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प्यार का सार

'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटती रश्मि प्रभा जी की एक कविता. आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा... दस्तकें यादों कीसोने नहीं देतींदरवाज़े का पल्लाशोर करता हैखट खट खट खट...सांकल ही नहींतो हवाएँ नम सी यादों की सिहरन बनअन्दर आ
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प्यार करना हो तो बिना किसी शर्त के, देना हो तो बिना किसी प्राप्य की उम्मीद के : सुमन सिन्हा

स्वागत है आप सभी का पुन: परिकल्पना पर , ब्रेक से पहले मैं मिलवा चुकी हूँ आपको हिंदी ब्लोगिंग के कई महत्वपूर्ण हस्ताक्षरों से , किन्तु अब मैं जिस व्यक्तित्व से आपको मिलवाने जा रही हूँ वे आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रवि शंकर जी के विशेष
 
रवीन्द्र प्रभात
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लोग छोड़ जाते है रौनके, हम तो शून्य भी साथ ले जाते है !

स्वागत है आप सभी का पुन: परिकल्पना पर ...मैं रश्मि प्रभा परिचर्चा के इस क्रम को श्रीमती शोभना चौरे के विचारों के साथ विराम दे रही हूँ क्योंकि अभी मुझे आपसे ढेर सारी बातें करनी है . समय कम है और आज के इस कार्यक्रम को संपन्नता की ओर भी ले जाना है . आईये
 
रवीन्द्र प्रभात
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खैराती में खुद्दारी ! : रश्मि प्रभा

ये तो धागों की कमी थी तो जब जहाँ जैसा मिला उससे रफू कर दिया काफी नाम है इस खैराती ज़िन्दगी के पैबन्दों की इस कारीगरी के आगे आत्मा में लगे घावों की क्या बिसात
 
Rashmi Prabha
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रश्मि प्रभा के उत्सवी स्वर

...मैंने जब ब्लोगोत्सव-२०१० की परिकल्पना की और इस दिशा में कार्य कैसे किया जाए इस पर काफी विचार मंथन कर रहा था , तब रश्मि प्रभा जी ने अपने सुझाव-सहयोग से मुझे संबल दिया . यदि मैं कहूं कि आज यह उत्सव पूरे चरम पर है तो इसका काफी श्रेय रश्मि प्रभा जी को
 
रवीन्द्र प्रभात
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रश्मि प्रभा की कविता - याद रखना

याद रखनामेरे नन्हे, मेरे अपने!बनी थी मैं - परियों की शहजादी! दिखाया था -  अपनी पंखों का जादू!कहा था तुमसे - पंख होते हैं - हमारे हौसले!हौसला कभी ना खोना ... ... .याद है तुम्हें?सच है - दुनिया भाग रही है!सच है - सब बदल गया!पर
 
रावेंद्रकुमार रवि