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राष्ट्र-रक्षा कैसे हो ?

नीतिज्ञ और राजनीति शास्त्रों का कहना है –‘शस्त्रेण रक्षिते राष्ट्रे शास्त्रचिंता प्रवृत्तते’ –‘शस्त्र द्वारा राष्ट्र की रक्षा हो जाने पर ही शास्त्र की चिंता में प्रवृत्त होना चाहिये।व्यक्ति के समान प्रत्येक राष्ट्र के तीन पक्ष स्वभावतः होते हैं—शत्रु,
 
सौरभ आत्रेय
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साहसी लोग ही पढें।।।।।।।।

nationalismशहादत और मौत में फर्क़ होता है...इन दोनो शब्दों के बीच एक बारीक़ फर्क लाइन होती है, जो सामान्यतः नहीं दिखती इसे देखने के लिए बेहद निष्पक्ष और पैनी नज़र के साथ वेबाकी भी ज़रूरी शर्त है। जवाब मांगने वालों ज़रा समझ लो ज़्यादा भावुक मत होना दरअसल
 
वरुण कुमार सखाजी
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आओ सोचें

और लो ये रहा एक और अनदेखी का नतीजा कब तक रहेंगे हम चुप कब तक कहेंगे मुस्लिम हिंदू आतंक अब तो हद हो जानी चाहिए इस पर जानते हैं हम बहस के अलावा कुछ नहीं कर सकते लेकिन इस ब्लॉग मंच के माध्यम को इस बहस के लिए स्वस्थ और बेहतर मनाया जा सकता है क्योंकि यहाँ
 
वरुण कुमार सखाजी