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भाषा की लड़ाई की आड़ में

कांग्रेस को नये नये दैत्य पैदा करने और उनसे खेलने का पुराना शोक है। ये दैत्य पहले तो उसके अपने अंदर की कलह से पैदा होते और उन्हीं से निपटने के काम आते थे। चाहे भिण्डरांवाले हों या बाल ठाकरे। लेकिन इस बार मनसे का नया दैत्य उसने शिवसेना की काट के लिए प
 
प्रदीप मिश्र
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राजेश जोशी की कवितायें

(राजेश जोशी उस दौर के सबसे मुखर युवा कवियों में से हैं जिस दौर में हम विश्वविद्यालय में पढने के साथ लडना भी सीख रहे थे। ज़ाहिर है उनकी कवितायें उस पूरी प्रक्रिया में हमारी हमसफ़र थीं और आज भी है। यह सिलसिला टूटा तो अब भी नहीं है। यहां प्रस्तुत हैं उनकी
 
अशोक कुमार पाण्डेय