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माननीय श्री रामनिवास जाजू की कविता जो परम्‍परा काव्‍य संध्‍या में पढ़ी गई (अविनाश वाचस्‍पति)

गीत सुनना है तो घायल होना सीखो ...बढ़ना अच्‍छा वहीकि जिससे बढ़ती रहे प्रसन्‍नतावो घट जाना भी तो अच्‍छाघटती जिससे खिन्‍नताचलना अच्‍छा वहीकि पथ के अन्‍य पथिक भी चले सकेंथमने में क्‍या हानिअगर हम थम कर तनिक संभल सकेंराहगीर मैं था साधारणखुशियां मिलीं अपार
 
अविनाश वाचस्पति