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यूँ चले जाना किसी का..........

ध्यान में अपने निरन्तरमार्ग पर चलते हुए हीबीती कुछ सुनसान रस्तेकी अन्धेरी रात राहीकट गई कुछ राह तेरेसाथ करते बात राही........
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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