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पं.डी.के.शर्मा "वत्स" उर्फ ‘बनवारी लाल’ -तुमको मिर्ची लगी तो मैं क्या करूँ?

  आदरणीय पंडित जी,प्रणाम अभी कुछ घंटे पहले ही फोन पर आपसे सोहाद्रपूर्ण तरीके से बतियाने के बाद आपकी ये ताज़ी पोस्ट   बुद्धिमानों का सम्मेलन और बनवारी लाल जी की मन की पीडा   अनायास ही पढ़ने को मिली …जान कर अच्छा लगा कि आप तो पूरे
 
राजीव तनेजा
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दिल्ली पर पाकिस्तान का कब्जा---ब्लाग4वार्ता--"राजीव तनेजा"

रवि्वारीय वार्ता प्रारंभ करते हैं और प्रस्तुत हैं कुछ बेहतरीन चिटठों के लिंक-आपको राजीव तनेजा का नमस्कार। आज ललित शर्मा जी का जन्म दिवस है--उनको ढेर सारी शुभकामनाएं-चलते हैं वार्ता पर--पलाश और सेमल के बीच एक और यात्रा ..... दिनेशराय द्विवेदी अनवरत परकल
 
राजीव तनेजा
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और ये रहे राजीव तनेजा जी :होली हंगामा पाडकास्ट

राजीव तनेजा साहब ने  औरो  के के चेहरे सजा सजा के साल भर होली मनाई आज खुद जब मेरे शिकंजे में कसे गए तब उनकी क्या हालत रही देखिये.... उनसे हुई होली हंगामा पाडकास्ट  के लिए चर्चा में वे सवालों से इत्ते शर्माए इत्ते शर्माए कि अब कित्ते शर्माए
 
गिरीश बिल्लोरे ''पॉडकास्टर''
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दिल्ली ब्लॉगर मीट-एकदम झूठ...बिल्कुल झूठ

अरे काहे का मीट?...किसका मीट?...सब बकवास इतना झूठ?...तौबा...तौबा...कुछ तो उपरवाले के कहर से डरो...कुछ तो उसके ताप से घबराओ...जिसे देखो वही जो मन में आए बके चले जा रहा है...मीट...मीट...मीट अरे!...काहे का मीट?...किसका मीट?...  किसका?...किसका कत्ल हुआ
 
राजीव तनेजा
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आ...बताएँ तुझे की कैसे होता है बच्चा

राजीव तनेजा  बड़े दिन हो गए थे खाली बैठे बैठे... कोई काम-धाम तो था नहीं अपने पास.. बस कभी-कभार कंप्यूटर खोला और थोडी-बहुत 'चैट-वैट' ही कर ली। सच पूछो तो यार बेरोज़गार था मैं और इसमें अपनी सरकार का कोई दोष नहीं, दरअसल!...अपनी पूरी जेनरेशन ही ऐसी है।
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दोस्त-दोस्त ना रहा

***राजीव तनेजा*** "दोस्त-दोस्त ना रहा...प्यार-प्यार ना रहा....ऐ ज़िन्दगी हमें तेरा एतबार ना रहा"आज टी.वी पर 'संगम' फिल्म का ये गीत ना चाहते हुए भी बार-बार मुझे पुरानी यादों की तरफ पुन: लौटाए लिए जा रहा था...ऐ मेरे प्यारे दोस्त...मैँ तुझे कहाँ
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मर्द अँधा नहीं होता

  पत्नी: औरतें अपने दिमाग की अपेक्षा अपने रूप पर ज्यादा ध्यान क्यों देती हैं?  पति: क्योंकि मर्द चाहे जितना ही बेवकूफ क्यों न हो, पर अँधा नहीं होता। विजय शर्मा(नई दिल्ली) सौजन्य: नवभारत टाईम्स
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"टीं…टीं…बीप…बीप"

टीं…टीं…बीप…बीप” ***राजीव तनेजा*** “एक लम्बे..तन्दुरस्त और गोरे-चिट्टे जवाँ मर्द (दिल्ली निवासी) पैंतालिस वर्षीय व्यवसायी को  आवश्यकता है एक खुले विचारों वाली सुन्दर…सुघड़ एवं सुशील कन्या की…जो उसके संग म
 
राजीव् तनेजा
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"हट ज्या…सुसरी…पाच्छे ने"

हट ज्या…सुसरी…पाच्छे  ने” ***राजीव तनेजा***                       “बधाई हो”…. “किस बात की?”…
 
राजीव् तनेजा
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"खबरों में से खबर सुनो"

राजीव तनेजा***        “खुश खबरी…खुश खबरी…खुश खबरी”… पूरे पानीपत शहर के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी नामी और बिगड़ैल रईसजादे ने अपने अनुभवों को..अपनी भावनाओं को…अपनी कामयाबी के
 
राजीव् तनेजा