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यह कैसा बाप जो बेटों के हत्यारे को बचाता है...

भोपाल गैस कांड में जिला अदालत के फैसले के बाद इस मामले की कई परतें खुल कर सामने आई हैं। कुछ ऐसी सच्चाई भी सामने आई है जिससे देश की जनता अभी तक अनजान थी। लेकिन जो सच सामने आया है, उससे एक बार फिर यह बात साबित हो गई है कि मुल्क की जनता जो सरकारें चुनती है,
 
पूनम पांडे
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महाभारत की

आतंक पैदा कर पूछने का अधिकार मीडिया को भी नहीं है। यह फिल्मी डायलॉग है। बिहार के चुनावी जंग में हाथ आजमा चुके प्रकाश झा की इस नयी "राजनीति" ने सियायत और मीडिया को लेकर कई सवाल खड़े किये हैं। सियासत अगर चरम पर पहुंच जाये तो हर रिश्ता सौदेबाजी में बदल जाता
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नेताओं का मतलबी दौरा

हाथ की पांचों अंगुलियां एक जैसी नहीं होती हैं। यही बात हमारे देश भारत पर भी लागू होती है। कानून की नजर में सभी प्रदेश और नागरिक समान हैं। पर हक़ीक़त ऐसी नहीं है। यह शासक-प्रशासक और जनता अच्छी तरह जानती है। हमारे पूर्वोत्तर राज्यों में क्या हो रहा है किसी
 
चन्दन कुमार
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बंगलादेश का बढ़ता महत्त्व

बंगलादेश की तस्वीर और तकदीर बदल रही है। भारत के साथ उसके संबंधों में भी स्वाभाविकता और सहयोग की भावना विकसित हो रही है। शेखContinue Reading »
 
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जया बच्चन पर मुलायम की कृपा बरक़रार, राज्यसभा के लिए फिर से नामांकित.

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने यह घोषणा करके लोगों को चौंका दिया है कि जया बच्चन एक बार फिर से राज्यसभा के लिए उनकी पार्टी की उम्मीदवार होंगी. समाजवादी पार्टी के निष्कासित महासचिव अमर सिंह से क़रीबी रिश्तों की वजह से माना जा रहा था कि इस बार पार्टी
 
रजनीश के झा (Rajneesh K Jha)
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नाटक चालू आहे

उम्मीद जगी थी कि झारखंड में सरकार बन जाएगी, पर अब ऐसा नहीं लगता। नेता जिस तरह एक के बाद गुलाटी मार रहे हैं उन्हें देखकर शायद बंदर भी गुलाटी मारना छोड़ दे। इस तरह के नाटक पहले भी कई राज्यों में खेले जा चुके है, पर झारखंड में खेला जा रहा नाटक अपने आप में
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श्रीराम सेना ने दी जम्मू बंद की चेतावनी

अमरनाथ यात्रा के श्रद्धालुओं से कर वसूली की खिलाफत में उतरे सैकड़ों शिव भक्तों को संबोधित करते हुए विहिप नेता श्री सुखपाल सिंह ने बुधवार को कहा कि केंद्र और प्रदेश की सरकारें वोट बैंक की राजनीति के तहत ही ऐसा कर रही हैं। सरकारों का यह रवैया बेहद अफसोसजनक
 
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श्रीराम सेना ने दी जम्मू बंद की चेतावनी

अमरनाथ यात्रा के श्रद्धालुओं से कर वसूली की खिलाफत में उतरे सैकड़ों शिव भक्तों को संबोधित करते हुए विहिप नेता श्री सुखपाल सिंह ने बुधवार को कहा कि केंद्र और प्रदेश की सरकारें वोट बैंक की राजनीति के तहत ही ऐसा कर रही हैं। सरकारों का यह रवैया बेहद अफसोसजनक
 
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गाली प्रक्ररण : गडकरी ने साबित कर दिया क़ि वे पक्के संघीय हैं

भारतीय सस्कृति की वाहक भाजपा के अध्यक्स नितिन गडकरी ने बीते दिनों जिस शुद्ध संसदीय भाषा का इस्तेमाल किया उसने प्रमाणित कर दिया है क़ि गडकरी पक्के संघीय हैं. और राष्ट्रीय राजनीति में आरएसएस के मूल्यों को स्थापित करेंगे. आर आर एस को शुक्रिया अदा किया जाना
 
Hemant Pandey
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हाय रे शिबू सोरेन ----!

सत्ता के अपने ही चाल में स्वयं चित होने के बाद शिबू सोरेने को हर प्रकार से माफी मांगनी पड़ी। उन्होंने भाजपा नेतृत्व से लिखित और मौखिक के साथ, इस दुनिया में माफी मांगने के और भी जितने तरीके होते हैं, उन-उन तरीकों का बखूबी इस्तेमाल किया, लेकिने बात नहीं
 
पवन कुमार अरविन्द
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गीता को समझो, कुरान को जानो...

अभी हाल ही में आप लोगों ने अजमल कसाब व अन्य प्रकार के तथाकथित आतंकवादियों के बारे में सुना और पढ़ा होगा! बहुत लोगों की तरह हमारे बरगद के पेड़ के नीचे बैठे राजीव और हमीद को भी उत्सुकता हुई यह जानने कि आखिर ऐसे घृणित कृत्यों के पीछे व्यक्तिगत मंशा क्या होती
 
पुनीत बिंद्लिश
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टेलीवीजन (या रेडियो) की जरूरत

लम्बे समय से मैने टेलीवीजन देखना बन्द कर रखा है। मैं फिल्म या सीरियल की कमी महसूस नहीं करता। पर कुछ दिन पहले सवेरे जब मैं अपनी मालगाड़ियों की पोजीशन ले रहा था तो मुझे बताया गया कि दादरी के पास लोग ट्रैक पर आ गये हैं और दोनो ओर से ट्रेन यातायात ठप है। [...]
 
Gyandutt Pandey
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प्रधान, पोखरा, ग्रीस और पुर्तगाल

मैं पिछले महीने में प्रधान जी से कई बार बात करने का यत्न कर चुका। हर बार पता चलता है कि पोखरा (तालाब) खुदा रहे हैं। लगता है नरेगा की स्कीम उनका बहुत समय ले ले रही है। सरकार बहुत खर्च कर रही है। पैसा कहीं से आ रहा होगा। हर वैसी स्कीम जो कम [...]
 
Gyandutt Pandey
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नक्सली और राजनेता

कांग्रेस ने अकालियों की हवा निकालने के लिए जरनैल सिंह भिन्दरेवाला को खड़ा किया. भिन्दरेवाला वाला ने आतंकवाद को पैदा किया. इंदिरा गाँधी ने आतंकवाद के खिलाफ मोर्चा खोला. आतंकवाद ने इंदिरा गाँधी की जान ले ली. इंदिरा गाँधी की हत्या से हुई हिंसा हजारों सिखों
 
चन्दन कुमार
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बिन पेंदी का लोटा

अभी बमुश्किल चार महीने हुए है जब ढोल-तमाशा के साथ शिबू शोरेन ने प्रदेश की सत्ता संभाली थी। बड़े-बड़े आश्वासनों से जनता को लाद दिया था। कागजों पर योजनाओं की हरियाली छाई हुई थी...पर जमीनी हकीकत कुछ और ही बयान कर रही थी। मुख्यमंत्री पद को बनाए रखने के लिए
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शशि मोदी बनाम ललित थरूर

शशि थरूर ने जिस तरह सफलता का ग्राफ छूआ है, वह सभी को आकर्षित करता है। वह एक नौजवान और हैंडसम राजनेता हैं। कई बूढ़े नेता उनकी इस हैंडसमनेस यानी खूबसूरती पर जल-भून जाते होंगे। लेकिन अंग्रेजीदां के सत्ता वाले फॉर्मूले वह सटीक बैठते थे, इसलिए उन्हें मनमोहन
 
चन्दन कुमार
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बंदूक से विकास को चुनौती

प्रधानमंत्री ने आखिरकार मान ही लिया कि नक्सलवाद की वजह क्या है। उन्हें इस बात का एहसास हो ही गया कि 90 के दशक में जो उन्होंने आर्थिक उदारीकरण की नींव रखी थी, उससे अमीर पहले की अपेक्षा और अमीर और गरीब पहले से बहुत गरीब होते गए। इससे समाज का बहुसंख्यक वर्ग
 
चन्दन कुमार
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पूँजीवाद-माओवाद: कुछ नोट्स-५

माओवादियों के पक्ष की एक बात यह है कि जिनकी लड़ाई लड़ रहे हैं, जिनके हितों की रक्षा की बात करते हैं उस जनता के साथ बिलकुल घुले-मिले हुए हैं। जनता और उनके प्रतिनिधियों में कोई बाधा नहीं है। दूसरी तरफ़ पूँजीवाद तंत्र के राज्य और जनता के बीच इतने-इतने संस्थान
 
अभय तिवारी
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मोदी मे मिलेगी थरूर को मात

खेलों को मनोरंजन के लिए खेला जाता है। पर इस खेल पर भी राजनीतिक खेल शुरू हो चुका है। आईपीएल अपनी शुरुआत से ही दौलत का खेल बन चुका है। लेकिन अब नेताओं और फिल्मी सितारों ने इसे पैसा कमाने का पेशा बना लिया है। हम अन्य खेलों को वैसे ही भूल चुके हैं, जैसे हम
 
चन्दन कुमार
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‘राजनीति’ के बहाने राजनीतिक विमर्श

राजनीति। ये ऐसा विषय है, खासकर हिन्दुस्तान में, जिस पर फिल्म बनाना अति कठिन कार्य है। दरअसल, राजनीति में सिर्फ राज की नीति शामिल नहीं होती। इसमें मानव व्यवहार के कई पहलू शामिल हो जाते हैं। लालच, दंभ, घृणा, साम, दाम, दंड, भेद और न जाने क्या क्या। और इन
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पूँजीवाद-माओवाद: कुछ नोट्स - २

हमारे समाज में पूँजीवाद के सकारात्मक पहलू की समझ ग़ैर-मौजूद है। हम हमेशा पूँजीवाद को पिछले समाज के या वर्तमान समाज के नज़रिये से देखते हैं और हो रही उथल-पुथल के लिए उसे ज़िम्मेदार मानते हैं, और गरियाते हैं। जैसे हम हमेशा ये दुहाई देते हैं कि पूँजीवाद यहाँ
 
अभय तिवारी
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सरकार को कौन बर्खास्त करे

- नरेश सोनी -छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस ने सोमवार से राज्य की डॉ. रमन सिंह सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इससे पहले उसने अपनी ही पार्टी की अगुवाई वाली केन्द्र सरकार से मांग की थी कि इस सरकार को बर्खास्त कर दिया जाए। हालांकि केन्द्र सरकार ने इस मांग को
 
नरेश सोनी
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...जैसे सांप से डरना जरूरी है

मोदी इन्सान नहीं है। नहीं, मैं उन्हें शैतान नहीं कह रहा हूं। वैसे कहनेवाले कहते भी हैं। मर्चेंट ऑफ डेथ भी कहते हैं। लेकिन मैं उन्हें ऐसा कुछ नहीं कह रहा हूं, इसलिए मोदी के समर्थक या चाहनेवाले यहीं से न लौट जाएं। मैं कहना चाहता हूं कि मोदी इंसान नहीं,
 
विवेक आसरी
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नक्सलियों की एक और फौज बनाने की तैयारी...

क्या बांध और शादी में कोई संबंध है? किसी और के पास इसका जबाव नहीं होगा, लेकिन अगर मध्य प्रदेश के खरगौन जिले के पथराड़ गांव के लोगों से बात करेंगे, तो आपको इसका जवाब मिलेगा और वह भी हां में। गांव के पास ही स्थित महेश्वर में नर्मदा नदी पर बन रहे बांध के
 
रीतेश पुरोहित
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सम्मान की राजनीति..

जिस तरह से राष्ट्र मंडल खेलों के लिए भारतीय कलाकारों का चयन किया जा रहा है और जिस तरह से इस सूची में अमिताभ हों या ना हों इस बात का बखेड़ा बनाया जा रहा है उसकी कोई आवश्यकता नहीं है. देश में अमिताभ का जो कद है वह किसी भी परिचय का मोहताज़ नहीं है. १९८२ के
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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क्यों नहीं बदलता बिहार

यह मेरी बिहार की पहली ट्रिप थी। इससे पहले बिहार के बारे में सिर्फ सुना था या फिर खबरों में देखा था। पटना रेलवे स्टेशन से बाहर निकले तो लगा कि यार बिहार भी बड़े शहरों जैसा ही तो है। फिर जब बेगुसराय होते हुए सहरसा पहुंचे तो कुछ-कुछ असली बिहार दिखने लगा।
 
पूनम पांडे
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यह क्‍या हो रहा है ?

राजस्‍थान विधानसभा का बजट सत्र हंगामें के भेंट चढ़ रहा है। नुमाइंदें बेबुनियादी बहस में उलझ रहे हैं। आरोप-प्रत्‍यारोप का दौर चल पड़ा है। मूल मुद्दे इन सबके बीच कहीं गुम हो गए हैं और बजट की अनुदान मांगें बिना बहस के एक-एक करके पारित होती जा रही हैं। वहीं
 
दुलाराम सहारण
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सिद्धान्तविहीन राजनीति का सिद्धान्त

राजा और राजनीति, राजनीति और राजनीतिक सिद्धान्त, सिद्धान्त और नियम यह एक कदम हो सकता है राजनीति का। इन कदमों में राजशाही समाप्त हुई किन्तु राजा समाप्त नहीं हुए। राजा का पद समाप्त हुआ किन्तु राजपद की ताजपोशी होना बन्द नहीं हुई। इसी समाप्ति और चालू रहने के
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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नोटों की सहायता से वोटों की राजनीति, दलितों की मदद से सवर्णों को सत्ता

बसपा की राष्ट्रीय महारैली का आयोजन किया गया था। भव्य स्वरूप में बसपा के गठन की 25वाँ वर्ष मनाया गया साथ ही मान्यवर कांशीराम के जन्मदिन के मनाने की औपचारिकता भी पूरी कर ली गई। यह अपने में कितना हास्यास्पद लगता है कि जिस व्यक्ति ने दलित हित में कार्य करने
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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आइए टीटीएम वाली दो खबरें पढें

बिहार की पत्रकारिता कहां पहुंच गयी है, इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है। बिहार के अखबारों के दफ्तरों में एक शब्‍द प्रचलित है - टीटीएम। संवाददाता आपस में धडल्‍ले से इस शब्‍द का प्रयोग करते हैं। मसलन, वे आपस में यह कहते हुए मिल जाएंगे कि आज तो मेरे पास बस
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परिवारवाद की राजनीतिक माया

क्या बिहार की जनता ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ठुकरा दिया है? क्या अगले साल होने वाले विधान सभा चुनाव में एक बार फिर लालू प्रसाद बिहार की सत्ता पर काबिज होंगे? पिछले दिनों हुए बिहार विधानसभा की 18 सीटों के उप चुनाव में 9 सीट पर राजद-लोजपा गठबंधन के
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नीतीश छोटा नहीं हो जाएगा !

बिहार के सत्‍ताधारी दल जदयू का आंतरिक संकट गहराता ही जा रहा है। प्रदेश अध्‍यक्ष ललन सिंह के साथ अब शिवानंद तिवारी भी आ गये हैं। बीती रात (9 फरवरी,10) वह  एक टीवी चैनल पर ललन की हिमायत करते दिखे।  वह नीतीश कुमार के लिए  हिकारत भरी भाषा का
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विपक्षी एकता- सरकार की परेशानी

It seems it was only yesterday. The results for the Lok Sabha elections were out and the Congress got more than 200 seats but fell short of the magic figure of 272. But, today, it is behaving as if it has managed to get more than 300 seats. The budget
 
अखिलेश शर्मा
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ऐसे कैसे बढ़ेगा प्रॉडक्शन, पीएम जी?

पिछले कई महीनों से यह चर्चा का विषय रहा कि महंगाई बढ़ रही है। मीडिया में भी महंगाई को लेकर खूब चर्चा हुई, लेकिन प्राय: सभी जगहों पर चर्चा सतही ही थी। महंगाई बढ़ने के कारणों के बारे में प्राय: यही चीजें छनकर आ रही थीं कि महंगाई का कारण राजनीति है, जमाखोरी
 
संयम श्रीवास्तव
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उनको सालता है जीत का गम!

गम और खुशी, यह दो शब्द क्रमशः हार और जीत के साथ जुड़े हैं। लेकिन क्या किसी को अपनी जीत का गम भी हो सकता है? जी हां, ऐसा भी होता है जब किसी को अपनी जीत का गम कोई 38 साल बाद भी साल रहा हो। ऐसे ही एक सज्जन का नाम है शिवपद भट्टाचार्य । पश्चिम बंगाल के
 
प्रभाकर मणि तिवारी
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लोकतांत्रिक राजनीति की धुंधली तस्वीर

मुंबई और महाराष्ट्र के कुछ इलाक़ों में हिंसा नहीं तो कम से कम भय का माहौल ज़रूर है. इस दौरान प्रशासन का ढुलमुल और मुस्तैद दोनों रवैया देखने को मिला. पर दोनों हालात में वजह अलग-अलग थीं. पहला मसला मराठी वोट बैंक से जुड़ा था, तो दूसरा कांग्रेस के युवराज
 
चन्दन कुमार
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भाजपा भाग्य विधाता

बीजेपी में हल्दी की रस्म पूरी हो गई। नितिन गडकरी अब मनोनीत नहीं, निर्वाचित अध्यक्ष हो गए। तेरह राज्यों और संसदीय दल को मिलाकर कुल 19 सैट में परचा दाखिल हुआ। बस तीन घंटे में परचा दाखिल से लेकर जांच और चुनाव तमाम हो गया। पहली दफा बीजेपी में चुने हुए
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शरद पवार ने सब कबाड़ा कर दिया

शरद पवार ने सब कबाड़ा कर दिया। राहुल गांधी मुंबई आकर सिर्फ चार घंटे में ही शिवसेना को उसकी औकात दिखा कर गए थे। पर, पवार ने राहुल गांधी के किए – कराए पर कीचड़ उड़ेल दिया। शिवसेना के मुखिया बाल ठाकरे की विरोध की धमकी की परवाह किए बिना राहुल गांधी सड़कों पर
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कौन कहता है ठाकरे में दम नहीं

ठाकरे की हवा निकल जाने की बाते जिस तरह मीडिया व अन्य माध्यमों ने उछाली है वह सरासर झूठ है. युवराज के लिए ‘भाँड-राग’ अलापना हो तो अलग बात है.
 
संजय बेंगाणी
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फ्लैट ट्रैक खा रहे हैं स्पिनर?

साउथ अफ्रीका के खिलाफ नागपुर में पहले टेस्ट के पहले दिन हरभजन सिंह और अमित मिश्रा ने मिलकर 47 ओवर डाले और उन्हें एक भी विकेट नहीं मिला। हरभजन सिंह अपने 21 ओवरों में एक भी ओवर मेडन नहीं डाल पाए। पिछले कुछ समय से भारतीय पिचों पर स्पिनरों की ऐसी दुर्दशा का
 
सुंदरचंद ठाकुर