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बदमाश कंपनी

फिल्म समीक्षादेखी जा सकती है ‘बदमाश कंपनी‘ धीरेन्द्र अस्थानाकहानी, संवाद, पटकथा, निर्देशन सब कुछ एक अच्छे एक्टर परमीत सेठी का है। निर्माता हैं यशराज बैनर यानी यश चोपड़ा-आदित्य चोपड़ा। फिल्म है ‘बदमाश कंपनी‘ जिसे सन् 1994 के समय में फिल्माया गया है। चार
 
dhirendra asthana
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खाद्यान्न भंडारण का वही पुराना राग

खाघ संकट के लिए आमतौर पर कृषि उपज में कमी को जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है। पर देश के किसानों ने इस बार दो फसलों आलू और गेहूं का पर्याप्त उत्पादन किया है। सबसे बड़ी विडम्बना यह है कि किसानों की अथक मेहतन से तैयार फसल के सुरक्षित भंडारण की समुचित व्यवस्था
 
Hemant Pandey
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दूसरा विवाह

कम दगाबाज नहीं साहित्यकार भीधीरेन्द्र अस्थाना‘यह क्या/मैंने घर बसाया/और बेघर हो गया/घर में क्यों नहीं रह पाता प्रेम?‘ इन पंक्तियों के भीतर घर बसाने, घर बिखर जाने और फिर से घर बसाने की मुख्य चाहत छिपी है। जिंदगी बिताने के लिए एक मनपसंद जीवन साथी खोजना एक
 
dhirendra asthana
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पाठशाला

फिल्म समीक्षा पाठशाला के पाखंड का पाठधीरेन्द्र अस्थानाबच्चे देखें या न देखें मगर बच्चों के मां-बाप फिल्म ‘पाठशाला‘ जरूर देखे लें। उन्हें पता चलेगा कि शिक्षा के नाम पर कायम मुनाफाखोर प्राइवेट दुकानें उनके बच्चों के जीवन के साथ कैसा बर्बर खिलवाड़ कर रही
 
dhirendra asthana
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जाने कहां से आयी है

फिल्म समीक्षाप्यार खोजने जाने कहां से आयी हैधीरेन्द्र अस्थानाकुछ अलग हट कर बनीं बॉलीवुड की प्रेम कहानियों में ‘जाने कहां से आयी है‘ ने भी अपना नाम दर्ज कराने में कामयाबी पायी है। कहने को इसे रोमांटिक कॉमेडी कहा गया है लेकिन मूलतः यह एक ‘सीरियस लव स्टोरी‘
 
dhirendra asthana
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दलहन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता जरूरी

भारतीय खानपान में दालों का खास महत्व है। दालें प्रोटीन का मुख्य स्रोत हैं। इसके पीछे दो प्रमुख कारण हैं। पहला भारतीय समाज के कई समुदायों में मांसाहार वर्जित है, जो अतिरिक्त प्रोटीन का मुख्य स्रोत है। दूसरा खास कारण यह है कि प्रोटीन के अन्य स्रोतों की
 
Hemant Pandey
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तुम मिलो तो सही

फिल्म समीक्षा ‘तुम मिलो तो सही‘: जीना यहांधीरेन्द्र अस्थानास्वर्गीय दुष्यंत कुमार का एक प्रसिद्ध शेर है - ‘जियें तो अपने बगीचे में गुलमोहर के तले / मरें तो गैर की गलियों में गुलमोहर के लिए।‘ जाहिर है कि यहां गुलमोहर एक प्रतीक है - जिंदगी का, जिंदगी के
 
dhirendra asthana
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वेलडन अब्बा

फिल्म समीक्षावेल डन अब्बा, वेल डनधीरेन्द्र अस्थानाश्याम बाबू की इस कॉमेडी फिल्म को देखना अपनी प्राथमिकता में शामिल करें। मजाक-मजाक में लोकतंत्र और उसके ढांचे पर टिकी पूरी शासन व्यवस्था को हिला कर रख दिया है श्याम बेनेगल ने। ढाई घंटे में बीसियों समस्याओं,
 
dhirendra asthana
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लव, सेक्स और धोखा

फिल्म समीक्षा सच की गली में ‘लव, सेक्स और धोखा‘धीरेन्द्र अस्थानाआम तौर पर साहित्य आम जनता के लिए नहीं होता। वह जनता के बारे में हो सकता है। लेकिन सिनेमा के लिए यह सिद्धांत आम तौर पर स्वीकृत नहीं है। माना जाता है कि सिनेमा आम दर्शक के मनोरंजन के लिए बनता
 
dhirendra asthana
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राइट या रांग

फिल्म समीक्षासच को तलाशती ‘राइट या रांग‘धीरेन्द्र अस्थानाकई प्रसिद्ध फिल्मों के लेखक नीरज पाठक की बतौर निर्देशक पहली फिल्म है ‘राइट या रांग।‘ इस फिल्म की कई विशेषताएं हैं। पहली-बहुत दिनों बाद कोई फिल्म नैतिक मूल्यों से जुड़े कुछ असुविधाजनक सवालों से जूझ
 
dhirendra asthana
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अतिथि तुम कब जाओगे

फिल्म समीक्षाअतिथि, तुम तो आते रहनाधीरेन्द्र अस्थानाफिल्म का नाम भले ही ‘अतिथि तुम कब जाओगे‘ रखा गया है लेकिन इसका संदेश यही है कि अतिथि तुम आते रहना। हिंदी के प्रख्यात व्यंग्यकार स्वर्गीय शरद जोशी की व्यंग्य रचना ‘अतिथि तुम कब जाओगे‘ का न सिर्फ शीर्षक
 
dhirendra asthana
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तो बात पक्की

फिल्म समीक्षाकच्ची रह गयी ‘तो बात पक्की‘धीरेन्द्र अस्थानादुनिया जानती है कि तब्बू एक सशक्त और संवेदनशील अभिनेत्री हैं। उनके नाम के साथ अपने अपने समय की कुछ श्रेष्ठ, मर्मस्पर्शी और महत्वपूर्ण फिल्में जुड़ी हैं। वह दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता भी रह
 
dhirendra asthana
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माई नेम इज खान

फिल्म समीक्षा अद्भुत और अनूठी माई नेम इज खानधीरेन्द्र अस्थानाजैसे अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘पा‘ का महत्व उसे देख कर ही समझा जा सकता है ठीक उसी तरह ‘माई नेम इज खान‘ का महत्व समझने के लिए उसे देखना जरूरी है। आम मुंबईकरों ने इस फिल्म को पुलिस के पहरे में टूट
 
dhirendra asthana
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रण

फिल्म समीक्षा मीडिया के भीतर का ‘रण‘धीरेन्द्र अस्थानारामगोपाल वर्मा धंधा करने के लिए आमतौर पर फिल्में नहीं बनाते। कुछ अपवादों को छोड़ दें जैसे ‘सत्या‘, ‘भूत‘, ‘कंपनी‘, ‘सरकार‘ तो उनकी फिल्में बड़ा धंधा करती भी नहीं हैं। बाॅलीवुड में रामू का अपना एक अलग
 
dhirendra asthana
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वीर

फिल्म समीक्षासाम्राज्य के विरुद्ध वीरधीरेन्द्र अस्थानापहले दो-तीन बातें संक्षेप में। ‘वीर‘ एक पीरियड फिल्म है जिसकी कहानी फिल्म के हीरो सलमान खान ने लिखी है। प्रचारित किया गया है कि इस कहानी के साथ सलमान खान पिछले बीस साल से रह रहे थे। यह सलमान खान का एक
 
dhirendra asthana
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चांस पे डांस

फिल्म समीक्षा हीरो बनने के चांस पे डांसधीरेन्द्र अस्थानाएक युवक दिल्ली, कोलकाता, पटना, भोपाल, आगरा, कानपुर लखनऊ, इंदौर या अमृतसर से हीरो बनने के लिए मुंबई आता है। मुंबई जैसे विराट, तेज रफ्तार और अजनबी महानगर में रहने, खाने, जीने और कुछ बन जाने का दम तोड़
 
dhirendra asthana
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प्यार इंपासिबल

फिल्म समीक्षा संभव हो सकता है ‘प्यार इंपासिबल‘धीरेन्द्र अस्थानायह तो नये साल का सबसे बड़ा कमाल हो गया! फिल्म विश्लेषकों, निर्माताओं और पत्रकारों ने जिसे आज तक गंभीरता से बतौर एक्टर स्वीकार नहीं किया, उसने मर्मस्पर्शी, जीवंत और सहज अभिनय की एक चमकती और नयी
 
dhirendra asthana
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रात गयी बात गयी

फिल्म समीक्षायह बात है एक नशीली रात कीधीरेन्द्र अस्थानाएक जमाने के विख्यात अंग्रेजी पत्रकार-संपादक प्रीतिश नंदी के बैनर तले बनी फिल्म है ‘रात गयी बात गयी‘। ‘भेजा फ्राई‘ जैसी छोटे बजट की कामयाब टीम फिल्म से जुड़ी है। तो यह कैसे मान लेते कि फिल्म खराब होगी।
 
dhirendra asthana
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फिल्म समीक्षा - 99

पड़ सकते हैं ‘99’ के फेर में धीरेन्द्र अस्थाना बहुत दिनों बाद मल्टीप्लेक्स थिएटरों में सिनेप्रेमियों का जमावड़ा दिखाई पड़ा। हालांकि फिल्म निर्माताओं व थिएटर मालिकों का विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है। लगता है कि लड़ाई से छिटककर ‘निन्यानबे’ के निर्माताओं ने अप
 
dhirendra asthana
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जश्न

फिल्म समीक्षा प्रतिभा की जीत का ‘जश्न‘ धीरेन्द्र अस्थाना महेश भट्ट कैंप की फिल्म ‘जश्न‘ इस बात का नायाब उदाहरण है कि अगर आपके पास एक साफ-सुथरी, भावनात्मक कहानी है और आपको कहानी कहने का अंदाज आता है तो एक बेहतरीन फिल्म आकार ले सकती है। अच्छी फिल्म के
 
dhirendra asthana
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फिल्म समीक्षा देव डी

देवदास की नयी व्याख्या है ‘देव डी‘ धीरेन्द्र अस्थाना जब बहुत पहले खबर आयी थी कि शरत बाबू के अमर चरित्र देवदास पर युवा फिल्मकार अनुराग कश्यप भी फिल्म बना रहे हैं, तभी अनुमान हो गया था कि कुछ धारा के विरुद्ध होने वाला है। लीक से अलग हट कर चलने वाले प्र
 
dhirendra asthana
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सिकंदर

फिल्म समीक्षा सिकंदर: बचपन की आंख से आतंक धीरेन्द्र अस्थाना लीक से हटकर, अर्थपूर्ण सिनेमा बनाने वालों की जमात में आतंक एक प्रिय विषय है। निर्देशक पीयूष झा ने अपनी फिल्म ‘सिकंदर‘ में आतंकवाद की इबादत को बचपन की आंख से रेखांकित करने की कोशिश की है। बस
 
dhirendra asthana
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आयातित अनाज पर बढ़ती निर्भरता

भारत को कृषि प्रधान देश के रूप में जाना जाता है, जिसकी 65-70 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। इस आबादी के खेती में लगे होने के बावजूद देश को अपनी खाघ जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर रहना पड़ता है। हाल के वर्षों में खाघ पदार्थो के आयात की प्
 
हेमंत
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विनीत उत्पल

आकाश की बुलंदी पर : सुमन शर्मा सुमन शर्मा केवल वह नाम नहीं है जो सिर्फ एक अवकाश प्राप्त नेवल अफसर की बेटी और सेना के एक कर्नल की बहन है बल्कि दुनिया की वह पहली ऐसी महिला है जिसने रुसी मिग-३– को आकाश में उडाने का कारनामा कर दिखाया है। महज तीस साल की स
 
विनीत उत्पल
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रॉकेट सिंह: सेल्समैन ऑफ द ईयर

फिल्म समीक्षा कहानी के घर में ‘रॉकेट सिंह‘ धीरेन्द्र अस्थाना वैसे तो यशराज, बैनर की नयी फिल्म ‘रॉकेट सिंह: सेल्समैन ऑफ द ईयर‘ को कॉमेडी फिल्म कह कर प्रचारित किया गया है लेकिन हकीकत में यह कॉमेडी से थोड़ा आगे की फिल्म है। यह उन फिल्मों की अगली कतार में
 
dhirendra asthana
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दे दना दन

फिल्म समीक्षा हंसने की चाह में 'दे दना दन' धीरेन्द्र अस्थाना हास्य सम्राट निर्देशक प्रियदर्शन का जादू देखने सिनेमा हॉल पहुंचने वाले दर्शक निराश हो सकते हैं। जैसी कि आमतौर पर कॉमेडी फिल्में होती हैं ’दे दना दन’ भी एक अतार्किक और शुद्ध हास्य फिल्म है।
 
dhirendra asthana
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कुर्बान

फिल्म समीक्षा प्रेम से परास्त होता आतंक: कुर्बान धीरेन्द्र अस्थाना एकबारगी ऐसा लगा था कि सैफ अली खान का चरित्र आतंकवाद के अक्स में जाकर घुलने ही वाला है। उस वक्त चिंता हुई थी कि ‘बुराई पर अच्छाई की विजय‘ के विरूद्ध जाकर करण जौहर यह कैसा नाकारात्मक पा
 
dhirendra asthana