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म्हारी कविता पोथी पाना, रददी हाळा ने बेच्याई
राजस्थानी हास्य गीत म्हारी कविता पोथी पाना, रददी हाळा ने बेच्याई कविता तो म्हारी सोतण छै, घर हाळी कहती घुर्राईजद भी मैं सरस्वती पूजूं, वा खैवे लिछमी जी ध्यावोबैठाओ ड़ोळ कमाई को, घर मांहीं दो पीसा ल्याओकविता ने छोड़ो बालम जी, चाहे बण जाओं हलवाई
May 16 2010 12:27 PM



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