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मां

मांवो नाम जो हर बच्चे की ज़ुबां पर सबसे पहले आता है या कहें वो इंसान जो बच्चे को जीने का मतलब समझाता हैमां, बच्चे को दुनिया में आने का मौक़ा देती हैदेती हैं सांसे, धडकन और एक अहसासअहसास उसके होने काउसके वजूद कारखती है ख़्याल उसकी हर ज़रूरतहर सपने का बिना
 
रवीन्द्र गोयल्
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तुम थी . . .

कभी देखा है ?बादल को जाते, पानी की तलाश मेंसहरा को तड़पते, गर्मी की आस मेवृक्ष को खड़े, मुसाफिर की राह मेंया फिर मंजिल से दूरकिसी मोड़ पर खड़े राहगीर कोएक साथी की तलाश मेंसभी हैं इंतज़ार में, एक हमसफ़र कीजो साथ चले , चलता जाएऔर दूर क्षितिज को पा जाएहम भी
 
रवीन्द्र गोयल्
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गुडियों सी

दिखती हो तुम गुडियों सी पग थिरकाते प्यानों पर हाथों में पंखा पकडेकुछ जापानी गुडियों सीदिखती हो तुम गुडियों सीआंखों से जादू बिखरातीमुझको अपने पास बुलातीलाल गुलाबी पंख दिखाती उन सतरंगी परियों सीदिखती हो तुम गुडियों सीजब मैं बैठा रात निहारूंचांद को देखूं
 
रवीन्द्र गोयल्