियो

एफ एम रेडियो के Filler कार्यक्रम बड़े ही मज़ेदार होते हैं। बैंगलोर में रेडियो सिटी पर मिस लैन्गोलिला, अंकल अप्पू कुट्टन, वासुदेव, बब्बर शेर और रेडियो वन पर फोकट मामू। इन सबमें आपको ज़मीन की खुशबूं आएगी। कॉमेडी है इसमें कोई दो राय नही पर जिनके दिमाग से
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मादक शनिवार

मित्रों इस बार वर्जीनिया टेक के भारतीय कार्यक्रमों में हिंदी सिनेमा के कुछ बेहतरीन मादक और मदहोश करने वाले गाने सुनाऊंगा। आशा है कि आपको ये गाने प्रसन्न करेंगे। ज्यादा जानकारी के लिए देखें । कार्यक्रम प्रसारित होगा शनिवार को पूर्वी अमेरिकी समय से दोप
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पी टी एस डी: पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसॉर्डर

पी टी एस डी यानी "पोस्ट ट्रोमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर।" हो सकता है कि आपमें से कईयों ने यह शब्द या परिभाषा पहली बार सुनी हो। इसका सीधा सा अर्थ है, किसी ट्रॉमा यानी किसी दर्दनाक हादसे के बाद होने वाला मानसिक दबाव या असंतुलन। वर्जीनिया टेक में हाल में हुई
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मातृभाषा-छत्तीसगढ़ी में भी समाचार प्रसारण होगा !

सबसे पहले युनिवार्ता को बधाई । बधाई इसलिए कि उसने हम छत्तीसगढ़ीभाषी 2 करोड़ों लोगों तक यह समाचार सबसे पहले पहुँचाया । बधाई इसलिए कि यह शुष्क समाचार नहीं । इसमें हमारी मुरझाती हुई अस्मिता को रससिक्त करने वाला जल भी है । राज्य बनने के बाद से छत्तीसगढ़ी
 
जयप्रकाश मानस
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पश्चिम में अब रेडियो अधिक रेडियो कल भी था, कल भी रहेगा -अंबरीन हसनात

रेडियो सलाम नमस्ते की वाइस प्रेसिडेंट से बातचीत (सहयोग- आदित्य प्रकाश सिंह) 1. अमेरिका जैसे पश्चिमी माहौल वाले देश में हिंदी रेडियो (रेडियो सलाम नमस्ते)लांच करने के पीछे आपकी सोच क्या थी ? इसके मूल में व्यावसायिकता थी या हिंदी का विस्तार या वैश्विक अ
 
जयप्रकाश मानस
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रेडियो डॉयचे वेले हिंदी सेवा के 45 साल : पत्रकारों के अनुभव की कहानी, उनकी ही जुबानी

हमारे गांवों में बिजली की चमक कभी-कभी ही कौंधती है। इसलिए प्रसारण माध्‍यमों में ग्रामीणों की आज भी सबसे अधिक निर्भरता रेडियो पर ही है। हिन्‍दी में खबरों के लिए रेडियो पर बीबीसी की तरह सुपरिचित नाम रेडियो डॉयचे वेले का भी है। इस 15 अगस्‍त को उसकी हिंदी
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बी.बी.सी हिन्दी रेडियो और मै, पार्ट-२

मेरे और बीबीसी हिन्दी के बीच का रिश्ता, ख़बर की समझ को पा कर और मजबूत होता चला गया। अब अपने लिए एक रेडियो सेट की जुगार मे लग गया ताकि बीबीसी के तीनो प्रोग्राम सुन सकूं। लेकिन पापा को रेडियो खरीदने के लिए तैयार करना उतना ही मुश्किल था जितना मेरे लिए ए
 
विकास
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जब रामू काका है तो मेहनत क्यों?

कुछ दिन पहले एक विज्ञापन में किसी को यह कहते सुना : "जब रामू काका है तो मेहनत क्यों? जब सॉरी है तो ..."। मेरे दिमाग में यह बात आई कि इस विज्ञापन के आधार पर हर उस व्यक्ति को मेहनत नहीं करनी चाहिए जिसके घर में कोई 'रामू काका' है। ऐसे विज्ञापनों से समाज
 
सुयश सुप्रभ
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अमिताभ बच्चन, प्रियंका गाँधी जैसे शौकिया रेडियो ऑपरेटर (HAM) आख़िर करते क्या हैं!?

रेडियोनामा से जुड़ते हुए जब युनुस जी से मैंने आशंका जाहिर की थी कि नियमित नहीं रह पाऊँगा, किसी विषय विशेष पर लिखते हुए! तो उन्होंने सहजता पूर्वक जवाब दिया कि अपने समय और सुविधा के मुताबिक लिखिएगा। हैम रेडियो पर पहली पोस्ट 'शौकिया रेडियो ऑपरेटर को HAM
 
बी एस पाबला
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पतझड़ की हवाएँ !

लंदन में पतझड़ की हवाएँ चलने लगी हैं. चिनार के पेड़ों पर पत्ते अभी तक तो हरे हैं लेकिन अब उनके पीले पड़ने और टूट टूट कर गिरने की शुरुआत हो चुकी है. अमरीकी पूँजीवाद संकट से घिरा है. सट्टेबाज़ी से खरबपति हो गए या होने का स्वप्न देखने वाले लोग परेशान है
 
Rajesh Joshi