दिल्ली यात्रा-5...कारवां चल पड़ा है मंजिल की ओर...........!
बस बिस्तर पर लेटते ही निद्रादेवी ने कब आगोश में लिया पता ही नहीं चला, कब बिजली आई और गई इसका भी भान नहीं था, बकौल राजीव खर्राटे सुनाई देने लगे। सुबह लगभग 7 बजे नींद खुलने के साथ चाय आ गयी, दैनिक कार्यों से निवृत होते ही भाभी जी ने फ़टाफ़ट नास्ता तैयार कर
Jun 02 2010 04:48 AM



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