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सब ख्याल हैं बस.. इश्क और मौत से पहले के..-------- शायर मनीष

क्या तेरा क्या मेरा..क्या पाना क्या खोना..,सब ख्याल हैं बस.. इश्क और मौत से पहले के..!!उन्हें "अपना" बनाने की जिद ही उन्हें "पराया" कर गयी शायद...," इश्क " का जज्बा तो बेहतरीन था,ये " दावेदारी " ही नाकाम कर गयी शायद..!!करते रहे हम इंतज़ार बा-वक्ते दफ़न
 
यशवन्त मेहता "फ़कीरा"
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पढ़िए रूहानी शायर "मनीष" को , रूह को न छु जाये तो कहियेगा.....

......मनीष साहब जो लिखते हैं रूह से लिखते हैं ...... रूह से पढ़िए.......रूह तक पहुचेगी आवाज......  चंद अशियार, शायद बेकार.. पर क्या करूँ यार..., कह-सुन लेता हूँ खुद से ही की शायद..
 
यशवन्त मेहता "फ़कीरा"