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अठै रा मिनख घणैइ मजै म्है रैवै है
लोग कहते हैं कि शहरों की अपेक्षा गाँव के लोग ज़्यादा सुखी औरस्वस्थ हैं। हो सकता है ये सच हो लेकिन गाँव के लोग भी कम दुखीनहीं हैं । अभाव अभाव और अभाव के साथ साथ असुविधा औरअशिक्षा के चलते गाँव में गरीब का शोषण होता है और इतनाहोता है कि सुनने वाले शहरी की
May 17 2010 09:12 PM



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