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कौन है सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर?

आपका अपना कोई कोण हो सकता है – ब्लॉगिरी श्रेष्ठता का, और आप उसे ही मानते हैं, मानते रहेंगे. ठीक है पर दूसरे क्या कुछ कह रहे हैं उन पर एक बार नजर मार लेने में आपका जाता क्या है? राम त्यागी ने हाल ही में बताया - कौन है सर्वश्रेष्ट ब्लॉगर : वारेन बफेट
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चेहरा, फ़र्क़ करने का माध्यम है. पहचानने का नहीं!

जिस चिट्ठाकार के प्रोफ़ाइल में दर्शित फोटू पर ये लिखा हो – चेहरा फर्क करने का माध्यम है, पहचानने का नहीं, तो उस फोटू को भले न सही, उस ब्लॉग को और उस ब्लॉग की प्रविष्टियों को जरा ध्यान से देखने की इच्छा तो होगी ही. तो, जरा ध्यान से इस ब्लॉग की
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फत्तू की कहानियाँ

कहानी नं. 1   :) फ़त्तू की सास का आई.क्यू. तो पता चल ही चुका है, आज ससुर का भी आई.क्यू. देख लीजिये। फ़त्तू अपनी ससुराल गया तो घर में केवल उसका ससुर ही था। थोड़ी देर के बाद फ़त्तू, जोकि अभी अभी कुछ महीने लखनऊ में बिताकर आया था, अपने ससुर से बोला,
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चिट्ठाचर्चा – बरास्ते पीडी : हिन्दी ब्लॉगिंग आखिर किस चुड़ैल का नाम है?

हिंदी ब्लॉगिन्ग को लेकर मेरी समझ मैं पहले ब्लौगिंग की प्रकृति को समझना जरूरी समझता हूँ फिर हिंदी ब्लॉगिंग की बात करूंगा.. ब्लॉग लिखने वाले सभी व्यक्ति जानते होंगे कि ब्लॉग शब्द "वेब लॉग" को जोड़कर बनाया गया है, और इसमें आप जो चाहे वह लिख सकते
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चिट्ठा चर्चा – बरास्ते हिमांशु मोहन

किसी समय चिट्ठाचर्चा को जमीन में गाड़ देने की बात कहने वाले ज्ञानदत्त ने अपने आज के ब्लॉग पोस्ट में चर्चायन (मिनी चर्चा?) में एक कड़ी हिमांशु मोहन के ब्लॉग की पकड़ाई है. वहाँ जाने पर कड़ी पे कड़ी जुड़ती गई. घूमते विचरते हिमांशु मोहन के एक पोस्ट पर नजर
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हैप्पी मातृ दिवस Alles Gute zum Muttertag Bonne Fête des Mères Feliz Dia das Mães Feliz Día de las Madres 母親節快樂 روز مادر مبارک سعيد عيد الأم יום שמח

मातृ दिवस पर आपके लिए पेश है खास मातृ दिवस के लिए तैयार किया गया यह विशिष्ट ब्लॉग - http://mothersdayfunontheweb.blogspot.com/ टैग लाइन पर लिखा है - Mother's Day is a very special day for honouring and celebrating Mothers around the world. I hope you
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ये क्या कबाड़िया पोस्ट है?

कबाड़खाना नाम का ब्लॉग आपकी नजरों से अछूता नहीं रहा होगा जो अपने नाम के उलट, दुनिया जहान से हीरे चुन-चुन कर पेश करता है. पर, क्या कोई ऐसा ब्लॉग भी है वो भी हिन्दी में जो सचमुच कबाड़ की बात करे? हाल ही में दिल्ली में एक कबाड़ी की दर्दनाक मौत सिर्फ इसलिए
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ब्लॉग में समाचार या समाचार में ब्लॉग?

वैसे तो कई हैं, पर उदाहरणार्थ कुछ प्रस्तुत हैं -           ऐसा नहीं लगता कि आपके शहर / मुहल्ले का भी ऐसा कोई समाचार स्थल होना चाहिए? आपके विचार में, ब्लॉग के चंद बेहतर प्रयोगों के बेहतरीन नमूनों में से एक, नहीं लगते हैं ये? (साइट
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मामू.. आई लव्ड दिस वन रे… क्या लिखते हैं आप…!

जीन्स गुरू के एक पोस्ट पर आई टिप्पणी है यह. जीन्स गुरू ‘हर्ष’ ने अपने अंग्रेज़ी-हिन्दी दुभाषी चिट्ठे में कुछ शानदार पोस्ट हिन्दी में लिखे हैं. वैसे तो उन्होंने वहाँ कॉपीराइट का बड़ा सा बोर्ड तान रखा है, मगर हमने इसे अनदेखा करते हुए उनकी एक पूरी की पूरी
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क्या हिंदी ब्लॉग जगत् में सिर्फ धर्म-अधर्म, तू-तू मैं-मैं और आप-हम हम-आप के अलावा और कुछ नहीं होता?

माफ कीजिए, आपके अपने टेक हो सकते हैं. आपके अपने दृष्टिकोण हो सकते हैं. मगर, छटे चौमासे, अगर नीचे दिए उदाहरणों जैसे एकाध पोस्ट भी आ जाएँ, तो क्या आप नहीं मानेंगे कि थोड़ा सा ही सही, हिन्दी ब्लॉगिंग में सार्थकता की झलक दिखती तो है? (पोस्ट नं 1)- चिचिंडा कि
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उड़े आकाश में ब्लॉगर, जमीं पे वो भी है इन्सां, कभी 'राम' ये चेहरा, कभी 'रहीम' मेरा चेहरा

यूँ तो घनश्याम ठक्कर के मूल ग़ज़ल का मूल शेर ये है -   उडे आकाश में शायर, जमीं पे वो भी है इन्सां, कभी 'घनश्याम' ये चेहरा, कभी 'ठक्कर' मेरा चेहरा मगर इस उम्दा शेर की स्केलेबिलिटी भी बेहद उम्दा है. इस पोस्ट का शीर्षक भी इसी स्केलेबिलिटी का नतीजा है.
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ऐसी खबर है कि हिंदी ब्लॉग जगत मैच्योरिटी(बोल्डनेस) की तरफ़ बढ़ने ही वाला है….

जाहिर है, ये शीर्षक भी किसी पोस्ट के फुटनोट से उड़ाया गया है. और, लगता है सही भी है. पेश है हिन्दी ब्लॉगजगत के बोल्डनेस को बयान करते कुछ पोस्टों के शीर्षक व लिंक -   बच्चे आप से कुछ बोल्ड पूछें, तो क्या जवाब दें...खुशदीप 'सरकारी पैसा' किशोरियों को
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2009 के टॉप #10 सड़ियल, भयानक ब्लॉग

ठंड रखिए, धीरज धरिए. आपको अभी बताते हैं. पर, क्या आप पचा पाएंगे? जब टॉप / शीर्ष के अच्छे ब्लॉगों के बारे में बताया जाता है तो तब इतना  भयंकर जूतम पैजार, हो हल्ला मचता है हिन्दी ब्लॉग जगत में, ऐसे में हिन्दी के टॉप #10 सड़ियल ब्लॉगों की सूची यदि हम
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…. नाम में क्या रक्खा है?

नाम में क्या रखा है? वो भी ब्लॉग नाम में? ‘तुम्हारा कमीना’ हो या ‘चीर फाड़’ या ‘बेचैन आत्मा’ या ‘लड्डू बोलता है’ या ‘स्याह’ या ‘विरोध’ या ‘मो सम कौन’ ! सीधा सादा ‘राम लाल का ब्लाग’ हो या  फिर ‘विचार शून्य’ ! और, ये तो महज एक झलक है, ऐसे दर्जनों हैं,
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टॉप #10 ब्लॉग

  विषय वार टॉप #10 ब्लॉगों की सूची यहाँ देखें. अपने पसंदीदा विषय की कड़ियों पर थोड़ा भ्रमण करेंगे तो बहुत से मजेदार व काम के ब्लॉग मिलेंगे. सूची, जाहिर है अंग्रेज़ी की है. हिन्दी में ऐसे विविध-विषयवार टॉप #10 ब्लॉग सूची तो दूर की कौड़ी लगती है अभी?
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जै प्रसाद संग भूरी बाई विवाहोत्सव की झलकियाँ, किस्से, गारी…

जै प्रकास संग भूरी बाई की सादी की बारात का फोटू देखिए: ( पक्का सुझाव : चित्र का पूरा आनंद लेने के लिए इसे पूरे आकार में, कम से कम आधा घंटा देखें – इसके लिए चित्र पर या यहाँ क्लिक करें.) जै प्रकास की सादी के लिए विज्ञापन कुछ यूँ निकला था : विज्ञापन :-
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रोज की रोटी बनाम गीता ज्ञान

बहुत से तथाकथित लोकप्रिय चिट्ठे जो धार्मिक एजेंडे व एंगल लिए हुए होते हैं, उनकी तल्ख़ी व उनके विवादास्पद तेवरों से अंदाजा मत लगाइए कि सभी धार्मिक चिट्ठे ऐसे ही होते होंगे. नहीं.  धार्मिक चिट्ठे प्रेरणास्पद, पठनीय और मननीय भी हो सकते हैं. प्रस्तुत
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वीरू भाई की राम राम : कनक छवि सी कामिनी, कटि काहे को क्षीण…

आज तो बस, सिर्फ और सिर्फ एक चिट्ठे की चर्चा. वीरेन्द्र शर्मा का एक चिट्ठा है – राम राम भाई. इसमें वे तमाम उपयोगी व मजेदार और आमतौर पर वैज्ञानिक खबरों का संकलन कर रहे हैं. आपने अपना चिट्ठा 2008 से लिखना शुरू किया और लगातार चिट्ठे पोस्ट कर रहे हैं. 2009
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टू कमेंट ऑर नॉट टू कमेंट?

पिछला पूरा हफ्ता टिप्पणीमय रहा. जो भाई लोग हिन्दी ब्लॉग जगत में चल रहे जूतम पैजार को लेकर गाहे बगाहे घोर चिंता में जीने लगते हैं, उन्हें दुनिया के दूसरे हिस्से में क्या कैसा चल रहा है इसका अंदाजा संभवत: नहीं होता होगा, नहीं तो उनकी चिंता सिरे से काफ़ूर
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सचमुच, काम के ब्लॉग

अभी तो अक्खा हिन्डी ब्लॉग जगत् ब्लॉग ब्लॉगर ब्लॉगेस्ट खेल रही है. ब्लॉगर-ब्लॉगवाणी-चिट्ठाजगत् जिन्दाबाद! तो इनमें काम का ब्लॉग ढूंढे से कहीं मिलेगा? आप कहेंगे, समुद्र में मोती तो बहुत पड़े हैं ढूंढने वाला चाहिए. चलिए एक कोशिश कर देखते हैं. पर मामला तो
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उर्दू ब्लॉग : मुझसे मेरा मजहब न पूछो!

नेट पर हिन्दी सामग्री की प्रचुरता, उपलब्ध तकनीक इत्यादि पर अनुनाद अपनी बेहद बारीकी और पैनी नजर रखते हैं, और नेट पर उन्हें जमाने, लोगों को जागृत करने व सामग्री जुटाने, सहेजने में भी समर्पित भाव से लगे रहते हैं. विकिपीडिया के 50 हजार पन्नों के लक्ष्य को
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कुत्ते बिल्लियों के ब्लॉग

हिन्दी में कुत्ते-बिल्लियों की तरह आपस में काटते-नोचते-झगड़ते (जाहिर है, पोस्टों-टिप्पणियों में!) ब्लॉगों के बीच भले ही अभी एक भी कुत्ता या बिल्ली का ब्लॉग न हो, मगर भविष्य जरूर उज्जवल है. क्योंकि इधर अंग्रेज़ी (और शायद अन्य प्रमुख इंटरनेटी भाषाओं में,)
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ज्ञानविमुख हिन्दी का चिट्ठाकार…

आज सुबह सवेरे जबर्दस्त मानसिक हलचल मची और विचार आया - “और मुझे लग रहा है कि चिठ्ठाचर्चा कुछ समय से जो घर्षण उत्पन्न कर रहा है, उसे देखते हुये उसे तात्कालिक रूप से गाड़ दिया जाना चाहिये। साथ साथ; भांति भांति की चिठ्ठाचर्चायें न हिन्दी की सेवा कर रही हैं न
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आइए, एक दूजे को चिट्ठा ईनाम बांटें…

उड़नतश्तरी चिट्ठे के बाजू पट्टी में अमित गुप्ता द्वारा दिए गए ब्लॉग पुरस्कार पर नजर गई तो वहाँ से कड़ी दर कड़ी खोजते पुरस्कारों का खजाना मिल गया. वैसे भी ब्लॉग पुरस्कारों का मौसम चला आया है. तो क्यों न लगे हाथ आप भी अपने पसंदीदा चिट्ठों, चिट्ठाकारों
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इंडीब्लॉगीज़ 2008 ब्लॉग पुरस्कारों की घोषणा

पिछले कुछ समय से इंडीब्लॉगीज़ ब्लॉग पुरस्कार 2008 की कवायदें चल रही थीं. विजेताओं की घोषणा हो चुकी है . आयोजकों, प्रायोजकों व विजेताओं को बधाइयाँ. इस दफा की कवायद की खास बात ये रही कि इनमें हिन्दी (भारतीय) भाषाई ब्लॉग पुरस्कारों की श्रेणी को शामिल नह
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तेरे शहर में जॉनी, आखिर कितने चिट्ठाकार हैं?

रूपचंद्र शास्त्री मयंक द्वारा एक सार्थक पहल की गई है. वे चिट्ठाकारों की डायरेक्टरी ब्लॉग पोस्ट पर ही बना रहे हैं , और अब तक कोई 75 चिट्ठाकारों के नाम-पते यहाँ दर्ज हो चुके हैं. मगर, इसी तरह की, भले ही नाम पते व मोबाइल नंबर समेत न सही, हिन्दी चिट्ठाका
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आप कौन जात के चिट्ठाकार हो?

हम सभी को जाति आधारित चिट्ठों की वकालत करनी ही चाहिए, यदि जाति विशेष को समर्पित चिट्ठे उस जाति विशेष के समाज का हित करने व उनकी समस्याओं के समाधान के लिए संकल्पित हों. जैसे कि यदुकुल नाम के ब्लॉग का उद्देश्य है - “समाज-राजनीति-प्रशासन-साहित्य-संस्कृत
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हिन्दी ब्लॉग विश्लेषण – वर्ष 2009

वर्ष 2009 में हिन्दी ब्लॉगों में क्या कुछ गया गुजरा इसका सिंहावलोकन करने का यह समय भले ही आपको थोड़ा जल्दी लगता हो, मगर साल के पिछले ग्यारह महीनों में जो कुछ घटित हुआ है उस पर एक दृष्टि डाल ली जाए तो परिदृष्य लगभग स्पष्ट तो हो ही जाएगा. रवीन्द्र प्रभ
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रेडिफ़लैण्ड की अज़ब-ग़ज़ब ब्लॉग दुनिया

अजब-गजब दुनिया है रेडिफ़ लैण्ड की हिन्दी ब्लॉग दुनिया. मैंने यहाँ बेतरतीब गोता लगाने की कोशिश की. कुछ कड़ियाँ बेहद पुरानी भी हो सकती हैं. यहीं पर मुझे यह काम की कड़ी भी मिली – http://tucmuc.blogspot.com तो, सबसे पहले तो आप ऊपर दी गई कड़ी (टकमक या टुक
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इलाहाबादी कतरनें, हिन्दी चिट्ठाकारी : एक और नई चाल?

इलाहाबाद संगोष्ठी से कुछ ही दिन पहले उच्च अध्ययन संस्थान शिमला में भी हिन्दी अध्ययन सप्ताह मनाया गया था जिसमें अन्यों के साथ चिट्ठाकार राकेश सिंह व विनीत ने भी शिरकत की थी. ब्लॉग की दुनिया पर राकेश ने अपना पर्चा - " हिन्दी चिट्ठाकारी : एक और नई चाल ?
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हिंदी चिट्ठाकारी की दुनिया : सेमिनार के कुछ वक्ता

विस्फोट पर इस सेमिनार एक विस्फोटक पोस्ट संजय तिवारी ने प्रकाशित की है – ब्लॉगरों के निशाने पर नामवर सिंह . एक निगाह अवश्य डालें. अभी अभी मसिजीवी ने अपना वक्तव्य खत्म किया. इससे पहले मनीषा पाण्डेय ने अपनी ओजस्विनी शैली में वक्तव्य दिया. हाल ही में जाक
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फुरसतिया प्रयागराज में परिचय देवत अपन

चिट्ठाकारी समारोह के द्वितीय सत्र में गर्मागर्म बहस होनी है. अनामी/बेनामी/चिट्ठाजगत् के कुंठासुर/मठाधीश/ भाषा इत्यादि पर विचार विमर्श होगा. पर, इससे पहले चिट्ठाकारों को बहुत ही कठिन परीक्षण से गुजरना पड़ा. उन्हें अपना परिचय देना पड़ा. शुरूआत फुरसतिया
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दीपावली फिर टल गई…

हिन्दी चिट्ठाजगत में दीपावली की धूम है. देवनागरी ब्लॉग सर्च में इन पंक्तियों के लिखे जाते तक पूरे सवा तीन सौ ब्लॉग प्रविष्टियों में दीपावली की शुभकामनाएँ दी जा चुकी हैं. रंग बिरंगे चित्रों, शुभकामना कार्डों, दोहों, कविताओं, गद्य-पद्य के साथ. जब तक आप
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चिट्ठों की जुगल-बंदी

आप देख रहे हैं पिछले चौबीस घंटों में सर्वाधिक पढ़े गए चिट्ठे. दिन व समय है – 8 अक्तूबर, 09, गुरूवार सुबह 7 बजे. और सोने में सुहागा ये कि इनके शीर्षकों में क्या मस्त जुगल-बंदी है. (आपकी आश्वस्ति के लिए, कि जमावट में कोई छेड़-छाड़ नहीं की गई है, साथ मे
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चर्चाओं की चर्चा

बहुत सी चर्चाएँ चिट्ठा बाजार में आ रही हैं. मौक़े की नज़ाकत भी यही कहती है. और भी चर्चाएँ होनी चाहिएँ - तमाम प्लेटफ़ॉर्म पर, तमाम विषयों पर केंद्रित. नित्य प्रकाशित होते सैकड़ों पोस्टों धारदार और पैनी नजर के लिए एक दो नहीं, दर्जन दो दर्जन चर्चाएँ नित
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आँख के बदले आँख और दाँत के बदले दाँत

यह एक सुविचार है. जब बात चली है सुविचारों की , तो अभिषेक प्रसाद की कविता में ये सुविचार तो हम आप सब पर शत प्रतिशत लागू होते हैं – यहाँ देखिये मेरी नजर से एक बच्चा खेल रहा है कितना कोमल, निर्मल, निर्लोभ, निश्छल किसी से ईर्ष्या नहीं कोई द्वेष नहीं कोई
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कितने मौसम गुज़र गये बारीश के,तुम्हारे बीना..

गुजराती भाषी कविगण यदि कविता हिन्दी में लिखेंगे तो क्या होगा? बारीश आएगी, और वे अकेले भीग लेंगे . भाई लोग (और बहना,), भाषा, व्याकरण और वर्तनी को मारो गोली – उसे साहित्य की किताबों में दर्ज रहने दो – ब्लॉग को ब्लॉग रहने दो, ब्लॉगिंग जिंदाबाद कहो और गु
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टैगलाइन चर्चा 2

तो, जैसा कि पिछले हफ़्ते वादा था, प्रस्तुत है टैगलाइन चर्चा - दूसरा व अंतिम भाग. पर पहले, थोड़ा इतिहास. समीर जी से टैगलाइन का दूसरा भाग लिखने का निवेदन किया  गया तो हत्थे से उखड़ गए. बोले, ये कोई होरियाना मौसम तो है नहीं. लोग बाग़ बुरा मान गए तो
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मुझे तो, बस मेरी मां चाहिए...

आम जनता को यह सूचित किया जाता है की यह पेज किसी को भी खुश करने की गारंटी के बिना बनाया गया है. यहाँ जो कुछ भी लिखा गया है अथवा दर्शाया गया है, वोह पेज के मालिक की पसंद या नापसंद को नही दर्शाता, ना ही किसी को हानि या लाभ पहुँचने की मंशा से है. यदि आप
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मिलिए, दिल्ली हंसोड़ दंगल चैम्पियन से...

चलिए, इस चर्चा में कुछ अत्यल्प या अचर्चित से चिट्ठों की चर्चा करते हैं. अचर्चित इसलिए भी कि इनमें बहुत से चिट्ठे मूलत: अंग्रेजी में हैं, परंतु इनमें इक्का दुक्का प्रविष्टियाँ हिन्दी में भी हैं. हम इन्हीं हिन्दी प्रविष्टियों की चर्चा करेंगे. अजयेन्द्र