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मरण आएगा जिस दिन द्वार …..

रवीन्द्रनाथ ठाकुर का एक गीत (बांग्ला से अनुवाद : प्रयाग शुक्ल) मरण आएगा जिस दिन द्वार मरण आएगा जिस दिन द्वार उसे तुम दोगे क्या उपहार । रखूंगा उसके सम्मुख आन कि, छलछल करते अपने प्राण विदा में दूंगा उस पर वार – मरण आएगा जिस दिन द्वार ! शरत अनगिन