एकला चलो रे
नोबेल सम्मानित गुरुदेव रवीन्द्र नाथ ठाकुर की छोटी सी सारगर्भित कविता है 'एकला चलो रे' जिसका मेरा हिंदी अनुवाद इस प्रकार है - जब वे तुम्हारी पुकार ना सुनें,
एकला चलो रे!
एकला चलो रे! एकला चलो रे! एकला चलो रे! जब कोई तुमसे कुछ ना कहे, अरे अभागे,
जब सब
Jan 11 2010 04:36 AM



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