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निश्छल बचपन

कोमल यादें मीठे सपने , दादा दादी सारे आपने गुड़ियाँ खिलोने गोटे की चुनर , सखी सहेली पनघट की डगर गाँव की खबरे बस्ती का झमेल , आँख मिचोली का वो खैलचाट पकोड़े की चटकार , मास्टरजी का डंडा माँ की फटकारदादाजी दिलाते उन जलेबियों की मिठास , नानी के तोहफे खासम
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हम आंसू पीकर जीते है

हम आंसू पीकर जीते हैबस आंसू पीकर जीते हैफूल हटा कर कांटे दे दे ये इस दुनिया की रीते हैहम आंसू पीकर जीते हैकहने को तुम कुछ भी कह लोसारे काम हम करते हैरोज़ सुबह को जीते है और रोज़ शाम को मरते हैहम आंसू पीकर जीते हैपल पल दिन का याद करेजब सर तकिये पर धरते है
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भ्रष्टाचार

भारतीय संस्कृति का बन गया ......आचारस्वाद नया है , भ्रष्टाचार !!राजनीति क्या ? राज्य समिती क्या ?क्या नवयुवको के उच्य विचारछेड़ खानी करे लड़कियों सेमाता पिता से करे है, दुराचारभारतीय संस्कृति का बन गया .......आचारस्वाद नया है ,भ्रष्टाचार !!नेता हो या
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आँखें

हर पल हर घड़ी रहे , तांकती आँखें ।आँखों से ही दिलो में , झांकती आँखें ।।अनगिनत रंग-रंगीले, इनमे सपने बसे है ।बिन बोले बाते हो जाने की , ये ही वजह है ।।सागर से भी ज्यादा है, गहराई इनमे ।ना जाने कितनी छुपी हुई, तनहाई इनमे ।।दुःख गहरा हो मन में, तो भर आती
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ननिहाल की यादें (बाल गीत)

हेलो हेलो ज़रा फ़ोन लगानाहेलो हेलो ज़रा फ़ोन लगाना याद मुझे आते है नाना नानी, मामा और है भैया छोटे से गावं ठौड़ की छैया हेलो हेलो ज़रा फ़ोन लगाना याद मुझे आते है नाना ...मेले में जो झूले आए मामाजी ने खुब झूलाए खैल खिलोने , गली महल्ला पकड़म पाटी, हल्ला
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सब सपनों को साकार करे (गणतंत्र दिवस)

नई भौर में,नए छोर से,साध कर नए लक्ष्य कई नवल यतन कर,नवयौवन संग,पलको में,नव स्वप्न लिए सभी विधा में, सभी क्षेत्र मेंटाके नई उपलब्धियां छोड़े छोटी सोच पुरानीसभ्यता को समृद्ध करे शिक्षा का हो, अधिकार सभी को नवप्रतिभा को, मिले पहचान राजनीति रहे गंगा सी घर घर
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सब सपनों को साकार करे (गणतंत्र दिवस)

नई भौर में,नए छोर से,साध कर नए लक्ष्य कई नवल यतन कर,नवयौवन संग,पलको में,नव स्वप्न लिए सभी विधा में, सभी क्षेत्र मेंटाके नई उप्लाभियाँ छोड़े छोटी सोच पुरानीसभ्यता को सम्रध करे शिक्षा का हो, अधिकार सभी को नवप्रतिभा को, मिले पहचान राजनीति रहे गंगा सी घर घर
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मैं एक नारी

यह कॉलेज के जमाने की लिखी एक पुरस्कार अर्जित कविता हैं । जिस पर श्रेष्ठ विद्वानों की सराहना प्राप्त करने का अवसर मिला था । आज यही रचना आपने ब्लॉग जगत के मित्रो से बाटना चाहती हूँ ।महाकालीरूपा, दुर्गा स्वरूपाचामुंडा भी हूँ, मैं नर्सिहनीज्वालामुखी सी
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मैं एक नारी

यह कॉलेज के जमाने की लिखी एक पुरस्कार अर्जित कविता हैं । जिस पर श्रेष्ठ विद्वानों की सराहना प्राप्त करने का अवसर मिला था । आज यही रचना आपने ब्लॉग जगत के मित्रो से बाटना चाहती हूँ ।महाकालीरूपा, दुर्गा स्वरूपाचामुंडा भी हूँ, मैं नर्सिहानी ज्वालामुखी सी
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मेरे सवाल

विचार मंथन हो रहा मन में मेरे क्यों आज कल ?घन-घोर चिंतन हो रहा मन में मेरे क्यों आज कल ?देश की अस्मिता को लुट रहा ये कौन है ?देश के सब वीरो का क्यों बाहुबल अब मौन है ?सो गई है क्या वो शक्ति भारत के नौजवान की ?कहाँ गई वो देश भक्ति हिन्दुस्तान के इंसान की
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मेरे सवाल

विचार मंथन हो रहा मन में मेरे क्यों आज कल ?घन-घोर चिंतन हो रहा मन में मेरे क्यों आज कल ?देश की अस्मिता को लुट रहा ये कौन है ?देश के सब वीरो का क्यों बाहुबल अब मौन है ?सो गई है क्या वो शक्ति भारत के नौजवान की ?कहाँ गई वो देश भक्ति हिन्दुस्तान के इंसान की
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अंतरमन

सुन जरा तुझे हमराज़ बना,मैं एक बात बताऊबस मेरे दिल की बात नहीं,जीवन का राज़ सुनाऊजो अटल-अमर सा रहता हैऔर बिखर-संवर सा बहता हैजो "अंतरमन "की तह में बसाजिसे, संतो ने ढूंडा वन वन मेंकबीरा ने बांटा जन जन मेंमीरा ने पाया खुद मन मेंरहता है अब वो छुपा छुपाभौतीक
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अंतरमन

सुन जरा तुझे हमराज़ बना,मैं एक बात बताऊबस मेरे दिल की बात नहीं,जीवन का राज़ सुनाऊजो अटल-अमर सा रहता हैऔर बिखर-संवर सा बहता हैजो "अंतरमन "की तह में बसाजिसे, संतो ने ढूंडा वन वन मेंकबीरा ने बांटा जन जन मेंमीरा ने पाया खुद मन मेंरहता है अब वो छुपा छुपाभौतीक
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संघर्ष

आओ करे स्वागत हम हर संघर्ष काप्रगती का मनन, है विषय यह अति हर्ष काआओ करे स्वागत हम हर संघर्ष का .....राहों को दिशा प्रदान करना भी कर्मो पर क़र्ज़ हैकिंतु कर्मशील बने रहना ही तो जीवन का फ़र्ज़ हैतो क्यों ना इतिहास रचे मिलकरहम एक नए उत्कर्ष काआओ करे स्वागत हम
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सरस्वती वंदना

शवेत कमल पर बैठी माताबुद्धि ज्ञान की तुम ही दातावर दो सरस्वती माँ ...अँधियारा है इस जीवन मेंतू ज्ञान का दीप जलाबुद्धि ज्ञान का हमको वर दोजग-मग जग-मग जीवन कर दोअज्ञान का है घनघोर अँधेरामन दिव्य ज्ञान भण्डार से भर दोवर दो सरस्वती माँ ...रस छंद और अलंकारराग
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सरस्वती वंदना

शवेत कमल पर बैठी माताबुद्धि ज्ञान की तुम ही दातावर दो सरस्वती माँ ...अँधियारा है इस जीवन मेंतू ज्ञान का दीप जलाबुद्धि ज्ञान का हमको वर दोजग-मग जग-मग जीवन कर दोअज्ञान का है घनघोर अँधेरामन दिव्य ज्ञान भण्डार से भर दोवर दो सरस्वती माँ ...रस छंद और अलंकारराग
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पुकार

नीर, क्षीर, गंभीर, धीरधैर्यवान , बलवान , सुमनऔरो के हित के खातिरजो अर्पण कर दे तन मन धनमात्र पित्र भक्त सेवा अनुरक्तस्वदेश पर सदेव बलिदान करे जो अपना रक्तस्वाभिमानी हो जो अभिमानी न होविष सी कटु जिसकी वाणी न होसर्व गुण समपन्न रहे जोवो महावीर बनाओ प्रभुहे
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पुकार

नीर, क्षीर, गंभीर, धीरधैर्यवान , बलवान , सुमनऔरो के हित के खातिरजो अर्पण कर दे तन मन धनमात्र पित्र भक्त सेवा अनुरक्तस्वदेश पर सदेव बलिदान करे जो अपना रक्तस्वाभिमानी हो जो अभिमानी न होविष सी कटु जिसकी वाणी न होसर्व गुण समपन्न रहे जोवो महावीर बनाओ प्रभुहे
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ये दुनिया क्या है

एक भौर मैं भाव विभौर हो सोच रही थी ।ये दुनिया क्या है? इसका उत्तर खौज रही थी ।।मैंने अपने दिल से बोला तू बतलादे ।सच्चाई का दर्पण मुझको तू दिखालादे ।।दिल ने बोला दुनिया है सपनों का मैला ।प्रलय काल तक जंहा चले है , प्रेम का खेला ।।इस उत्तर से मन को तो
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ये दुनिया क्या है

एक भौर मैं भाव विभौर हो सोच रही थी ।ये दुनिया क्या है? इसका उत्तर खौज रही थी ।।मैंने अपने दिल से बोला तू बतलादे ।सच्चाई का दर्पण मुझको तू दिखालादे ।।दिल ने बोला दुनिया है सपनों का मैला ।प्रलय काल तक जंहा चले है , प्रेम का खेला ।।इस उत्तर से मन को तो