मेरी प्रेम कहानी
आज वही बस स्टॉप था, जिसके इस पार हम और उस पार वो खड़ी थीहम भी नज़रें झुकाए खड़े थे और वो भी कुछ शरमाई लग रही थीमेरी सोच एक उलझान में पड़ी थी,बोल ही दूंगा दिल की हर बात आजये हिम्मत काफी देर से दिल के साथ झगड़ रही थीइतने में देखा एक आंटी जी ,हमारे सामने आ
Apr 29 2010 10:24 PM



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