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कई अनुत्तरित प्रश्नों के साथ संपन्न लखनवी ब्लोगर्स मीट

सृजनकर्मियों की बैठक का अभिप्राय होता है जीवन की सम्यक अभिव्यक्ति को संचारित करना , उद्देश्य होता है अवसर के अनुकूल आचरण करने की कला विकसित करना और निष्कर्ष होता है मानव स्वभाव अथवा चरित्र का अध्ययन करते हुए सिखना-सिखाना ।दिनांक १६।०३।२०१० को लखनऊ स्थित
 
रवीन्द्र प्रभात
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परिकल्पना पर वसंतोत्सव ..बहेगी फगुनाहट की बयार होली तक लगातार ....

सखि, वसंत आया . भरा हर्ष वन में मन, नवोत्कर्ष  छाया .किसलय-वसना नव-वय-लतिकामिली मधुर प्रिय-उर तरु पतिका,मधुप-वृंद वंदी पिक़- स्वर नभ गहराया .लता-मुकुल -हार- गंध-भार भर बही पवन मन्द-मन्द मदंतर ,जागी नयनों में वन यौवन की माया . आवृत सरसी-उर-सरसिज
 
रवीन्द्र प्रभात
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नए साल के लिए क्या नया संकल्प लेना चाहेंगे आप ?

लिए विशद विषाद हर्ष ...बीत गया स्मृतियों का वर्ष । आज वर्ष-२००९ का आखिरी दिन है , कल उगेगा नए वर्ष -२०१० का नया प्रभात । साल के आखिरी दिन दो बातें होती है । एक तो आप पछताते हैं कि पिछले साल आपने जो संकल्प लिए थे उन्हें पूरा नहीं कर सके । सोचा बहुत कुछ था
 
रवीन्द्र प्रभात