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म्‍हारी कविता पोथी पाना, रददी हाळा ने बेच्‍याई

राजस्‍थानी हास्‍य गीत म्‍हारी कविता पोथी पाना, रददी हाळा ने बेच्‍याई कविता तो म्‍हारी सोतण छै, घर हाळी कहती घुर्राईजद भी मैं सरस्‍वती पूजूं, वा खैवे लिछमी जी ध्‍यावोबैठाओ ड़ोळ कमाई को, घर मांहीं दो पीसा ल्‍याओकविता ने छोड़ो बालम जी, चाहे बण जाओं हलवाई
 
किशोर पारीक 'किशोर'
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म्हाने आवे याद घणेरी, आज आपणा गांव की

राजस्‍थानी गीत म्हाने आवे याद घणेरी, आज आपणा गांव की ‍चौक तिबारा घर की बारयां, बड़ पीपळ की छांव की सीपाळा की ठंड कड़कती, और सुहाती तावड़ी कढी मंगोड़ी केर सांगरी, ताती ताती राबड़ी टाबरपण का साइना सूं, मिल गळबाथा उमाव की म्हाने आवे याद घणेरी, आज आपणा
 
किशोर पारीक 'किशोर'
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पाणी हवा विचार प्रदूषण कोडे कोनै

राजस्‍थानी गज़लपाणी हवा विचार प्रदूषण कोडे कोनैजात, धरम दीवार, प्रदूषण  कोडे कोनैंदफतर का बाबू अर अफसर रिश्‍वत लेवैखावे बिना डकार, प्रदूषण कोडे कोनैं राजनीति का दंगल में, छै घाला मेलीसगला रंग्‍या सियार, प्रदूषण कोडे कोनैंगीतां का भावां में, अब रंगत
 
किशोर पारीक 'किशोर'
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ढूंढाड़ी कवि बुद्धि प्रकाश पारीक को किशोर पारीक की काव्यांजलि

मायड भाषा मोन हुई अब, हुयो घणो नुकसान छे झरता नेना नीर थम्या सब, गीत ग़ज़ल अर मुस्कान  छे  दीप भुज्यो ढूंढाड़ी को तो, सगळा ही हैरान छेजेपर म्हांको कविवर थां बिन,  दीख रह्यो वीरान छे थाने
 
किशोर पारीक 'किशोर'
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मेरे अंचल की कहावतें

छाया बखत की चाहे कैर ही हो, चलना रास्ते का चाहे फेर ही हो, बैठना भाइयों में चाहे बैर ही हो