सड़क सुहानी
सी बी टी की किताब से एक और कविता । आप भी अपनी पिटारी खोलें और कवितायें bhejen gonujha.jha@gmail.com पर । लम्बी-चौडी सड़क सुहानी, भेद न रखती ग्राम-नगर में साथिन बनाती रोज़ सफर में, सच्चे मन से सेवा करती, लम्बी-चौडी सड़क सुहानी। कहीं-कहीं बल खाती जाती, क
Dec 29 2009 11:45 AM



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