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जीवन सबका पानी है

बचपन में ....पहली बार हमने जिस कविता को याद किया वह थी- "मछली जल की रानी है, जीवन उसका पानी है...!" यदि अपने जीवन को टटोला जाए तो इस कविता को ऐसे पढ़ा जा सकता है- " मेरा बेटा राजा, मेरी बेटी रानी है, जीवन सबका पानी है । "जल-शब्द ही जीवन में रोमांच कर
 
रवीन्द्र प्रभात