0
मैं हूँ आलू का पापड़
मैं हूँ आलू का पापड़ रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ मैं हूँ आलू का पापड़। मैं छोटे-छोटे बीज के रूप में था। किसान ने खेत की जुताई करके मुझे जमीन में दबा दिया। मेरा दम घुटने लगा। मुझे लगा मेरे प्राण पखेरू उड़ जाएँगे। किसान ने सिंचाई की। मुझसे अंकुर निकलने लगे
May 15 2010 07:00 PM



Shuffle








