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कभी देखी है ऐसी मनुहार ??..........दो कविताएँ {रानीविशाल}

कहते है कि सावन के अंधे को सब हरा ही हरा दिखाई देता है .....बस कविता प्रेमीयों के साथ भी कुछ ऐसा ही है । जिन्हें कविताएँ कहने और पड़ने का रोग लग जाए, फिर क्या उनका तो सारा क्रिया-कलाप यहाँ तक की वार्तालाप भी काव्यमय ही होकर रह जाता है । जीवन की बहुत ही
 
रानीविशाल
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विकास नहीं गुलामी की सिड़ी है GMO......प्रकृति के साथ छेड़ छाड़ विनाश की द्योतक {Bt brinjal}

ज़रा सोचिये आज से कई साल पहले जब पारम्परिक खेती की जाती थी तब कभी आपने सुना था किसी को कहते की हमें टमाटर से एलर्जी है या सोयाबीन या फिर मूंगफली से एलर्जी है ?? शायद नहीं । हाँ, लेकिन आज कल सभी को यह कहते जरुर सुनते है कि अब फल, सब्जियों और अनाज में पहले
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होली की शुभकामनाए

रोली, अबीर, गुलाल,चन्दन से तो मनाते होली सभी हम तो सबको प्रेम रंग लगाए जोकि ना छुटे कभीआप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाए इस आशा के साथ की ये होली सभी के जीवन में ख़ुशियों के ढेर सरे रंग भर दे ....!!
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अमेरिका का स्नो फ़ॉल हमारे अंदाज़ से (न्यू यार्क से सचित्र)

अजी ये तो अभी शुरुआत हुई है ...........आगे आगे देखते जाइए !! अब नज़ारा कुछ और है ....रेल की पटरी बनाती हुई बिटिया अनुष्का ..!!ठंडा तो बहुत है मौसम, पर अपनी गुड़ियाँ को घुमाना है ....ना !!(अनुष्का ) अब देखिये पहला द्रश्य इस तरह बदल गया है ...!! घर के पीछे
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सार्वजनीक सूचना

ब्लॉग जगत में पदार्पण का मेरा सिर्फ एक ही उद्देश्य है, वो ये की मैं अपना साहित्य आप सभी पाठक गण तकपंहुचा सकू । चूकी मैं बचपन से ही आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी जी के साहित्य से अत्यधिक प्रभावित हूँ इसीलिए मैंने अपने ब्लॉग का नाम उनकी ही एक अत्यधिक