दो होली की कवितायें
दो होली की कवितायें1- उन पर रंग लगाऊं कैसेजिन मुख कालिख मली हुयी हैउन पर रंग लगाऊं कैसे?उजली खादी वाले निकलेचोर, उचक्के, पापी, बगुलेभगवा भेष किया है धारणउसमें छुपे हुये हैं रावणजनता बहुत सरल सीता सीनिर्वासित होकर वनवासीलव कुश भक्त ''माइकिल'' के
Feb 21 2010 09:15 PM



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