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राष्ट्रमंडल खेल २०१०-आखिर किसके लिए?

राष्ट्रमंडल खेलों का अगला आयोजन ३ से १२ अक्टूबर २०१० तक दिल्ली में होने वाला है। जिसके लिए कई वर्षों से बड़ी धूमधाम से तैयारी चल रही हैं। भारत सरकार और दिल्ली सरकार ने इन खेलों के समय पर निर्माण कार्य पूरा करने के लिए पूरी ताकत और धन झोंक दिया [...]
 
अफ़लातून
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खेलों से खिलबाड़ कब बंद होगा?

बीजिंग ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचने वाले निशानेबाज अभिनव बिंद्रा को विश्वकप व राष्ट्रमंडल खेलों की टीम से बाहर किया जाना घोर निंदनीय है। भारतीय राष्ट्रीय रायफल संघ (एनआरएआई) से यह पूछा जाना चाहिए कि उसने क्या सोचकर यह बेतुका फरमान जारी किया
 
अवधेश आकोदिया
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राष्ट्रमण्डल खेल : कैसा इन्फ़्रास्ट्रक्चर ? किसके लिए ? : सुनील

पिछले भाग से आगे : यह कहा जा रहा है कि राष्ट्रमंडल खेलों के लिए जो इन्फ्रास्ट्रक्चर बन रहा है, वह बाद में भी काम आएगा। लेकिन किनके लिए ? निजी कारों को दौड़ाने और हवाई जहाज में उडने वाले अमीरों के लिए तो दिल्ली विश्व स्तरीय शहर बन जाएगा। (वह भी कुछ समय के
 
अफ़लातून
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कॉमनवेल्थ गेम्स : गुलामी और लूट का तमाशा : सुनील

आजाद भारत के लिए यह एक शर्म का दिन था। २९ अक्टूबर २००९ को आजाद और लोकतांत्रिक भारत की निर्वाचित राष्ट्रपति सुश्री प्रतिभा पाटील अगले राष्ट्रमंडल खेलों के प्रतीक डंडे ब्रिटेन की महारानी से लेने के लिए स्वयं चलकर लंदन में उनके महल बकिंघम पैलेस में पहुंची
 
अफ़लातून